नीमच। अफीम एकमात्र ऐसा उत्पाद है, जिससे 400 प्रकार की जीवन रक्षक दवाइयां बनती हैं. अफीम के किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर सीपीएस पद्धति से खेती करने के लिए बाध्य करने का आरोप लगाया है. किसानों का आरोप है कि एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए यह पद्धति किसानों पर थोपी गई है. जिसको लेकर मार्च के अंत में 3 राज्यों के किसान एकजुट होकर सम्मेलन करेंगे. इस सम्मेलन में किसान अपनी 5 सूत्रीय मांगो को लेकर प्रदर्शन करेंगे.
सीपीएस की आड़ में अफीम फसल का ठेका: संघर्ष समिति के संरक्षक मांगीलाल मेघवाल बिलोट ने बताया कि सरकार सीपीएस की आड़ में निजी कंपनी को अफीम फसल का ठेका दे रही है तो सरकारी कंपनी को क्यों नहीं दिया जा रहा है. अफीम से नशा के नाम पर सीपीएस पद्धति लाई गई है, जबकि विभागीय मिलीभगत और भ्रष्टाचार को रोकने का कोई उपाय नहीं किया गया है. नारकोटिक्स और पुलिस में तैनात अधिकारी और कर्मचारी मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त पाए जा रहे हैं, झूठे केस बनाने के मामले उजागर हो चुके हैं उस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है.
Read More: अफीम की खेती से जुड़ी अन्य खबरें |
5 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन: किसान 5 सूत्रीय मांगों को लेकर एकजुट हो रहे हैं. जिसमें वर्ष 1997-98 में काटे सभी अफीम पट्टे बहाल करने यानी पूर्व में अफीम खेती कर चुके सभी किसानों को अफीम खेती करने के लाइसेंस देने की मांग होगी. इसी तरह जिन खेतों में अफीम फसल खड़ी है, सीपीएस की बजाए लुनाई चिराई के अफीम पट्टे दिया जाए. किसानों को अफीम का अंतरराष्ट्रीय मूल्य दिया जाए. अफीम पॉलिसी का निर्धारण किसान प्रतिनिधियों की सहभागिता से बनाई जाए. अफीम औषधीय उत्पाद है, जिसे निजी कंपनी के हाथ में जाने से रोका जाए.