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UPSC में खुद 4 बार हुए फेल, मुफ्त कोचिंग देकर 12 छात्र बनाए IAS & IPS, पढ़े Success Story - upsc book list

चार बार यूपीएससी में फेल होने के बाद भी मुरैना के इस शख्स ने हार नहीं मानी. अपनी असफलताओं से सीख लेते हुए छात्रों को दी मुफ्त कोचिंग आज देश भर में 12 छात्र अफसर बनकर कर रहे काम.

success story of anil upadhyay
अनिल उपाध्याय
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Published : Jul 18, 2021, 10:44 PM IST

मुरैना। जिले के एक शिक्षक ने वो कारनामा कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों-करोड़ों लोग देखते हैं. अपनी असफलताओं से सीखते हुए शिक्षक ने 102 से अधिक छात्रों को मध्य प्रदेश पीएससी में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, डीएसपी के रूप में चयनित करवाया है. ऐसे शिक्षक अनिल उपाध्याय ने निशुल्क एग्जाम की कोचिंग देकर पूरे चंबल का नाम देश भर में रोशन किया है. उनके पढ़ाए हुए 12 छात्र यूपीपीएससी में आईएएस और आईपीएस के रूप में भी चयनित हो चुके हैं. आखिर क्या है अनिल उपाध्याय की कहानी आइए जानते हैं उन्हीं की जुबानी.

यूपीएससी में फेल होने के बाद छात्रों को पढ़ाना किया शुरू.

चार बार दिया यूपीएससी का एग्जाम
अनिल उपाध्याय जब खुद यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रहे थे, तब उन्होंने चार बार प्री व मैन्स एग्जाम (Preliminary and Mains Exam) क्लियर किया. हर बार अनिल इंटरव्यू में फेल रहे. जब चौथी बार में उनका यूपीएससी क्लियर नहीं हुआ तो वे रात भर रोये. तब उन्होंने उसी रात को तय किया कि उनकी और उनकी मां की तरह देश की हजारों माताएं आंसू नहीं बहाएंगी.

माता-पिता से नहीं मिले था पांच वर्ष
अनिल उपाध्याय ने बताया कि उस समय वह अपने माता-पिता से 5 वर्ष तक नहीं मिलाे. इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ छात्रों को निशुल्क कोचिंग देने का, जिसका परिणाम आज ये है कि उनके पढ़ाये हुए 12 छात्र देश के विभिन्न जगहों पर अफसर बनकर देश की सेवा कर रहे हैं. वहीं मध्य प्रदेश में 102 छात्र विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं.

अनिल उपाध्याय का असफल युवाओं से कहना है कि सरकारी नौकरी पाना ही जीवन का उद्देश्य नही है. जीवन में कुछ कर गुजरने की क्षमता अपने अंदर रखनी चाहिए.

2017 में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
अनिल उपाध्याय ने बच्चों को चयनित कराने के साथ ही वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए हैं. वर्ष 2017 में आओ जाने मध्यप्रदेश शीर्षक से उन्होंने वर्ल्ड लेवल की सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता सतना के मैहर में आयोजित की, जिसमें 45 स्टूडेंट के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया. इससे पहले यह रिकॉर्ड चाइना में 32 और छात्राओं और देश के ही गुजरात प्रांत में 38 छात्रों के साथ किसी प्रतियोगिता के आयोजन का रिकॉर्ड दर्ज था.

इंडिया बुक में मिली जगह
अनिल उपाध्याय के जुनून की हद केवल यहीं तक नहीं रुकती. उन्होंने वर्ष 2020 में भोपाल के एक हॉल में 12 से 24 घंटे तक नॉनस्टॉप 2500 जरूरतमंद छात्रों को लगातार इतिहास एवं सामान्य ज्ञान की क्लास लेकर इंडिया बुक में अपनी जगह बनाई है. इससे पहले वो उज्जैन में इसी तरह 24 घंटे की नॉन सटॉप क्लास लेकर सुर्खियों में आए थे. उन्हें मप्र सरकार भी सम्मानित कर चुकी है. मुरैना जिले के पोरसा तहसील के तरसमा गांव से निकले अनिल उपाध्याय ने आज अपना डंका का विश्व स्तर पर बजा दिया है.

भोपाल में NDA की परीक्षा देने सिर्फ 27 फीसदी परीक्षार्थी ही पहुंचे

दिसंबर 2021 में मुरैना में खोलेंगे बच्चों के लिए संस्थान
अनिल उपाध्याय ने बताया कि मुरैना के लिए सोच तो 2020 में ही हो गई थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से कुछ नही कर पाए. इस समय किसान, व्यवसाई, दिहाड़ी मजदूर करने वाले सभी परेशान हैं, ज्यादातर इन्हीं के बच्चे यूपीएससी में चयनित होते हैं. ऐसे बच्चे जो तैयारी कर रहे थे, कोरोना महामारी की वजह से घर आ गए हैं. उन्होंने कहा कि मैंने पूरा देश घूमा, लेकिन मुरैना जैसा एनर्जेटिक आदमी नहीं मिला. बस ऐसे लोगों को एक नई दिशा देंगे और दिसंबर 2021 तक हम एक संस्थान मुरैना में खोलेंगे. प्रारंभिक स्तर पर 100 छात्रों का चयन किया जाएगा.

मुरैना। जिले के एक शिक्षक ने वो कारनामा कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों-करोड़ों लोग देखते हैं. अपनी असफलताओं से सीखते हुए शिक्षक ने 102 से अधिक छात्रों को मध्य प्रदेश पीएससी में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, डीएसपी के रूप में चयनित करवाया है. ऐसे शिक्षक अनिल उपाध्याय ने निशुल्क एग्जाम की कोचिंग देकर पूरे चंबल का नाम देश भर में रोशन किया है. उनके पढ़ाए हुए 12 छात्र यूपीपीएससी में आईएएस और आईपीएस के रूप में भी चयनित हो चुके हैं. आखिर क्या है अनिल उपाध्याय की कहानी आइए जानते हैं उन्हीं की जुबानी.

यूपीएससी में फेल होने के बाद छात्रों को पढ़ाना किया शुरू.

चार बार दिया यूपीएससी का एग्जाम
अनिल उपाध्याय जब खुद यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रहे थे, तब उन्होंने चार बार प्री व मैन्स एग्जाम (Preliminary and Mains Exam) क्लियर किया. हर बार अनिल इंटरव्यू में फेल रहे. जब चौथी बार में उनका यूपीएससी क्लियर नहीं हुआ तो वे रात भर रोये. तब उन्होंने उसी रात को तय किया कि उनकी और उनकी मां की तरह देश की हजारों माताएं आंसू नहीं बहाएंगी.

माता-पिता से नहीं मिले था पांच वर्ष
अनिल उपाध्याय ने बताया कि उस समय वह अपने माता-पिता से 5 वर्ष तक नहीं मिलाे. इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ छात्रों को निशुल्क कोचिंग देने का, जिसका परिणाम आज ये है कि उनके पढ़ाये हुए 12 छात्र देश के विभिन्न जगहों पर अफसर बनकर देश की सेवा कर रहे हैं. वहीं मध्य प्रदेश में 102 छात्र विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं.

अनिल उपाध्याय का असफल युवाओं से कहना है कि सरकारी नौकरी पाना ही जीवन का उद्देश्य नही है. जीवन में कुछ कर गुजरने की क्षमता अपने अंदर रखनी चाहिए.

2017 में बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
अनिल उपाध्याय ने बच्चों को चयनित कराने के साथ ही वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए हैं. वर्ष 2017 में आओ जाने मध्यप्रदेश शीर्षक से उन्होंने वर्ल्ड लेवल की सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता सतना के मैहर में आयोजित की, जिसमें 45 स्टूडेंट के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया. इससे पहले यह रिकॉर्ड चाइना में 32 और छात्राओं और देश के ही गुजरात प्रांत में 38 छात्रों के साथ किसी प्रतियोगिता के आयोजन का रिकॉर्ड दर्ज था.

इंडिया बुक में मिली जगह
अनिल उपाध्याय के जुनून की हद केवल यहीं तक नहीं रुकती. उन्होंने वर्ष 2020 में भोपाल के एक हॉल में 12 से 24 घंटे तक नॉनस्टॉप 2500 जरूरतमंद छात्रों को लगातार इतिहास एवं सामान्य ज्ञान की क्लास लेकर इंडिया बुक में अपनी जगह बनाई है. इससे पहले वो उज्जैन में इसी तरह 24 घंटे की नॉन सटॉप क्लास लेकर सुर्खियों में आए थे. उन्हें मप्र सरकार भी सम्मानित कर चुकी है. मुरैना जिले के पोरसा तहसील के तरसमा गांव से निकले अनिल उपाध्याय ने आज अपना डंका का विश्व स्तर पर बजा दिया है.

भोपाल में NDA की परीक्षा देने सिर्फ 27 फीसदी परीक्षार्थी ही पहुंचे

दिसंबर 2021 में मुरैना में खोलेंगे बच्चों के लिए संस्थान
अनिल उपाध्याय ने बताया कि मुरैना के लिए सोच तो 2020 में ही हो गई थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से कुछ नही कर पाए. इस समय किसान, व्यवसाई, दिहाड़ी मजदूर करने वाले सभी परेशान हैं, ज्यादातर इन्हीं के बच्चे यूपीएससी में चयनित होते हैं. ऐसे बच्चे जो तैयारी कर रहे थे, कोरोना महामारी की वजह से घर आ गए हैं. उन्होंने कहा कि मैंने पूरा देश घूमा, लेकिन मुरैना जैसा एनर्जेटिक आदमी नहीं मिला. बस ऐसे लोगों को एक नई दिशा देंगे और दिसंबर 2021 तक हम एक संस्थान मुरैना में खोलेंगे. प्रारंभिक स्तर पर 100 छात्रों का चयन किया जाएगा.

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