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खुल गए मंदिर परिसर में पूजा-पाठ के रास्ते, जान लें किन नियमों का करना होगा पालन - कोविड-19 के प्रोटोकॉल

खरगोन जिले में सभी मंदिरों को खोलने की अनुमति दे दी गई है. वहीं इसके लिए कुछ नियम लागू किए गए हैं, जिनका पालन पुजारियों को मंदिर परिसर में करना होगा.

Khargone
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Published : Sep 13, 2020, 6:12 PM IST

खरगोन। अभी तक मंदिर के पुजारी अपने निजी स्थानों पर ही पूजा-पाठ कर रहे थे और अब लंबे अंतराल के बाद उन्‍हें मंदिर परिसर में अपने यजमानों को बैठाकर पूजन-पाठ कराने की अनुमति मिल गई है. हालांकि प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत ही मंदिर परिसर में दर्शन और पूजन संभव हो सकेगा.

कोरोना वायरस के कहर से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाते हुए गत 8 जून से देश में अनलॉक फेज की शुरुआत हो गई थी, इस दिन से धार्मिक स्थलों, गुरुद्वारा, मस्जिद, मॉल, रेस्तरां और होटल को खोलने की इजाजत दे दी गई थी, हालांकि इन्‍हें खोलने के लिए सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की है, जिसका मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं को पूरी तरह से पालन करना होगा. अभी तक ओंकारेश्वर के ब्राह्मण समाज यजमानों की पूजा-पाठ अपने निजी स्थानों पर कर रहे थे और अब लंबे अंतराल के बाद उन्‍हें मंदिर परिसर में बैठकर पूजन-पाठ कराये जाने की अनुमति मिल गई है. हालांकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए एसडीएम द्वारा बनाए गए नियमों के तहत ही मंदिर में दर्शन और पूजन संभव हो सकेगा.

प्रशासन ने पंडित-पुजारियों के लिए जारी किए ये नियम-

(1) एक बार में पूजन सभाग्रह में अधिकतम 6 पूजा आयोजन हो सकेंगे. एक पूजा/अभिषेक में अधिकतम 5 व्यक्ति ही सम्मिलित हो सकेंगे. अपने यजमानों को मास्क की अनिवार्यता और हैंड सैनेटाइजर का उपयोग संबंधित पंडित का दायित्व होगा.

(2) पंडित दर्शन की कतार में लगे यजमान के साथ-सांथ नहीं जा सकेंगे गर्भ गृह में या कतार में यजमानों के साथ पंडित का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा.

(3) निर्धारित अभिषेक हाल या कतार में या मंदिर के रास्ते पर पंडित जमा नहीं होंगे और ना ही यजमानों को कोविड-19 के प्रोटोकॉल के अनुसार निर्धारित किए गए दर्शन मार्ग से अतिरिक्त किसी अन्य मार्गों से दर्शन के लिये ले जाने या प्रवेश देने के लिए आग्रह या विवाद करेंगे.

(4) मंदिर परिसर में दर्शन पूजन पाठ या यजमानों के प्रवेश को लेकर किसी भी विवाद में अंतिम निर्णय मंदिर प्रशासन का होगा.

(5) मंदिर प्रशासन ऐसे किसी भी विवाद की दशा में किसी भी पंडित को मंदिर परिसर में प्रवेश से रोक सकेंगे.

(6) मंदिर परिसर में स्वच्छता व सामाजिक दूरी बनाए रखना मास्क पहनना अनिवार्य होगा.

(7) किसी भी प्रकार से प्रसादी वितरण मंदिर परिसर नहीं होगा.

ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में बैठकर पूजन-पाठ कराने को लेकर पिछले 6 माह से लगी रोक पर ब्राह्मणों द्वारा सोशल मिडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया था, जिसमे उन्होंने चुनाव के बहिष्कार का हवाला दिया था. आनन फानन में मंदिर प्रशासन ने कोविड-19 के नियमों के साथ अपने यजमानों को मंदिर परिसर में बैठकर पूजा-पाठ कराने संबंधी आदेश जारी किए हैं.

खरगोन। अभी तक मंदिर के पुजारी अपने निजी स्थानों पर ही पूजा-पाठ कर रहे थे और अब लंबे अंतराल के बाद उन्‍हें मंदिर परिसर में अपने यजमानों को बैठाकर पूजन-पाठ कराने की अनुमति मिल गई है. हालांकि प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत ही मंदिर परिसर में दर्शन और पूजन संभव हो सकेगा.

कोरोना वायरस के कहर से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाते हुए गत 8 जून से देश में अनलॉक फेज की शुरुआत हो गई थी, इस दिन से धार्मिक स्थलों, गुरुद्वारा, मस्जिद, मॉल, रेस्तरां और होटल को खोलने की इजाजत दे दी गई थी, हालांकि इन्‍हें खोलने के लिए सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की है, जिसका मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं को पूरी तरह से पालन करना होगा. अभी तक ओंकारेश्वर के ब्राह्मण समाज यजमानों की पूजा-पाठ अपने निजी स्थानों पर कर रहे थे और अब लंबे अंतराल के बाद उन्‍हें मंदिर परिसर में बैठकर पूजन-पाठ कराये जाने की अनुमति मिल गई है. हालांकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए एसडीएम द्वारा बनाए गए नियमों के तहत ही मंदिर में दर्शन और पूजन संभव हो सकेगा.

प्रशासन ने पंडित-पुजारियों के लिए जारी किए ये नियम-

(1) एक बार में पूजन सभाग्रह में अधिकतम 6 पूजा आयोजन हो सकेंगे. एक पूजा/अभिषेक में अधिकतम 5 व्यक्ति ही सम्मिलित हो सकेंगे. अपने यजमानों को मास्क की अनिवार्यता और हैंड सैनेटाइजर का उपयोग संबंधित पंडित का दायित्व होगा.

(2) पंडित दर्शन की कतार में लगे यजमान के साथ-सांथ नहीं जा सकेंगे गर्भ गृह में या कतार में यजमानों के साथ पंडित का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा.

(3) निर्धारित अभिषेक हाल या कतार में या मंदिर के रास्ते पर पंडित जमा नहीं होंगे और ना ही यजमानों को कोविड-19 के प्रोटोकॉल के अनुसार निर्धारित किए गए दर्शन मार्ग से अतिरिक्त किसी अन्य मार्गों से दर्शन के लिये ले जाने या प्रवेश देने के लिए आग्रह या विवाद करेंगे.

(4) मंदिर परिसर में दर्शन पूजन पाठ या यजमानों के प्रवेश को लेकर किसी भी विवाद में अंतिम निर्णय मंदिर प्रशासन का होगा.

(5) मंदिर प्रशासन ऐसे किसी भी विवाद की दशा में किसी भी पंडित को मंदिर परिसर में प्रवेश से रोक सकेंगे.

(6) मंदिर परिसर में स्वच्छता व सामाजिक दूरी बनाए रखना मास्क पहनना अनिवार्य होगा.

(7) किसी भी प्रकार से प्रसादी वितरण मंदिर परिसर नहीं होगा.

ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में बैठकर पूजन-पाठ कराने को लेकर पिछले 6 माह से लगी रोक पर ब्राह्मणों द्वारा सोशल मिडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया था, जिसमे उन्होंने चुनाव के बहिष्कार का हवाला दिया था. आनन फानन में मंदिर प्रशासन ने कोविड-19 के नियमों के साथ अपने यजमानों को मंदिर परिसर में बैठकर पूजा-पाठ कराने संबंधी आदेश जारी किए हैं.

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