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गोरखपुर में सीवरेज सिस्टम पर सीएम योगी गंभीर, 7 क्षेत्रों में मिलेगी सुविधा - 7 क्षेत्रों में सीवर सिस्टम को डेवेलप

प्रदेश की योगी सरकार में विकास की हजारों करोड़ की परियोजनाएं गोरखपुर में संचालित हो रही हैं, जिसमें फोर लेन की सड़क बनाए जाने से लेकर ओवर ब्रिज और पर्यटन की दृष्टि से रामगढ़ ताल के सुंदरीकरण पर खूब पैसा बहाया जा रहा है.

गोरखपुर में सीवरेज सिस्टम
गोरखपुर में सीवरेज सिस्टम
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Published : Dec 8, 2022, 1:16 PM IST

गोरखपुर: शहर को सीवरेज सिस्टम से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से गंभीर हैं. वह अपने साढ़े 5 साल के कार्यकाल में अब तक करीब 18 सौ करोड़ की परिजनों को शहर के लिए जारी कर चुके हैं, जिसके तहत कुल 7 क्षेत्रों में सीवर सिस्टम को डेवेलप किया जाएगा. कुछ क्षेत्रों में कार्य चल भी रहा है तो नए क्षेत्रों को अभी हाल में सीएम ने शिलान्यास के साथ आगे बढ़ाया है. यही नहीं इसके अलावा जल निगम को राप्ती नदी को पूरी तरह से प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नया प्रोजेक्ट तैयार करने का भी आदेश प्राप्त हो गया है, जिसकी ड्राइंग, डिजाइन तैयार करने के बाद विभाग को बहुत जल्द इस परियोजना के लिए भी स्वीकृति मिलने और बजट के प्रावधान होने की उम्मीद है.

जल निगम के अधिशासी अभियंता इंजी. रतन सेन सिंह

प्रदेश की योगी सरकार में विकास की हजारों करोड़ की परियोजनाएं गोरखपुर में संचालित हो रही हैं, जिसमें फोर लेन की सड़क बनाए जाने से लेकर ओवर ब्रिज और पर्यटन की दृष्टि से रामगढ़ ताल के सुंदरीकरण पर खूब पैसा बहाया जा रहा है. वहीं, जलभराव जैसी बड़ी समस्या से निजात दिलाने और ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर करने पर भी मुख्यमंत्री ने पूरा जोर लगा दिया है. यही वजह है करीब 18 सौ करोड़ रुपए खर्च कर गोरखपुर शहर को 7 जोन में बांटकर ड्रेनेज सिस्टम को खड़ा करने का काम शुरू हो चुका है. योगी सरकार के पिछले 5 वर्ष में शहर के दो जोन में सीवर लाइन बिछनी शुरू हो गई थी, जो मौजूदा समय में टेस्ट एंड रन की स्थिति में है. वहीं, शेष 5 जोन के लिए बनाई जाने वाली सीवर लाइन के लिए बजट जारी होने के साथ निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कार्यदाई संस्था जल निगम जुट गई है.

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गोरखपुर में सीवरेज सिस्टम

जल निगम के अधिशासी अभियंता और प्रोजेक्ट मैनेजर की भी भूमिका निभा रहे इंजीनियर रतन सेन सिंह कहते हैं कि तीसरा जोन सूरजकुंड क्षेत्र है, जहां 10 एमएलडी का सीवरेज प्लांट बनाया जाना था. वह अपने अंतिम दौर में है. मार्च 2023 तक उसे पूरा कर लिए जाने का लक्ष्य है. लक्ष्य को पूरा करने के लिए दबाव भी रहता है. इसमें जनता की परेशानियों का भी ध्यान रखना पड़ता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जितनी योजनाएं स्वीकृत हुई हैं या पूर्ण हुई हैं. उसमें इसका ध्यान रखा जा रहा है. शहर में 212 एमएलडी सीवेज का जनरेशन होता है, जिसमें से 138 एमएलडी के शोधन की क्षमता उपलब्ध हो रही, जिससे 65% शुद्धीकरण का कार्य हो जाएगा. उन्होंने कहा कि राप्ती नदी में जो शहर के सात नाले गिरते हैं. उन्हें भी टेप करने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार है. संभावना है कि नए वर्ष में मुख्यमंत्री के हाथों इसकी भी स्वीकृति मिलेगी और शिलान्यास होगा, जिससे गोरखपुर का अधिकतम क्षेत्र सीवरेज सिस्टम से आच्छादित हो जाएगा.

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गोरखपुर में सीवरेज सिस्टम का मैप

माना जाता है कि गोरखपुर कटोरे जैसे शहर की आकृति में है. यह तराई क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए यहां पर जलभराव के निकासी में जहां कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है वहीं सीवर लाइन को भी स्थापित करने में यह जल निगम के लिए बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है. अब तक जिन स्थानों पर सीवर लाइन की खुदाई की जा रही है. वहां वाटर लेवल ऊपर होने की वजह से खुदाई में अधिक समय और संसाधन खर्च करना पड़ रहा है. विभाग पहले इन स्थानों से पानी निकाल कर वाटर लेवल को मेंटेन करता है. उसके बाद सीवर के लिए गड्ढा खोदे जाने की प्रक्रिया शुरू होती है. बहुत ही सुरक्षित तरीके से गड्ढे की खुदाई की जाती है, जिससे मिट्टी का दबाव और गिरना ना हो और किसी भी घटना से बचा जा सके. करीब 8 से 10 मीटर की खुदाई करने के बाद एक आयताकार लोहे के चेंबर को गड्ढे के भीतर डाला जाता है, जिससे कार्य के दौरान अगर किसी अनहोनी की वजह से मिट्टी कटकर गिरने लगे तो मजदूरों की जान बचाई जा सकती है. खुदाई बहुत ही सावधानी पूर्वक होती है. उसके बाद इसमें लंबी आयु वाले सीमेंट और कास्ट आयरन के पाइप डाले जाते हैं जो भविष्य में सीवर लाइन को बेहतर बनाते हैं.

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सीवरेज सिस्टम पर कामकाज

यह भी पढ़ें- एक फीट जमीन के लिए बड़े भाई ने छोटे भाई को उतारा मौत के घाट

गोरखपुर: शहर को सीवरेज सिस्टम से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से गंभीर हैं. वह अपने साढ़े 5 साल के कार्यकाल में अब तक करीब 18 सौ करोड़ की परिजनों को शहर के लिए जारी कर चुके हैं, जिसके तहत कुल 7 क्षेत्रों में सीवर सिस्टम को डेवेलप किया जाएगा. कुछ क्षेत्रों में कार्य चल भी रहा है तो नए क्षेत्रों को अभी हाल में सीएम ने शिलान्यास के साथ आगे बढ़ाया है. यही नहीं इसके अलावा जल निगम को राप्ती नदी को पूरी तरह से प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नया प्रोजेक्ट तैयार करने का भी आदेश प्राप्त हो गया है, जिसकी ड्राइंग, डिजाइन तैयार करने के बाद विभाग को बहुत जल्द इस परियोजना के लिए भी स्वीकृति मिलने और बजट के प्रावधान होने की उम्मीद है.

जल निगम के अधिशासी अभियंता इंजी. रतन सेन सिंह

प्रदेश की योगी सरकार में विकास की हजारों करोड़ की परियोजनाएं गोरखपुर में संचालित हो रही हैं, जिसमें फोर लेन की सड़क बनाए जाने से लेकर ओवर ब्रिज और पर्यटन की दृष्टि से रामगढ़ ताल के सुंदरीकरण पर खूब पैसा बहाया जा रहा है. वहीं, जलभराव जैसी बड़ी समस्या से निजात दिलाने और ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर करने पर भी मुख्यमंत्री ने पूरा जोर लगा दिया है. यही वजह है करीब 18 सौ करोड़ रुपए खर्च कर गोरखपुर शहर को 7 जोन में बांटकर ड्रेनेज सिस्टम को खड़ा करने का काम शुरू हो चुका है. योगी सरकार के पिछले 5 वर्ष में शहर के दो जोन में सीवर लाइन बिछनी शुरू हो गई थी, जो मौजूदा समय में टेस्ट एंड रन की स्थिति में है. वहीं, शेष 5 जोन के लिए बनाई जाने वाली सीवर लाइन के लिए बजट जारी होने के साथ निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कार्यदाई संस्था जल निगम जुट गई है.

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गोरखपुर में सीवरेज सिस्टम

जल निगम के अधिशासी अभियंता और प्रोजेक्ट मैनेजर की भी भूमिका निभा रहे इंजीनियर रतन सेन सिंह कहते हैं कि तीसरा जोन सूरजकुंड क्षेत्र है, जहां 10 एमएलडी का सीवरेज प्लांट बनाया जाना था. वह अपने अंतिम दौर में है. मार्च 2023 तक उसे पूरा कर लिए जाने का लक्ष्य है. लक्ष्य को पूरा करने के लिए दबाव भी रहता है. इसमें जनता की परेशानियों का भी ध्यान रखना पड़ता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जितनी योजनाएं स्वीकृत हुई हैं या पूर्ण हुई हैं. उसमें इसका ध्यान रखा जा रहा है. शहर में 212 एमएलडी सीवेज का जनरेशन होता है, जिसमें से 138 एमएलडी के शोधन की क्षमता उपलब्ध हो रही, जिससे 65% शुद्धीकरण का कार्य हो जाएगा. उन्होंने कहा कि राप्ती नदी में जो शहर के सात नाले गिरते हैं. उन्हें भी टेप करने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार है. संभावना है कि नए वर्ष में मुख्यमंत्री के हाथों इसकी भी स्वीकृति मिलेगी और शिलान्यास होगा, जिससे गोरखपुर का अधिकतम क्षेत्र सीवरेज सिस्टम से आच्छादित हो जाएगा.

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गोरखपुर में सीवरेज सिस्टम का मैप

माना जाता है कि गोरखपुर कटोरे जैसे शहर की आकृति में है. यह तराई क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए यहां पर जलभराव के निकासी में जहां कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है वहीं सीवर लाइन को भी स्थापित करने में यह जल निगम के लिए बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है. अब तक जिन स्थानों पर सीवर लाइन की खुदाई की जा रही है. वहां वाटर लेवल ऊपर होने की वजह से खुदाई में अधिक समय और संसाधन खर्च करना पड़ रहा है. विभाग पहले इन स्थानों से पानी निकाल कर वाटर लेवल को मेंटेन करता है. उसके बाद सीवर के लिए गड्ढा खोदे जाने की प्रक्रिया शुरू होती है. बहुत ही सुरक्षित तरीके से गड्ढे की खुदाई की जाती है, जिससे मिट्टी का दबाव और गिरना ना हो और किसी भी घटना से बचा जा सके. करीब 8 से 10 मीटर की खुदाई करने के बाद एक आयताकार लोहे के चेंबर को गड्ढे के भीतर डाला जाता है, जिससे कार्य के दौरान अगर किसी अनहोनी की वजह से मिट्टी कटकर गिरने लगे तो मजदूरों की जान बचाई जा सकती है. खुदाई बहुत ही सावधानी पूर्वक होती है. उसके बाद इसमें लंबी आयु वाले सीमेंट और कास्ट आयरन के पाइप डाले जाते हैं जो भविष्य में सीवर लाइन को बेहतर बनाते हैं.

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सीवरेज सिस्टम पर कामकाज

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