लखनऊ : लखनऊ विकास प्राधिकरण की सुलभ आवास योजना के फ्लैटों में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्यवाही की जाएगी. प्राधिकरण अध्यक्ष रोशन जैकब ने गुरूवार को जन सुनवाई के दौरान इस संदर्भ में आदेश जारी किये हैं. जनता अदालत में पहुंचे ईडब्ल्यूएस व एलआईजी भवनों के दो आवंटियों द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया कि समय पर धनराशि का भुगतान न करने पर प्राधिकरण द्वारा चक्रवृद्धि ब्याज लगा दिया गया, जिससे सम्पत्ति की कीमत लाखों में पहुंच गई है और वह लोग भुगतान कर पाने में असमर्थ हैं. अब उनके पास मकान खाली करने की नोटिस आ रही है. इस पर मंडलायुक्त ने ईडब्ल्यूएस व एलआईजी भवनों एवं दुकानों के लिए चक्रवृद्धि ब्याज कम करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये हैं. उन्होंने कहा कि कानपुर रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर योजना की जांच में जो फर्जी रजिस्ट्री के प्रकरण सामने आ रहे हैं, उनमें समस्त सम्बंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जाए.
लापरवाही पर बाबू निलम्बित : जनता अदालत में पहुंचे ऐशबाग की मोतीझील कालोनी निवासी मुसीर हुसैन ने प्रार्थना पत्र दिया कि उन्हें प्राधिकरण से भवन संख्या ई-1/93 आवंटित है, जिसके सापेक्ष उन्होंने विभाग द्वारा बतायी गयी समस्त धनराशि ओटीएस योजना में जमा कर दी थी. लेकिन, कई बार आवेदन करने पर भी अभी तक भवन की रजिस्ट्री नहीं की जा रही है. इस पर उपाध्यक्ष डाॅ.इन्द्रमणि त्रिपाठी ने प्रकरण की फाइल मंगाकर जांच की तो पूर्व में योजना का कार्य देख रहे बाबू गिरीश शर्मा की घोर लापरवाही उजागर हुई. इस पर उपाध्यक्ष ने अवर वर्ग सहायक गिरीश शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिये हैं. वहीं, उपाध्यक्ष के निर्देश पर महज तीन घंटे में ही सम्पत्ति की गणना कराकर आवंटी मुसीर हुसैन के पक्ष में रजिस्ट्री की कार्यवाही प्रचलित करायी गयी.
आवंटियों की मौके पर ही कराई गई रजिस्ट्री : इसके अतिरिक्त जानकीपुरम निवासी ललित दीक्षित ने भूखंड की रजिस्ट्री के लिए आवेदन दिया. वहीं, कानपुर रोड योजना निवासी मुकेश कुमार मौर्या तथा सज्जादबाग निवासी साहिब आलम द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवंटित भवनों की रजिस्ट्री के सम्बंध में प्रार्थना पत्र दिया गया. इस पर उपाध्यक्ष ने इन तीनों आवंटियों को सम्बंधित कर्मचारियों के साथ प्राधिकरण के नवीन भवन में लगे निबंधन कैम्प में भेजा, जहां तीनों के पक्ष में रजिस्ट्री की कार्यवाही निष्पादित करवायी गयी. इसके अलावा अवैध निर्माण की कुछ शिकायतों पर उपाध्यक्ष ने सम्बंधित जोनल अधिकारियों को तुरंत मौके पर भेजकर जांच करवायी. उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी.
19 प्रकरणों का मौके पर हुआ निस्तारण : उपाध्यक्ष डाॅ.इन्द्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि 'प्राधिकरण दिवस जन सामान्य की समस्याओं को विस्तारपूर्वक सुना गया. इस दौरान रजिस्ट्री, फ्री-होल्ड, सीमांकन, कब्जे, अवैध निर्माण व एनओसी आदि से सम्बंधित कुल 54 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 19 प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया. वहीं, शेष प्रकरणों के निस्तारण के सम्बंध में समय-सीमा निर्धारित करते हुए सम्बंधित अधिकारियों को कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है.
काकोरी में अवैध कालोनी पर एलडीए ने चलाया बुलडोजर : लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष इन्द्रमणि त्रिपाठी ने शहर में अवैध निर्माण व प्लाटिंग के खिलाफ कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिए हैं. निर्देशों के तहत गुरुवार को काकोरी क्षेत्र में लगभग पांच बीघा क्षेत्रफल में की जा रही एक अवैध प्लाटिंग के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है. प्रवर्तन जोन-3 के जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी ने बताया कि 'प्रमोद कुमार व अन्य द्वारा काकोरी के मौंदा में ग्राम-डिगिया में लगभग 05 बीघा क्षेत्रफल में अवैध रूप से प्लाटिंग का कार्य करते हुए काॅलोनी विकसित की जा रही थी. प्राधिकरण से तलपट मानचित्र स्वीकृत कराये बिना की जा रही इस अवैध प्लाटिंग के विरूद्ध विहित न्यायालय द्वारा वाद करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए थे. कोर्ट के आदेश के तहत सहायक अभियंता वाईपी सिंह के नेतृत्व में अवर अभियंता भरत पाण्डेय, भानु प्रताप वर्मा व प्रमोद कुमार पाण्डेय द्वारा प्राधिकरण पुलिस व स्थानीय थाने के पुलिस बल के सहयोग से अवैध प्लाटिंग के ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करायी गयी. इस दौरान स्थल पर विकसित सड़कें, नाली, बाउन्ड्रीवाॅल, खम्भे आदि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया.
लगातार हो रही कार्रवाई : इससे पहले मोहनलालगंज थानाक्षेत्र के अंतर्गत किसान पथ के किनारे ग्राम-पूरनपुर में लगभग 05 बीघा क्षेत्रफल में अवैध रूप से प्लाटिंग का कार्य करते हुए काॅलोनी विकसित की जा रही थी. प्राधिकरण से तलपट मानचित्र स्वीकृत कराये बिना की जा रही इस अवैध प्लाटिंग के विरूद्ध विहित न्यायालय द्वारा वाद चलाया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण के आदेश पारित किया गया था. आदेश के बाद अवैध प्लाटिंग के ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की गई थी.