जयपुर. राजस्थान विधानसभा में बुधवार को आरपीएससी पेपर लीक मामले में स्थगन के माध्यम से भाजपा नेताओं ने सरकार पर सवाल खड़े किए. साथ ही इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने और आरपीएससी को भंग करने की भी मांग रखी. इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में अब दो मुद्दे चर्चा के लायक नहीं रहे, एक तो भ्रष्टाचार और एक आरपीएससी.
हमारी नहीं तो सचिन पायलट की तो मानें : राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि इस सरकार में एक के बाद एक 18 पेपर लीक हो चुके हैं और न जाने कितने गरीब युवा आत्महत्या करने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि संवैधानिक संस्था के, सरकार के नामजद लोगों के नाम इसमें सामने आ रहे हैं. राजेंद्र राठौड़ ने गोपाल केसावत से लेकर आरपीएससी सदस्य मंजू शर्मा का नाम लेते हुए दावा किया कि राजस्थान में नौकरियां साढ़े 18 लाख में बिक रही हैं. सरकार हमारी तो नहीं मान रही, लेकिन सचिन पायलट की तो मानें जिन्होंने युवाओं के पांव के छालों की कसम खाकर कहा था कि आरपीएससी भंग होनी चाहिए.
पढ़ें. विधानसभा में संगठित अपराध के खिलाफ बिल पारित, देश का चौथा राज्य बना राजस्थान
यूपीएससी की तर्ज पर हो परीक्षा : भाजपा की ओर से आरपीएससी पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से करवाने और आरपीएससी को भंग करने की मांग उठाई गई. इस दौरान सदन में भाजपा विधायकों ने जमकर नारेबाजी की. इस मामले पर पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डीपी जारोली और राजीव गांधी स्टडी सर्किल के पदाधिकारियों और आरपीएससी के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा का नाम लेते हुए कहा कि अब राजस्थान की जनता पेपर लीक को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने आरपीएससी को भंग करने और यूपीएससी की तर्ज पर राजस्थान में परीक्षाएं करवाने की मांग की.
इस दौरान विधायक अशोक लाहोटी ने आरोप लगाया कि आरपीएससी के वर्तमान चेयरमैन, पहले सरकार के मुखिया की सेवा करते रहे जिसके चलते उन्हें यह पद मिला. लाहोटी ने सदन में ब्रह्म प्रकाश के नाम की चर्चा करते हुए कहा कि यह नाम भी पेपर लीक में शामिल है, जिसके तार दिल्ली के एआईसीसी से जुड़े हुए हैं.