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अनोखा है इस लड़की का क्रिकेट सफर, जो लड़कों के टूर्नामेंट में भी मचा चुकी है धमाल

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Published : Aug 29, 2020, 12:02 AM IST

मंडला जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में अगर कोई लड़की क्रिकेट में जिले का नाम रोशन करे तो थोड़ा आश्चर्य होता है. क्योंकि यहां क्रिकेट जैसे खेल के लिए कोई सुविधाएं ही नहीं है. लेकिन मंडला की रहने वाली सुचि उपाध्याय एक ऐसा नाम हैं जो क्रिकेट में जिले का नाम बढ़ा रही हैं. देखिए मंडला से ईटीवी भारत की यह स्पेशल रिपोर्ट...

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मंडला न्यूज

मंडला। मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले में महिला क्रिकेट की बात थोड़ी अजीब सी लगती है. ऊपर से अगर कोई लड़की लड़कों के टूर्नामेंट का हिस्सा बने तो आश्चर्य दोगुना हो जाता है. लेकिन संभागीय स्तर पर अंडर-16 का हिस्सा बन चुकी मंडला की सुचि उपाध्याय अक्सर जिले के हर बड़े टूर्नामेंट में क्रिकेट खेलते हुए देखी जा सकती हैं. जो अपनी बेहतरीन क्रिकेट से धूम मचा रही हैं.

अनोखा है इस लड़की का क्रिकेट सफर

ऐसे हुई क्रिकेट के सफर की शुरुआत

सुचि के पिता बताते हैं कि बचपन से ही गली मोहल्ले में वह लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थी. लगा बेटी बड़ी होकर क्रिकेटर ही बनना चाहती है. तो पिता ने भी अपने बेटी के सपने को साकार करने के लिए उसे क्रिकेट में आगे बढ़ाना शुरु कर दिया. सुचि के पिता ने बताया कि जब उसे क्रिकेट की ट्रेनिंग शुरु कराई तो मंडला में कोई भी लड़की क्रिकेट नहीं खेलती थी. ऐसे में स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले लड़कों की क्रिकेट प्रतियोगिता में ही आयोजकों और खिलाड़ियों से बात कर उसे खिलाना शुरू किया. सुचि ने भी यहां अच्छा प्रदर्शन किया और इसके बाद तो कम उम्र में ही उसे जिला स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिलने लगा और उसके खेल में निखार भी आता गया.

अपने पिता के साथ सुचि
अपने पिता के साथ सुचि

टीम इंडिया में चाहती हैं एंट्री

सम्भागीय अंडर-16 की खिलाड़ी सुचि उपाध्याय का कहना है कि वो इंडियन वूमेन क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना चाहती हैं. जिसके लिए वह लगातार मेहनत भी कर रही हैं. सुचि लेफ्ट आर्म स्पिन में माहिर हैं उसे बैटिंग की बजाय बॉलिंग ज्यादा पसंद है. हालांकि सामने वाले बल्लेबाज का साथ देने वाली बेटिंग भी सुचि कर लेती हैं. सुचि का कहना है कि सम्भागीय क्रिकेट प्रतियोगिता में चयन होना और बड़े शहरों की खिलाड़ियों के साथ खेलना उसके लिए अच्छा अनुभव था. यह सब मंडला के उन खिलाड़ियों की बदौलत सम्भव हो सका जो एक लड़की को अपनी टीम का सदस्य बनाकर उसे पूरा मौका दिया. बस अब उसे टीम इंडिया में एंट्री लेनी है.

लेफ्ट आर्म स्पिनर है सुचि
लेफ्ट आर्म स्पिनर है सुचि

सुचि के कोच बताते हैं कि उसकी इस उपलब्धि का असर दूसरी लड़कियों पर भी हो रहा है. क्योंकि जिस मंडला जिले में लड़कियां क्रिकेट के बारे में सोचती भी नहीं थीं. वे अब एकेडमी ज्वाइन करना चाहती हैं. सुचि का सम्भागीय क्रिकेट टीम में चयन होना बड़े शहरों के लिहाज से भले ही कोई खास उपलब्धि न हो. लेकिन इस स्तर पर मंडला जैसे पिछड़े जिले से किसी लड़की का सिलेक्शन होना और इतने बड़े टूर्नामेंट में खेलना महिला खिलाड़ी के लिए बड़ी बात है. सुचि का अब केवल एक ही केवल एक ही सपना है, इंडिया की महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना. जिसके लिए वह दिन रात मेहनत कर रही है.

बैटिंग से ज्यादा बॉलिंग है पंसद
बैटिंग से ज्यादा बॉलिंग है पंसद

मंडला। मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले में महिला क्रिकेट की बात थोड़ी अजीब सी लगती है. ऊपर से अगर कोई लड़की लड़कों के टूर्नामेंट का हिस्सा बने तो आश्चर्य दोगुना हो जाता है. लेकिन संभागीय स्तर पर अंडर-16 का हिस्सा बन चुकी मंडला की सुचि उपाध्याय अक्सर जिले के हर बड़े टूर्नामेंट में क्रिकेट खेलते हुए देखी जा सकती हैं. जो अपनी बेहतरीन क्रिकेट से धूम मचा रही हैं.

अनोखा है इस लड़की का क्रिकेट सफर

ऐसे हुई क्रिकेट के सफर की शुरुआत

सुचि के पिता बताते हैं कि बचपन से ही गली मोहल्ले में वह लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थी. लगा बेटी बड़ी होकर क्रिकेटर ही बनना चाहती है. तो पिता ने भी अपने बेटी के सपने को साकार करने के लिए उसे क्रिकेट में आगे बढ़ाना शुरु कर दिया. सुचि के पिता ने बताया कि जब उसे क्रिकेट की ट्रेनिंग शुरु कराई तो मंडला में कोई भी लड़की क्रिकेट नहीं खेलती थी. ऐसे में स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले लड़कों की क्रिकेट प्रतियोगिता में ही आयोजकों और खिलाड़ियों से बात कर उसे खिलाना शुरू किया. सुचि ने भी यहां अच्छा प्रदर्शन किया और इसके बाद तो कम उम्र में ही उसे जिला स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिलने लगा और उसके खेल में निखार भी आता गया.

अपने पिता के साथ सुचि
अपने पिता के साथ सुचि

टीम इंडिया में चाहती हैं एंट्री

सम्भागीय अंडर-16 की खिलाड़ी सुचि उपाध्याय का कहना है कि वो इंडियन वूमेन क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना चाहती हैं. जिसके लिए वह लगातार मेहनत भी कर रही हैं. सुचि लेफ्ट आर्म स्पिन में माहिर हैं उसे बैटिंग की बजाय बॉलिंग ज्यादा पसंद है. हालांकि सामने वाले बल्लेबाज का साथ देने वाली बेटिंग भी सुचि कर लेती हैं. सुचि का कहना है कि सम्भागीय क्रिकेट प्रतियोगिता में चयन होना और बड़े शहरों की खिलाड़ियों के साथ खेलना उसके लिए अच्छा अनुभव था. यह सब मंडला के उन खिलाड़ियों की बदौलत सम्भव हो सका जो एक लड़की को अपनी टीम का सदस्य बनाकर उसे पूरा मौका दिया. बस अब उसे टीम इंडिया में एंट्री लेनी है.

लेफ्ट आर्म स्पिनर है सुचि
लेफ्ट आर्म स्पिनर है सुचि

सुचि के कोच बताते हैं कि उसकी इस उपलब्धि का असर दूसरी लड़कियों पर भी हो रहा है. क्योंकि जिस मंडला जिले में लड़कियां क्रिकेट के बारे में सोचती भी नहीं थीं. वे अब एकेडमी ज्वाइन करना चाहती हैं. सुचि का सम्भागीय क्रिकेट टीम में चयन होना बड़े शहरों के लिहाज से भले ही कोई खास उपलब्धि न हो. लेकिन इस स्तर पर मंडला जैसे पिछड़े जिले से किसी लड़की का सिलेक्शन होना और इतने बड़े टूर्नामेंट में खेलना महिला खिलाड़ी के लिए बड़ी बात है. सुचि का अब केवल एक ही केवल एक ही सपना है, इंडिया की महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना. जिसके लिए वह दिन रात मेहनत कर रही है.

बैटिंग से ज्यादा बॉलिंग है पंसद
बैटिंग से ज्यादा बॉलिंग है पंसद
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