लखनऊ: डीजीपी की फटकार के बाद लखनऊ पुलिस अपराधों पर लगाम लगाने की बात कर रही है. वहीं पुलिसिंग को नया पैटर्न उपलब्ध कराने के लिए दावे किए जा रहे है लेकिन इस बात से गुरेज नहीं किया जा सकता है कि लखनऊ पुलिस कोर पुलिसिंग को भी जमीन पर उतारने में नाकाम रही है. राजधानी में गोलीकांड के चर्चाएं हो रही हैं कि आखिर लोगों को इतनी आसानी असलहे मिल कैसे जाते हैं. जिस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर लखनऊ पुलिस कोर पुलिसिंग करते हुए राजधानी लखनऊ में पहुंचने वाले असलहों की सप्लाई पर लगाम लगा लेती तो अपराध के ये हालात नहीं होते.
जाना जा रहा है सितम्बर क्राइम के माह सेसितंबर माह राजधानी लखनऊ में अपराध से भरा रहा है पिछले 25 दिन में राजधानी लखनऊ में 23 से अधिक गोलीकांड की घटनाओं को अंजाम दिया गया है. इसके बाद से पूरा उत्तर प्रदेश ही हिल गया है. डीजीपी ओपी सिंह ने राजधानी लखनऊ के आला अधिकारियों सहित सभी थानों के अध्यक्ष को बुलाकर बैठक की. बैठक में एडीजी से लेकर थाना अध्यक्षों तक की फटकार लगाई गई व जल्द घटना के खुलासे करने के निर्देश दिए गए. इस दौरान डीजीपी ओपी सिंह ने अवैध असलहों को लेकर भी सवाल किए. डीजीपी ओपी सिंह ने बैठक में पूछा कि आखिर इतना अवैध असलहे राजधानी लखनऊ में पहुंच कैसे रहा है. जिसके बाद से असलहों की सप्लाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जानिए क्या कहा पूर्व डीजीपी ने
इस बारे में जब पूर्व डीजीपी बृजलाल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि राजधानी लखनऊ में बड़े पैमाने पर अवैध असलहों की सप्लाई की जाती है. इस सप्लाईयों पर लगाम लगाई जानी चाहिए थी लेकिन पुलिस लगाम लगाने में नाकाम रही है. बृजलाल ने कहा कि लखनऊ पुलिस फायर फाइटिंग कर रहे अगर अपराध पर लगाम लगानी है तो प्लान तरीके से काम करना होगा और अपने नेटवर्क को मजबूत करना होगा. मुखबिर नेटवर्क तभी मजबूत होगा जब आम जनता का विश्वास पुलिस जीतने में कामयाब रहेगी.
वरिष्ठ पत्रकार ने प्रशासन को बताया लापरवाह
वरिष्ठ पत्रकार रत्न मणिलाल ने कहा कि जिस तरीके से घटनाएं हुई हैं से स्पष्ट है कि लखनऊ पुलिस से कहीं न कहीं चूक जरूर हुई है. सवाल वाजिब है कि आखिर राजधानी लखनऊ में अवैध असलहा कहां से आ रहा है. जिस तरीके से घटनाएं हुई हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस का सूचना तंत्र कमजोर है और अगर पुलिस का सूचना तंत्र सूचनाएं भी उपलब्ध करा रहा है तो पुलिस उन सूचनाओं पर कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रही हैं. पुलिस अवैध असलहों की सप्लाई पर लगाम लगा लेती तो इस तरह की घटनाएं सामने न आतीं.