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मंडला में सामान्य हो रही कुष्ठ रोग की स्थिति, जानिए कुष्ठ रोग के बारे में सबकुछ

मंडला में कुष्ठ रोग की स्थिति वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की गाइड लाइन के हिसाब से सामान्य होने लगी है. आखिर क्या होता है कुष्ठ रोग, जानने के लिए देखें खबर...

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Published : Jan 10, 2020, 5:15 PM IST

Updated : Jan 11, 2020, 6:05 AM IST

leprosy
कुष्ठ रोग

मंडला। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की गाइड लाइन के हिसाब से प्रति दस हजार व्यक्ति में एक कुष्ठ रोगी हो तो यह सामान्य माना जाता है. लेकिन कुष्ठ रोगियों की संख्या इससे ज्यादा होने पर तेजी से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. मंडला जिले में प्रति दस हजार में 0.92 मरीज हैं.

मंडला में सामान्य हो रही कुष्ठ रोग की स्थिति

जिले की जनसंख्या 11 लाख 25 हजार के करीब है. जिनमें से 103 मरीज कुष्ट रोग से पीड़ित हैं. जिसकी यदि सरकारी गाइड लाइन के हिसाब से दर निकाली जाए तो ये प्रति दस हजार में 0.92 आती है. जिले में अधिक रोगाणु या बैक्टीरिया फैलाने वाले या इनसे ग्रसित मरीजों की संख्या 78 है. वहीं कम रोगाणु वाले मरीजों की संख्या 25 है.

Stains fall on the body in leprosy
कुष्ठ रोग में शरीर पर पड़ जाते है धब्बे

साल 2019 में 98 मरीज खोजने का लक्ष्य रखा गया था, 94 खोजे गए. बीते साल के और नए मरीजों को मिला कर 103 मरीजों का अभी भी इलाज जारी है. 90 के दशक में जिले में प्रति दस हजार में करीब 8 मरीज लेप्रोसी से ग्रस्त थे, जो 2000 के बाद घटकर 4 से 5 रह गए और बीते साल में इनमें भारी कमी आयी है.

क्या है लेप्रोसी

लेप्रोसी या कुष्ठ रोग में शरीर के किसी भी अंग में दाग धब्बे हो जाते हैं. इन धब्बों के बढ़ने के साथ ही इनमें दरारें, रूखापन बढ़ता जाता है, जिससे ये अंग गला, सुकुड़ या फिर छोटे तक हो जाते हैं. हाथ और पैरों की अंगुलियों का गलना और हमेशा खून का बहना बीमारी को और भी ज्यादा गम्भीर बना देता है. वहीं ये बीमारी सांस लेने, छींकने, खांसने से फैलती है.

भ्रांतियां

ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां भी हैं. डॉक्टर भी मानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी जागरूकता की कमी है और यही कारण है कि लोग खुद से इसका इलाज कराने नहीं आते, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि अगर लेप्रोसी के लक्षण मिल गए तो समाज में उन्हें घृणा की नजर से देखेगा.

जानलेवा है लेप्रोसी

कुष्ठ रोग के रोगाणु किसी मानव शरीर मे यदि घुस जाएं, तो इसके लक्षण उभरने में 5 साल लग जाते हैं और इसी समय यदि अस्पताल में मुफ्त मिलने वाला इलाज ले लिया जाए तो 6 महीने और रोगाणु ज्यादा हुए तो 12 माह में इसे ठीक किया जा सकता है. यह एक संक्रामक रोग है और अगर इसका समय से इलाज नहीं किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित होता है.

अब भी इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. क्योंकि भ्रांतियों और पुरानी मान्यताओं के चलते लोग इस बीमारी को बताने और उपचार कराने की बजाय छुपाने की ज्यादा कोशिश में रहते हैं.

मंडला। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की गाइड लाइन के हिसाब से प्रति दस हजार व्यक्ति में एक कुष्ठ रोगी हो तो यह सामान्य माना जाता है. लेकिन कुष्ठ रोगियों की संख्या इससे ज्यादा होने पर तेजी से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. मंडला जिले में प्रति दस हजार में 0.92 मरीज हैं.

मंडला में सामान्य हो रही कुष्ठ रोग की स्थिति

जिले की जनसंख्या 11 लाख 25 हजार के करीब है. जिनमें से 103 मरीज कुष्ट रोग से पीड़ित हैं. जिसकी यदि सरकारी गाइड लाइन के हिसाब से दर निकाली जाए तो ये प्रति दस हजार में 0.92 आती है. जिले में अधिक रोगाणु या बैक्टीरिया फैलाने वाले या इनसे ग्रसित मरीजों की संख्या 78 है. वहीं कम रोगाणु वाले मरीजों की संख्या 25 है.

Stains fall on the body in leprosy
कुष्ठ रोग में शरीर पर पड़ जाते है धब्बे

साल 2019 में 98 मरीज खोजने का लक्ष्य रखा गया था, 94 खोजे गए. बीते साल के और नए मरीजों को मिला कर 103 मरीजों का अभी भी इलाज जारी है. 90 के दशक में जिले में प्रति दस हजार में करीब 8 मरीज लेप्रोसी से ग्रस्त थे, जो 2000 के बाद घटकर 4 से 5 रह गए और बीते साल में इनमें भारी कमी आयी है.

क्या है लेप्रोसी

लेप्रोसी या कुष्ठ रोग में शरीर के किसी भी अंग में दाग धब्बे हो जाते हैं. इन धब्बों के बढ़ने के साथ ही इनमें दरारें, रूखापन बढ़ता जाता है, जिससे ये अंग गला, सुकुड़ या फिर छोटे तक हो जाते हैं. हाथ और पैरों की अंगुलियों का गलना और हमेशा खून का बहना बीमारी को और भी ज्यादा गम्भीर बना देता है. वहीं ये बीमारी सांस लेने, छींकने, खांसने से फैलती है.

भ्रांतियां

ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां भी हैं. डॉक्टर भी मानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी जागरूकता की कमी है और यही कारण है कि लोग खुद से इसका इलाज कराने नहीं आते, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि अगर लेप्रोसी के लक्षण मिल गए तो समाज में उन्हें घृणा की नजर से देखेगा.

जानलेवा है लेप्रोसी

कुष्ठ रोग के रोगाणु किसी मानव शरीर मे यदि घुस जाएं, तो इसके लक्षण उभरने में 5 साल लग जाते हैं और इसी समय यदि अस्पताल में मुफ्त मिलने वाला इलाज ले लिया जाए तो 6 महीने और रोगाणु ज्यादा हुए तो 12 माह में इसे ठीक किया जा सकता है. यह एक संक्रामक रोग है और अगर इसका समय से इलाज नहीं किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित होता है.

अब भी इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. क्योंकि भ्रांतियों और पुरानी मान्यताओं के चलते लोग इस बीमारी को बताने और उपचार कराने की बजाय छुपाने की ज्यादा कोशिश में रहते हैं.

Intro:वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की गाइड लाइन के हिसाब से प्रति दस हज़ार में कुष्ठ का एक रोगी हो तो कम चिंता की बात है लेकिन इससे ज्यादा हुए तो कहीं न कहीं इसके तेजी से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है और मण्डला जिले के लिए ये आँकड़ा बिल्कुल बाउन्ड्री के करीब है यहाँ प्रति दस हजार में पॉइंट 92 मरीज हैं


Body:मण्डला जिले की जनसंख्या 11 लाख 25 हज़ार के करीब है जिनमे से 103 मरीज कुष्ट रोग से पीड़ित हैं जिसकी यदि सरकारी गाइड लाइन के हिसाब से दर निकाली जाए तो यह प्रति दस हज़ार में 0.92 आती है जिसे बिल्कुल बाउन्ड्री पर माना जा सकता है क्योंकि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के हिसाब से दस हज़ार की जनसंख्या में एक मरीज होना चिंता की बात है, अब अगर बात करें बीमारी से ग्रसित लोगों की तो जिले में मल्टी वेशिलाई याने अधिक रोगाणु या बैक्टीरिया फैलाने वाले या इनसे ग्रसित मरीजों की संख्या 78 है,वहीं पोशी वेशिलाई याने की कम रोगाणु वाले मरीजों की संख्या 25 है वर्ष 2019 में 98 मरीज खोजने का लक्ष्य रखा गया था, 94 खोजे गए जिनमे से PB के 28 और MB के 66 मरीज निकले जिनमें से 21 PB और 47 MB कुल मिला कर 68 मरीजों का इलाज कर दिया गया जिसके बाद बीते साल और नए मरीजों को मिला कर 103 मरीज अभी भी उपचार रत है

क्या है लेप्रोसी

लेप्रोसी या कुष्ठ रोग में शरीर के किसी भी अंग में दाग धब्बे के जाते हैं जो छूने में स्पर्श ज्ञान नहीं कराते यह धब्बे बढ़ने के साथ ही इनमें दरारें रूखा पन बढ़ता जाता है और यह फिर अंग को गलाने, सुकुड़ने या फिर छोटा तक कर जाते हैं,हाथ और पैरों की अंगुलियों के गलना और हमेसा खून का बहना बीमारी को और भी ज्यादा गम्भीर बना देता है वहीं यह बीमारी साँस लेने,छींकने,खाँसने से फैलती है इस लिए ऐसे मरीजों की सही देखभाल भी घर के सदस्य नहीं करना चाहते।

भ्रांतियां

ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां भी हैं कहा जाता है कि पूर्व जन्म में जो बहुत ज्यादा पाप किया होता है उसे यह बीमारी लगती है और ऐसे लोगों को समाज मे अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता,चिकित्सक भी मानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी जागरूकता की कमी है और यही कारण है कि लोग खुद से इसका इलाज कराने इसलिए नहीं आते की यदि लेप्रोसी के लक्षण मिल गए तो समाज उन्हें दूसरी नज़र से देखगा।

जानलेवा है लेप्रोसी

कुष्ठ रोग के रोगाणु किसी मानव शरीर मे यदि घुस जाएं तो इसके लक्षण उभरने में 5 साल लग जाते है और इसी समय यदी अस्पताल में मुफ्त मिलने वाला इलाज ले लिया जाए तो 6 माह और रोगाणु ज्यादा हुए तब 12 माह में इसे ठीक किया जा सकता है लेकिन उपचार नियमित होना चाहिए वर्ना यह बीमारी मानव शरीर की तंत्रिकाओं को शून्य कर देती है जो बेहद कष्ट दाई होता है पहले कहा भी जाता था कि इन्शान की मौत ही इस बीमारी का इलाज है और ऐसे रोगियों को अलग ही रखा जाता था


Conclusion:90 के दशक में जिले में प्रति दस हजार में करीब 8 मरीज लेप्रोसी से ग्रषित थे जो 2000 के बाद घट कर 4 से 5 रह गए और बीते साल में इनमें भारी कमी आयी लेकिन जरूरत अब भी इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने की है क्योंकि भ्रांतियों और पुरानी मान्यताओं के चलते लोग इस बीमारी को बताने और उपचार कराने की बजाय छुपाने की ज्यादा कोशिश में रहते हैं।

बाईट--मनोज कुमार,असिस्टेंट नॉन टेक्निकल
बाईट --डॉ राजेन्द्र पीपरे, जिला कुष्ठ अधिकारी
पीटूसी --मयंक तिवारी संवददाता मण्डला
Last Updated : Jan 11, 2020, 6:05 AM IST
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