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बलरामपुर: स्कूलों में बिजली पहुंचाने में भी 'खेल' गए साहब !

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नौनिहालों के स्कूलों में विद्युतीकरण करवाने और बिजली विभाग से कनेक्शन दिलाकर उन्हें ट्यूबलाइट की रोशनी और पंखे की हवा दिलाने के लिए काम शुरू किया था. लेकिन विभागीय हिला-हवाली और भ्रष्टाचार के कारण यह योजना पूरी नहीं हो रही है.

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Published : Jul 25, 2019, 11:41 AM IST

भ्रष्टाचार के चलते बच्चे कर रहे परेशानी का सामना,नही मिल रही स्कूल मे पंखे की हवा.

बलरामपुर: जिले के सवा दो लाख बच्चों को पठन-पाठन कराने के लिए 2235 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बनाए गए है. जहां पर बच्चों को धीरे-धीरे उन तमाम सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनके पठन-पाठन में कोई दिक्कत ना आए, लेकिन बच्चों को बिजली की ही सुविधा नहीं मिल रही है.

भ्रष्टाचार के चलते बच्चे कर रहे परेशानी का सामना,नही मिल रही स्कूल मे पंखे की हवा.

क्या है पूरा मामला-

  • सरकारी स्कूलों के नौनिहालों को ट्यूबलाइट की रोशनी व पंखे की हवा उपलब्ध करवाने के नाम पर अफसरों ने खेल कर दिया है.
  • 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान 1116 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालययों में वायरिंग व उपकरण के नाम पर 2,48,68,704 रुपये खर्च कर दिए गए हैं.
  • मानकों को ताक पर रखते हुए वायरिंग व उपकरण लगाकर जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.
  • वित्त वर्ष 2017-18 में 290 जूनियर हाईस्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग ने पैसे दिए हैं.
  • विद्युत विभाग को 20,16,950 व एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) के खाते में वायरिंग, उपकरण, एनर्जी चार्ज के लिए भेजे गए थे.
  • 85,22,520 कहां-कहां खर्च कर दिए गए, इसका हिसाब-किताब भी विभाग के पास अब नहीं है.
  • कई स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहाल आज भी पंखे की हवा के लिए तरस रहे हैं.

यह पैसा सर्व शिक्षा अभियान के तहत साल 2019 में 533 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दो किस्तों में 1,26,25,704 रुपये भेजे गए थे. इसमें प्रति विद्यालय 17,688 रुपये वायरिंग व 6000 रुपये पंखे व ट्यूबलाइट के लिए प्रति विद्यालय को दिया गया था.


जबकि बेसिक शिक्षा विभाग से 574 प्राथमिक स्कूलों को 15,000 रुपये वायरिंग के लिए और 6000 रुपये पंखे व अन्य उपकरणों के लिए दिए थे. कुल मिलाकर इस मद में प्राथमिक विद्यालयों को 1,20,54,000 एवं जूनियर हाई स्कूलों को 1,89,000 रुपये भेजे गए थे.


मामला यहां पर फंसा है कि 2017-18 में जिले के 290 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 85,22,520 रुपये भेजे गए तो गए कहां. इस मद के तहत प्रति विद्यालय वारिंग के लिए 17,688 व पंखा ट्यूबलाइट के लिए 7500 रुपये व एनर्जी चार्ज के लिए 4200 रुपये खर्च होने थे.


इस मामले पर जब हमने बच्चों से बात की और उनसे स्थिति जानने को पूछा तो प्राथमिक विद्यालय प्रेम नगर में पढ़ने वाले बच्चों ने हमें बताया कि उनके यहां जब से वायरिंग की गई है. तब से बिजली का दर्शन तक नहीं हुआ. वह आज भी गर्मी में पढ़ने पर मजबूर हैं.

वायरिंग के लिए काफी समय पहले ही पैसा आ चुका. हमने वायरिंग भी करवा दी. इस मसले पर कई बार हमने विद्युत विभाग से अनुरोध किया कि हमारे यहां दो खंभों की लग जाने से बिजली पहुंच जाएगी .लेकिन बार-बार हमें विभाग द्वारा महज आश्वासन ही मिल रहा है. गर्मी के मौसम में बच्चे पढ़ने को मजबूर है.

-संजय सिंह ,प्रधानाध्यापक

जिन विद्यालयों का पैसा हमारे पास आ गया है. उनके कलेक्शन का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. किस कारण से यह काम रुका रह गया, इसकी जांच करवाई जाएगी.
-ललित कुमार,मध्यांचल विद्युत वितरण खंड ,अधीक्षण अभियंता

बलरामपुर: जिले के सवा दो लाख बच्चों को पठन-पाठन कराने के लिए 2235 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बनाए गए है. जहां पर बच्चों को धीरे-धीरे उन तमाम सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनके पठन-पाठन में कोई दिक्कत ना आए, लेकिन बच्चों को बिजली की ही सुविधा नहीं मिल रही है.

भ्रष्टाचार के चलते बच्चे कर रहे परेशानी का सामना,नही मिल रही स्कूल मे पंखे की हवा.

क्या है पूरा मामला-

  • सरकारी स्कूलों के नौनिहालों को ट्यूबलाइट की रोशनी व पंखे की हवा उपलब्ध करवाने के नाम पर अफसरों ने खेल कर दिया है.
  • 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान 1116 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालययों में वायरिंग व उपकरण के नाम पर 2,48,68,704 रुपये खर्च कर दिए गए हैं.
  • मानकों को ताक पर रखते हुए वायरिंग व उपकरण लगाकर जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.
  • वित्त वर्ष 2017-18 में 290 जूनियर हाईस्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग ने पैसे दिए हैं.
  • विद्युत विभाग को 20,16,950 व एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) के खाते में वायरिंग, उपकरण, एनर्जी चार्ज के लिए भेजे गए थे.
  • 85,22,520 कहां-कहां खर्च कर दिए गए, इसका हिसाब-किताब भी विभाग के पास अब नहीं है.
  • कई स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहाल आज भी पंखे की हवा के लिए तरस रहे हैं.

यह पैसा सर्व शिक्षा अभियान के तहत साल 2019 में 533 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दो किस्तों में 1,26,25,704 रुपये भेजे गए थे. इसमें प्रति विद्यालय 17,688 रुपये वायरिंग व 6000 रुपये पंखे व ट्यूबलाइट के लिए प्रति विद्यालय को दिया गया था.


जबकि बेसिक शिक्षा विभाग से 574 प्राथमिक स्कूलों को 15,000 रुपये वायरिंग के लिए और 6000 रुपये पंखे व अन्य उपकरणों के लिए दिए थे. कुल मिलाकर इस मद में प्राथमिक विद्यालयों को 1,20,54,000 एवं जूनियर हाई स्कूलों को 1,89,000 रुपये भेजे गए थे.


मामला यहां पर फंसा है कि 2017-18 में जिले के 290 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 85,22,520 रुपये भेजे गए तो गए कहां. इस मद के तहत प्रति विद्यालय वारिंग के लिए 17,688 व पंखा ट्यूबलाइट के लिए 7500 रुपये व एनर्जी चार्ज के लिए 4200 रुपये खर्च होने थे.


इस मामले पर जब हमने बच्चों से बात की और उनसे स्थिति जानने को पूछा तो प्राथमिक विद्यालय प्रेम नगर में पढ़ने वाले बच्चों ने हमें बताया कि उनके यहां जब से वायरिंग की गई है. तब से बिजली का दर्शन तक नहीं हुआ. वह आज भी गर्मी में पढ़ने पर मजबूर हैं.

वायरिंग के लिए काफी समय पहले ही पैसा आ चुका. हमने वायरिंग भी करवा दी. इस मसले पर कई बार हमने विद्युत विभाग से अनुरोध किया कि हमारे यहां दो खंभों की लग जाने से बिजली पहुंच जाएगी .लेकिन बार-बार हमें विभाग द्वारा महज आश्वासन ही मिल रहा है. गर्मी के मौसम में बच्चे पढ़ने को मजबूर है.

-संजय सिंह ,प्रधानाध्यापक

जिन विद्यालयों का पैसा हमारे पास आ गया है. उनके कलेक्शन का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. किस कारण से यह काम रुका रह गया, इसकी जांच करवाई जाएगी.
-ललित कुमार,मध्यांचल विद्युत वितरण खंड ,अधीक्षण अभियंता

Intro:बलरामपुर जिले के सवा दो लाख बच्चों को पठन-पाठन कराने के लिए 2235 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बनाए गए हैं यहां पर बच्चों को धीरे धीरे उन तमाम सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। जिससे उनके पठान पाठक में कोई दिक्कत ना आए और वह अनवरत इस प्रक्रिया को कर सकें।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा शायद इसी मंशा के अनुसार नौनिहालों के स्कूलों में विद्युतीकरण करवाने और बिजली विभाग से कनेक्शन दिलाकर उन्हें ट्यूबलाइट की रोशनी और पंखे की हवा दिलाने का ख्याल आया होगा। लेकिन विभागीय हिला-हवाली और भ्रष्टाचार के कारण यह योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी।


Body:सरकारी स्कूलों के नौनिहालों को ट्यूबलाइट की रोशनी व पंखे की हवा उपलब्ध करवाने के नाम पर अफसरों ने जमकर खेल कर दिया। 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान 1116 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय यों में वारिंग व उपकरण के नाम पर 2,48,68,704 रुपए खर्च कर दिए गए। यही नहीं इस काम को करते हुए मानकों को ताक पर रखते हुए वायरिंग व उपकरण लगाकर जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
वित्त वर्ष 2017-18 में 290 जूनियर हाईस्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत विभाग को 20,16,950 व एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) के खाते में वायरिंग, उपकरण, एनर्जी चार्ज के लिए भेजे गए 85,22,520 कहाँ कहाँ खर्च कर दिए गए इसका हिसाब किताब भी विभाग के पास अब नहीं है। जबकि कई स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहाल आज भी पंखे की हवा के लिए तरस रहे हैं।
असल में, यह पैसा सर्व शिक्षा अभियान के तहत साल 2019 में 533 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दो किस्तों में 1,26,25,704 रुपए भेजे गए थे। इसमें प्रति विद्यालय 17,688 रुपए वायरिंग व 6000 रुपए पंखे व ट्यूबलाइट के लिए प्रति विद्यालय को दिया गया था।
जबकि बेसिक शिक्षा विभाग से 574 प्राथमिक स्कूलों को 15,000 रुपए वायरिंग के लिए और 6000 रुपए पंखे व अन्य उपकरणों के लिए दिए थे। कुल मिलाकर इस मद में प्राथमिक विद्यालयों को 1,20,54,000 एवं जूनियर हाई स्कूलों को 1,89,000 रुपए भेजे गए थे।
मामला यहां पर फंसा है कि 2017-18 में जिले के 290 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 85,22,520 रुपए भेजे गए तो गए कहाँ।इस मद के तहत प्रति विद्यालय वारिंग के लिए 17,688 व पंखा ट्यूबलाइट के लिए 7500 रुपए व एनर्जी चार्ज के लिए 4200 रुपए खर्च होने थे।


Conclusion:इस मामले पर जब हमने बच्चों से बात की और उनसे स्थिति जानने को पूछा तो प्राथमिक विद्यालय प्रेम नगर में पढ़ने वाले बच्चों ने हमें बताया कि उनके यहां जबसे वायरिंग की गई है। तब से बिजली का दर्शन तक नहीं हुआ। वह आज भी गर्मी में पढ़ने पर मजबूर हैं।
स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय सिंह ने हमसे बात करते हुए कहा कि वायरिंग के लिए काफी समय पहले ही पैसा आ चुका था और हमने वायरिंग भी करवा दी। इस मसले पर कई बार हमने विद्युत विभाग से अनुरोध किया कि हमारे यहां दो खंभों की लग जाने से बिजली पहुंच जाएगी लेकिन बार-बार हमें विभाग द्वारा महज आश्वासन ही मिल रहा है। गर्मी के मौसम में बच्चे पढ़ने को मजबूर है।
वहीं, जब हमने इस बारे में मध्यांचल विद्युत वितरण खंड के अधीक्षण अभियंता ललित कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों का पैसा हमारे पास आ गया है। उनके कलेक्शन का काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। किस कारण से यह काम रुका रह गया, इसकी जांच करवाई जाएगी।
पैसे का हिसाब किताब ना मिलने पर जब हमने बीएसए हरिहर प्रसाद से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि बिल्कुल मानकों के हिसाब से ही वायरिंग व कनेक्शन का काम किया जा रहा है। हिसाब किताब में जो गड़बड़ी की बात कही जा रही है। उसके लिए तथ्यों की जांच दोबारा करवा ली जाएगी। अगर इस मामले में कोई दोषी पाया जाता है। तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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