भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत ओसएसडी संजय जैन के वायरल ऑडियो को लेकर दो माह पहले तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए थे. संजय जैन के निलंबन के बाद दो माह में विभागीय जांच की प्रक्रिया पूरी की गई. जांच के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर संजय जैन को शासकीय सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है. सरकार का कहना है कि रिश्वत जैसे मामले में जीरो टॉलरेंस के सिद्धांत पर त्वरित निर्णय लिए जा रहे हैं.
भ्रष्टाचार के 75 मामलों में एक्शन : बता दें कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर विगत दो माह में 15 मार्च के बाद अब तक भ्रष्टाचार के 75 प्रकरणों में 119 शासकीय सेवकों के विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी दी गई है. लेकिन अभी भी बड़े अफसरों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति लंबित है. 282 मामलों में लोकायुक्त ने सालों पहले कार्रवाई की थी. सवाल ये है कि इनं शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ अब तक अभियोजन की स्वीकृति क्यों नहीं दी जा सकी है. 1989 में बने नियम के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति विधि विभाग से जारी की जाती थी.
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी हीलाहवाली : साल 2013 में यह अधिकार विधि विभाग से छीनकर प्रशासनिक विभाग को दे दिया गया. इसके बाद से अभियोजन स्वीकृति मिलना ही बंद हो गई. नियमों के मुताबिक जिन मामलों में 90 दिन में अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जाती, उनमें माना जाता है कि अनुमति मिल चुकी है. सुप्रीम कोर्ट भी इस संबंध में दिशा-निर्देश दे चुका है. बावजूद इसके सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है.