जबलपुर। कोरोना महामारी के दौरान किए गए लॉकडाउन के चलते लोग जहां एक ओर आर्थिक संकट झेल रहै हैं. वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों की फीस जमा करने के लिए दबाब बनाया जा रहा है. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. जिसमें कहा गया था कि कोरोना काल में भी निजी स्कूल मनमानी फीस वसूली कर रहें है और प्रदेश सरकार के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं. इम मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अतुल श्रीधरन अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. वहीं मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई निर्धारित की गई है.
दरअसल, भोपाल के रहने वाले अमित शर्मा ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लाॅक डाडन किया गया था. जिसके चलते प्रदेश में स्कूल और कॉलेज अभी तक नहीं खुले हैं. इसके बाद भी निजी स्कूल फीस वसूल रहे हैं. जिसके चलते प्रदेश सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को ट्यूशन फीस के अलावा किसी प्रकार की फीस न लेने के आदेश दिए थे. इसके बाद भी निजी स्कूल छात्रों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं.वहीं स्कूल प्रबंधन ने अपनी ट्यूशन फीस में भी बढोत्तरी कर दी है.
याचिका में कहा गया है कि अधिकांश निजी स्कूल में सीबीएससी कोर्स के तहत पढाई होती है. सीबीएससी की गाईड लाईन है कि उनका कोर्स संचालित करने वाले स्कूल को राज्य सरकार के आदेशों का पालन करना हो गया. लेकिन निजी स्कूलों द्वारा ऐसा नहीं किया गया. बता दें कि इस याचिका में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव, कलेक्टर व डीईओ भोपाल सहित सागर पब्लिक स्कूल, बिल्लाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल तथा शंकर वैली स्कूल को अनावेदक बनाया गया है.