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प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन को लगा टांडा में झटका, शौचालय निर्माण में अनियमितता हुई उजागर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को अंबेडकरनगर जिले में तगड़ा झटका लगा है. भ्रष्टाचार की जंजीरों में जकड़ी स्वच्छता को बढ़ावा देने वाली यह योजना अधिकारियों और कर्मचारियों के कमाई का जरिया बन गया है.

प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन को लगा टांडा में झटका
प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन को लगा टांडा में झटका
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Published : Oct 11, 2021, 8:31 AM IST

अंबेडकरनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत (Prime Minister's ambitious plan Swachh Bharat Mission) मिशन को अंबेडकरनगर जिले में तगड़ा झटका लगा (Mission suffered a major setback in Ambedkarnagar) है. भ्रष्टाचार की जंजीरों में जकड़ी स्वच्छता को बढ़ावा देने वाली यह योजना अधिकारियों और कर्मचारियों के कमाई का जरिया बन गया है. नगरपालिका की ओर से बनवाए गए 16 सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में बड़ी अनियमितता (Major irregularities in the construction of 16 community toilets) और सरकारी धन के बंदरबांट का मामला सामने आया है.

वहीं, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकार को (The government suffered due to the connivance of officers and contractors) लाखों रुपये की चपत लगा दी गई है. निर्माण में बरती गई अनियमित्ता से सरकार की साख पर भी बट्टा लग रहा है. मामला टांडा नगर पालिका से जुड़ा है. उक्त नगरपालिका क्षेत्र में तकरीबन 3 साल पहले 16 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन आधा अधूरा निर्माण ही किया गया.

प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन को लगा टांडा में झटका

इसे भी पढ़ें - Lakhimpur Violence: मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की आज कोर्ट में होगी पेशी

बताया जा रहा है कि इन 16 सामुदायिक शौचालयों में कुल 112 पुरूष और 112 महिला के लिए शौचालयों का निर्माण होना था. इसके साथ ही लघुशंका की सीट अलग से लगनी थी. इन सामुदायिक शौचालयों में दो-दो वाशबेसिन, कीपर रूम, बाउंड्रीवाल का निर्माण होना था.

इन सब के निर्माण के लिए 3 करोड़ 57 लाख 2 हजार 620 रुपये की धनराशि तय की गई थी. लेकिन अधिकांश शौचालयों में न तो बाउंड्री वाल बनवाया गया और न ही कीपर रूम और बरामदा का निर्माण हुआ है.

और तो और शौचालयों की संख्या में भी कमी कर दी गई है, जहां 14 सीट लगनी थी, वहां 10 ही लगाई गई है. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मानक के अनुरूप निर्माण कार्य पूरा हुए बिना ही ठेकेदारों को अधिकांश भुगतान कर दिया गया है. ठेकेदार भुगतान भी ले लिए और काम भी पूरा नहीं किए हैं.

टांडा नगरपालिका के ईओ आर पी श्रीवास्तव की ओर से जारी पत्र जो ईटीवी भारत के पास है के मुताबिक निर्माण कार्य प्रगति पर है. लेकिन सवाल यह उठता है कि तीन साल से अधिक समय होने के बावजूद अभी तक पालिका प्रशासन चौहद्दी तक का निर्धारण भला क्यों नहीं कर सकी है.

इस बारे में जब ईओ से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने ऑफ कैमरे पर सिर्फ इतना कहा कि अभी आंकड़ा एकत्रित कर रहे हैं. आंकड़ा मिल जाने पर जानकारी दी जाएगी.

अंबेडकरनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत (Prime Minister's ambitious plan Swachh Bharat Mission) मिशन को अंबेडकरनगर जिले में तगड़ा झटका लगा (Mission suffered a major setback in Ambedkarnagar) है. भ्रष्टाचार की जंजीरों में जकड़ी स्वच्छता को बढ़ावा देने वाली यह योजना अधिकारियों और कर्मचारियों के कमाई का जरिया बन गया है. नगरपालिका की ओर से बनवाए गए 16 सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में बड़ी अनियमितता (Major irregularities in the construction of 16 community toilets) और सरकारी धन के बंदरबांट का मामला सामने आया है.

वहीं, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकार को (The government suffered due to the connivance of officers and contractors) लाखों रुपये की चपत लगा दी गई है. निर्माण में बरती गई अनियमित्ता से सरकार की साख पर भी बट्टा लग रहा है. मामला टांडा नगर पालिका से जुड़ा है. उक्त नगरपालिका क्षेत्र में तकरीबन 3 साल पहले 16 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन आधा अधूरा निर्माण ही किया गया.

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बताया जा रहा है कि इन 16 सामुदायिक शौचालयों में कुल 112 पुरूष और 112 महिला के लिए शौचालयों का निर्माण होना था. इसके साथ ही लघुशंका की सीट अलग से लगनी थी. इन सामुदायिक शौचालयों में दो-दो वाशबेसिन, कीपर रूम, बाउंड्रीवाल का निर्माण होना था.

इन सब के निर्माण के लिए 3 करोड़ 57 लाख 2 हजार 620 रुपये की धनराशि तय की गई थी. लेकिन अधिकांश शौचालयों में न तो बाउंड्री वाल बनवाया गया और न ही कीपर रूम और बरामदा का निर्माण हुआ है.

और तो और शौचालयों की संख्या में भी कमी कर दी गई है, जहां 14 सीट लगनी थी, वहां 10 ही लगाई गई है. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मानक के अनुरूप निर्माण कार्य पूरा हुए बिना ही ठेकेदारों को अधिकांश भुगतान कर दिया गया है. ठेकेदार भुगतान भी ले लिए और काम भी पूरा नहीं किए हैं.

टांडा नगरपालिका के ईओ आर पी श्रीवास्तव की ओर से जारी पत्र जो ईटीवी भारत के पास है के मुताबिक निर्माण कार्य प्रगति पर है. लेकिन सवाल यह उठता है कि तीन साल से अधिक समय होने के बावजूद अभी तक पालिका प्रशासन चौहद्दी तक का निर्धारण भला क्यों नहीं कर सकी है.

इस बारे में जब ईओ से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने ऑफ कैमरे पर सिर्फ इतना कहा कि अभी आंकड़ा एकत्रित कर रहे हैं. आंकड़ा मिल जाने पर जानकारी दी जाएगी.

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