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RSS ने मनाया नया साल, जोधपुर पहुंचे सह सरकार्यवाह ने दिया एकजुटता का मंत्र...बताया कैसे यूरोप ने हमसे लिया कैलेंडर का ज्ञान! - वर्ष प्रतिपदा उत्सव

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने चैत्र प्रतिपदा पर नववर्ष (Chaitra Navratri Pratipada) मनाया. जोधपुर में आयोजित प्रतिपदा उत्सव में सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल शामिल हुए. स्वंयसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने एकजुट रहकर राष्ट्र को मजबूत करने का मंत्र दिया.

Chaitra Navratri Pratipada
जोधपुर पहुंचे सह सरकार्यवाह ने दिया एकजुटता का मंत्र
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Published : Apr 2, 2022, 2:22 PM IST

जोधपुर. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा है कि भारतीय संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है. इतनी पुरानी है कि दुनिया के अन्य देशों के उद्भव की तारीखें सबको पता हैं लेकिन भारत कब असितत्व में आया है कोई नहीं बता सकता क्योंकि भारतीय संस्कृति प्राचीन व पुरातन है. वर्ष प्रतिपदा उत्सव (Chaitra Navratri Pratipada) पर आदर्श विद्यामंदिर केशव परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संघ के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने चैत्र प्रतिपदा (RSS Celebrate Indian New Year 2022) का महत्व बताया और यूरोपियन कैलेंडर के बनिस्बत हिन्दू कैलेंडर की प्रासंगिकता बताई.

समझाया कैलेंडर का गुणा भाग: सह सरकार्यवाह बोले यूरोपियन को वर्ष के 365 दिनों का ज्ञान नहीं था. उनके पहले कलैंडर में दस महीने होते थे. इनमें पांच नाम उनके देवी देवताओं के थे. दस माह में हर साल सदी गर्मी का समय बदलता रहता था. जब उन्होंने भारतीय गणना देखी तो समझ में आया कि गर्मी और सर्दी का समय हर बार क्यों बदलता है? फिर उन्होंने दो महीने जुलाई और अगस्त अपने राजाओं के नाम पर जोड़े. हमारी संस्कृति, इतिहास, शिक्षा, अर्थव्यवस्था सब कुछ पूरी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ (Difference Between Indian And European Calender) था. हमने सेल्यूकस अलेक्जेंडर को हराया. बावजूद इसके आठ सौ साल जो हमने निकाले वह बहुत मुश्किल भरे थे.

जोधपुर पहुंचे सह सरकार्यवाह ने दिया एकजुटता का मंत्र

पढ़ें- स्वतंत्रता मिली लेकिन न्यूनतम स्वाधीनता से अपना तंत्र विकसित नहीं हुआ : संघ

देश कष्ट काल में रहा. मतांतरण हुआ. माताओं बहनों ने अत्याचार सहे. ऐसा क्यों हुआ? इसके जिम्मेदार बाहरी आक्रमणकारी नहीं थे. हमारी दुर्दशा के जिम्मेदार हम थे. हम आपस में लड़े, वैमन्सयता पाली और एकजुट नहीं हुए. कुरीतियों में फंसे रहे. जो सुधार समाज का होना चाहिए था वो नहीं कर सके. अब हम आजादी के अमृत वर्ष में हैं. हमे एकजुट हो जाना चाहिए. स्वतंत्रता में सहयोग देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति कृतघ्न होना चाहिए और मजबूत भारत के लिए काम करना चाहिए.

शुभकार्य पचांग से, उत्सव अंग्रेजी तारीख से क्यों?: सह सरकार्यवाह ने कहा कि हम परिवार में सभी शुभ कार्य अपने भारतीय पचांग से करते हैं. शादी का मुहूर्त पंचाग से निकलता है लेकिन हम उनकी वार्षिकी अंग्रेजी तारीख से मनाते है. जबकि अंग्रेजी तारीख से वह तिथि नहीं होती. हमें ये समझना होगा कि जो मुहूर्त निकाला गया था वो नक्षत्र तिथि के अनुरूप था. हमें इस पर विचार करना चाहिए. इस मानसिकता से मुक्ति प्राप्त करनी होगी.जन्मदिन व विवाह वर्षगांठ भारतीय तिथि से ही मनाने चाहिए.

कार्यक्रम में भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल शेरसिंह विशिष्ट अतिथि थे. महानगर संघचालक प्रकाशचंद जीरावल ने बाद में धन्यवाद ज्ञापित किया. इसके बाद तीन अलग-अलग पंथ संचलन का आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.

जोधपुर. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा है कि भारतीय संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है. इतनी पुरानी है कि दुनिया के अन्य देशों के उद्भव की तारीखें सबको पता हैं लेकिन भारत कब असितत्व में आया है कोई नहीं बता सकता क्योंकि भारतीय संस्कृति प्राचीन व पुरातन है. वर्ष प्रतिपदा उत्सव (Chaitra Navratri Pratipada) पर आदर्श विद्यामंदिर केशव परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संघ के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने चैत्र प्रतिपदा (RSS Celebrate Indian New Year 2022) का महत्व बताया और यूरोपियन कैलेंडर के बनिस्बत हिन्दू कैलेंडर की प्रासंगिकता बताई.

समझाया कैलेंडर का गुणा भाग: सह सरकार्यवाह बोले यूरोपियन को वर्ष के 365 दिनों का ज्ञान नहीं था. उनके पहले कलैंडर में दस महीने होते थे. इनमें पांच नाम उनके देवी देवताओं के थे. दस माह में हर साल सदी गर्मी का समय बदलता रहता था. जब उन्होंने भारतीय गणना देखी तो समझ में आया कि गर्मी और सर्दी का समय हर बार क्यों बदलता है? फिर उन्होंने दो महीने जुलाई और अगस्त अपने राजाओं के नाम पर जोड़े. हमारी संस्कृति, इतिहास, शिक्षा, अर्थव्यवस्था सब कुछ पूरी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ (Difference Between Indian And European Calender) था. हमने सेल्यूकस अलेक्जेंडर को हराया. बावजूद इसके आठ सौ साल जो हमने निकाले वह बहुत मुश्किल भरे थे.

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देश कष्ट काल में रहा. मतांतरण हुआ. माताओं बहनों ने अत्याचार सहे. ऐसा क्यों हुआ? इसके जिम्मेदार बाहरी आक्रमणकारी नहीं थे. हमारी दुर्दशा के जिम्मेदार हम थे. हम आपस में लड़े, वैमन्सयता पाली और एकजुट नहीं हुए. कुरीतियों में फंसे रहे. जो सुधार समाज का होना चाहिए था वो नहीं कर सके. अब हम आजादी के अमृत वर्ष में हैं. हमे एकजुट हो जाना चाहिए. स्वतंत्रता में सहयोग देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति कृतघ्न होना चाहिए और मजबूत भारत के लिए काम करना चाहिए.

शुभकार्य पचांग से, उत्सव अंग्रेजी तारीख से क्यों?: सह सरकार्यवाह ने कहा कि हम परिवार में सभी शुभ कार्य अपने भारतीय पचांग से करते हैं. शादी का मुहूर्त पंचाग से निकलता है लेकिन हम उनकी वार्षिकी अंग्रेजी तारीख से मनाते है. जबकि अंग्रेजी तारीख से वह तिथि नहीं होती. हमें ये समझना होगा कि जो मुहूर्त निकाला गया था वो नक्षत्र तिथि के अनुरूप था. हमें इस पर विचार करना चाहिए. इस मानसिकता से मुक्ति प्राप्त करनी होगी.जन्मदिन व विवाह वर्षगांठ भारतीय तिथि से ही मनाने चाहिए.

कार्यक्रम में भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल शेरसिंह विशिष्ट अतिथि थे. महानगर संघचालक प्रकाशचंद जीरावल ने बाद में धन्यवाद ज्ञापित किया. इसके बाद तीन अलग-अलग पंथ संचलन का आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.

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