जयपुर. प्रदेश के अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस एण्ड विजुअल इंपेयरमेंट (NPCB & VI) के अंतर्गत प्रशिक्षित लगभग 550 बेरोजगार नेत्र सहायकों को शीघ्र नियुक्ति प्रदान करने की मांग की है. वहीं महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रशिक्षित बेरोजगार नेत्र सहायक पिछले कई वर्षों से अपनी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं.
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लेकिन चिकित्सा विभाग की अनदेखी की वजह से उनकी नियुक्ति की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस संबंध में प्रदेश के कई विधायकों व जन प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर नेत्र सहायकों की नियुक्ति की मांग की है, लेकिन उनपर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है. इससे प्रदेश में नियुक्ति की आशा में बैठे लगभग 550 बेरोजगार नेत्र सहायकों में काफी निराशा है.
वहीं राठौड़ ने कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार कोरोना वैश्विक महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. इस क्रम में पैरामेडिकल केडर्स के सहायक, रेडियोग्राफर, लैब टेक्नीशियन व ईसीजी टेक्नीशियन आदि की नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति भी जारी कर दी गई है. लेकिन नेत्र सहायकों की नियुक्ति के लिए अभी तक कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है.
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जबकि यह प्रमाणित हो चुका है कि कोविड-19 का संक्रमण आंखों के जरिए भी फैल रहा है. उन्होंने बताया कि नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस एण्ड विजुअल इंपेयरमेंट के अंतर्गत नेत्र सहायकों की नियुक्ति का प्रमुख उद्देश्य राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र सेवा उपलब्ध कराना व जिला स्तर पर मौजूदा नेत्र सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है.
इसके लिए प्रदेश के सभी पीएचसी, सीएचसी, जिला चिकित्सालय आदि पर नेत्र सहायकों के पद सृजित किए जाने हैं. लेकिन विडंबना यह है कि अभी तक मात्र 295 नेत्र सहायक ही राज्य सेवा में है. वहीं शर्मा ने बताया कि नेत्र सहायकों की अंतिम विज्ञप्ति वर्ष 2018 में जारी हुई थी, जिसमें 178 पदों पर भर्ती की जानी थी. लेकिन विभाग के की ओर से मात्र 113 पदों पर ही भर्ती की गई. वहीं राठौड़ ने कहा कि नेत्र सहायकों की अनदेखी की वजह से प्रदेश में अंधेपन की समस्या अन्य राज्यों के मुकाबले अत्यधिक गंभीर है.