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गांव जहां नहीं है सड़क बिजली और पानी, आजादी के 70 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं को मोहताज - संजय टाइगर रिजर्व

आजादी के सालों गुजर जाने के बाद भी सीधी जिले में आज भी ऐसे अनेक गांव हैं जो बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है सड़क बिजली जैसी जरूरतों के लिए ग्रामीणों ने अनेक बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक आवाज लगाई, लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है.

Harrai a village in Sidhi district
गांव जहां नहीं है सड़क बिजली और पानी
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Published : Dec 9, 2019, 1:34 AM IST

सीधी। आजादी के सालों गुजर जाने के बाद भी सीधी जिले में आज भी ऐसे अनेक गांव हैं जो बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है. जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ऐसा ही एक गांव है हर्रई. सड़क बिजली जैसी जरूरतों के लिए ग्रामीणों ने अनेक बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक आवाज लगाई लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है. मीडिया से जानकारी दिए जाने के बाद जिला प्रशासन के कान खड़े हुए और जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने का भरोसा दिलाया.

गांव जहां नहीं है सड़क बिजली और पानी

सदियों पुरानी हैं सड़कें
सदियों पुरानी है सड़क बिजली ना होने से गांव में पहुंच जाने के बाद आपको भी ऐसा लगेगा कि हम उस भारत में खड़े हैं, जहां आज से 100 साल पहले खड़े थे. वही पगडंडी रास्ता, वही लालटेन युग जहां लोग घुप अंधेरे में रहा करते थे. जंगल और पहाड़ों से घिरा होने से ना तो कोई अधिकारी गांव जाता है ना कोई प्रतिनिधि, हां चुनाव के वक्त जरूर एक-दो नेता वोट मांगने चले जाते है.

नहीं मिल पाती स्वास्थ सुविधाएं
हर्रई गांव आज भी विकास से कोसों दूर नजर आता है. सौर ऊर्जा से गांव को रोशन करने की कवायद जरूर हुई लेकिन वह भी सफेद हाथी साबित हुई. गांव के लोगों का कहना है कि गांव में कोई बीमार पड़ जाए या डिलीवरी महिलाओं की जांज करवानी हो तो एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती जिससे बीमार की गांव में मौत हो जाती है. बिजली न होने से जंगली जानवरों का डर बना रहता है. अनेक बार अधिकारी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई लेकिन सब भरोसा देकर चले जाते हैं.

संजय टाइगर रिजर्व के कारण भी समस्याएं
इस मामले में कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि मामला अभी संज्ञान में आया है, दूरदराज का गांव होने से जरूर सड़क बिजली गांव में नहीं पहुंच पाई होगी. हम जाकर बात करेंगे और यदि इलाका संजय टाइगर रिजर्व में नहीं आता होगा तो गांव में सड़क बनवाने की कोशिश की जाएगी.

बहरहाल सालों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीणों की शासन प्रशासन कब तक सुनता है यह तो देखने वाली बात होगी, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है की कितनी सरकारें आईं और वोट बटोरने के लिए, पर गांव की सुध किसी ने नहीं ली. ऐसे में देखना होगा कि कलेक्टर के भरोसा के बाद क्या कुछ गांव का विकास हो पाता है.

सीधी। आजादी के सालों गुजर जाने के बाद भी सीधी जिले में आज भी ऐसे अनेक गांव हैं जो बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है. जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ऐसा ही एक गांव है हर्रई. सड़क बिजली जैसी जरूरतों के लिए ग्रामीणों ने अनेक बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक आवाज लगाई लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है. मीडिया से जानकारी दिए जाने के बाद जिला प्रशासन के कान खड़े हुए और जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने का भरोसा दिलाया.

गांव जहां नहीं है सड़क बिजली और पानी

सदियों पुरानी हैं सड़कें
सदियों पुरानी है सड़क बिजली ना होने से गांव में पहुंच जाने के बाद आपको भी ऐसा लगेगा कि हम उस भारत में खड़े हैं, जहां आज से 100 साल पहले खड़े थे. वही पगडंडी रास्ता, वही लालटेन युग जहां लोग घुप अंधेरे में रहा करते थे. जंगल और पहाड़ों से घिरा होने से ना तो कोई अधिकारी गांव जाता है ना कोई प्रतिनिधि, हां चुनाव के वक्त जरूर एक-दो नेता वोट मांगने चले जाते है.

नहीं मिल पाती स्वास्थ सुविधाएं
हर्रई गांव आज भी विकास से कोसों दूर नजर आता है. सौर ऊर्जा से गांव को रोशन करने की कवायद जरूर हुई लेकिन वह भी सफेद हाथी साबित हुई. गांव के लोगों का कहना है कि गांव में कोई बीमार पड़ जाए या डिलीवरी महिलाओं की जांज करवानी हो तो एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती जिससे बीमार की गांव में मौत हो जाती है. बिजली न होने से जंगली जानवरों का डर बना रहता है. अनेक बार अधिकारी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई लेकिन सब भरोसा देकर चले जाते हैं.

संजय टाइगर रिजर्व के कारण भी समस्याएं
इस मामले में कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि मामला अभी संज्ञान में आया है, दूरदराज का गांव होने से जरूर सड़क बिजली गांव में नहीं पहुंच पाई होगी. हम जाकर बात करेंगे और यदि इलाका संजय टाइगर रिजर्व में नहीं आता होगा तो गांव में सड़क बनवाने की कोशिश की जाएगी.

बहरहाल सालों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीणों की शासन प्रशासन कब तक सुनता है यह तो देखने वाली बात होगी, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है की कितनी सरकारें आईं और वोट बटोरने के लिए, पर गांव की सुध किसी ने नहीं ली. ऐसे में देखना होगा कि कलेक्टर के भरोसा के बाद क्या कुछ गांव का विकास हो पाता है.

Intro:एंकर-- आजादी के सालों गुजर जाने के बाद भी सीधी जिले में आज भी ऐसे अनेक गांव हैं जो बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज है सड़क बिजली जैसी जरूरतों के लिए ग्रामीणों ने अनेक बार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक आवाज लगाई लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं देंगे वही मीडिया द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद जिला प्रशासन के कान खड़े हुए और जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने का भरोसा दिलाया गया।



Body:वाइस ओवर(1) मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक गांव की तस्वीर आज भी सदियों पुरानी है सड़क बिजली ना होने से गांव में पहुंच जाने के बाद आपको भी ऐसा लगेगा कि हम उस भारत में खड़े हैं जहां आज से 100 साल पहले नजर आता था वही पगडंडी रास्ता वही लालटेन युक्त जहां लोग घुप अंधेरे में रहा करते थे हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर एक ऐसे गांव की जहां जंगल और पहाड़ों से घिरा होने से ना तो कोई अधिकारी गांव जाता है ना कोई प्रतिनिधि हां चुनाव के वक्त जरूर एक-दो नेता वोट मांगने चले जाते है। हर्रई गांव आज भी विकास से कोसों दूर नजर आता है गांव में सड़क नहीं बिजली नहीं सौर ऊर्जा से गांव को रोशन करने की कवायद जरूर हुई लेकिन वह भी सफेद हाथी साबित हुई गांव के लोगों का कहना है कि गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो डिलीवरी महिलाओं की जज की करवानी हो तो एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती जिससे बीमार की गांव में मौत हो जाती है बिजली न होने से जंगली जानवरों का डर बना रहता है अनेक बार अधिकारी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई लेकिन सब भरोसा देकर चले जाते हैं।
बाइट(1) मनभावन राम(रोजगार सहायक)
बाइट(2)सुब्बाराम(ग्रामीण)
वहीं इस मामले में जिला कलेक्टर का कहना है कि मामला अभी संज्ञान में आया है, दूरदराज का गांव होने से जरूर सड़क बिजली गांव में नहीं पहुंच पाई होगी सौर ऊर्जा से गांव को रोशन करने की कोशिश जरूर हुई लेकिन अधिकारी रीवा में रहते हैं हम जाकर बात करेंगे और यदि संजय टाइगर रिजर्व में नहीं आता होगा गांव में सड़क बनवाने की कोशिश की जाएगी।
बाइट(3) रविंद्र कुमार चौधरी( कलेक्टर सीधी)


Conclusion:बाहर हाल सालों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे ग्रामीणों की शासन प्रशासन कब तक सुनता है यह तो देखने वाली बात होगी लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है की कितनी सरकारें आई और वोट बटोरने के लिए गांव गई लेकिन सुध किसी ने नहीं ली ऐसे में देखना होगा कि कलेक्टर के भरोसा के बाद क्या कुछ गांव का विकास हो पाता है।।
पवन तिवारी ईटीवी भारत सीधी मध्य प्रदेश।
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