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जिला सहकारी बैंकों में बड़ी वित्तीय गड़बड़ियां आई सामने, सहकारिता मंत्री ने दिए जांच के आदेश - district cooperative banks

भोपाल और होशंगाबाद संभाग के जिला सहकारी बैंक के कार्यों की समीक्षा के दौरान कई बड़ी वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं. सहकारिता मंत्री ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

जिला सहकारी बैंकों की वित्तीय गड़बड़ियों पर सहकारिता मंत्री सख्त
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Published : Nov 7, 2019, 9:53 AM IST

भोपाल। प्रदेश के सहकारी बैंकों के द्वारा किए जा रहे कारनामों का संज्ञान सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह पूरी गंभीरता से लिया है. भोपाल और होशंगाबाद संभाग के जिला सहकारी बैंकों के कार्यों की समीक्षा के दौरान कई वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं. सहकारिता मंत्री ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. साथ ही उन बैंकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं, जिन्होंने बिना आयुक्त सहकारिता की अनुमति के ही वेतन बढ़ा दिया है.

जिला सहकारी बैंकों की वित्तीय गड़बड़ियों पर सहकारिता मंत्री सख्त

देर रात अपैक्स बैंक के सभागार में हुई बैठक के दौरान मंत्री गोविंद सिंह ने अधिकारी कर्मचारियों से साफ कह दिया है कि जो भी बैंकों को नुकसान पहुंचा रहा है. ऐसे कर्मचारी को तत्काल नौकरी से बाहर किया जाएगा और अच्छा काम करने वाले लोगों को पदोन्नति कर सम्मानित करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि वित्तीय गड़बड़ी करने वालों से राशि वसूली जाए और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाए.

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के 118 करोड़ रुपए के निवेश घोटाले में अफसरों के जांच में घिरने के बाद भी बैंक प्रबंधन ने सबक नहीं लिया है. बैंक ने एक बार फिर 10 करोड़ रुपए यस बैंक में निवेश कर दिया. यह राशि 5 साल तक बैंक की जरूरत पड़ने पर भी नहीं निकाली जा सकती हैं. मामले का खुलासा होने पर प्रदेश के सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने बैंक के प्रबंध संचालक आरपी हजारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का महत्वपूर्ण योगदान है. लिहाजा जरूरत है कि इनकी वित्तीय स्थिति को सुधारी जाय. उन्होंने कहा कि पिछले साल इनकी वित्तीय स्थिति काफी बिगड़ी है. इसके लिए सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निरंतर संभागीय बैठकें आयोजित कर इनके कार्यों की समीक्षा करें.
आयुक्त सहकारिता एमके अग्रवाल ने बताया कि सागर और जबलपुर संभाग को छोड़कर सभी बैठकें की जा चुकी हैं और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा.

प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी ने बताया कि सहकारी बैंक मुख्य रूप से किसानों को अल्प अवधि कृषि ऋण देने का कार्य करते हैं. उन्होंने दिए गए ऋणों की समय से वसूली किए जाने की जरूरत बताई. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की जिलेवार समीक्षा में पाया गया कि सभी बैंकों द्वारा दिए गए कालातीत ऋणों (NPA) की राशि अत्यधिक है. बैंकों के स्तर पर ऋणों की वसूली के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए. मंत्री सिंह ने निर्देश दिए है कि ज्यादा से ज्यादा आगामी एक साल तक एक्सपायर्ड ऋणों की वसूली सुनिश्चित की जाए.

भोपाल। प्रदेश के सहकारी बैंकों के द्वारा किए जा रहे कारनामों का संज्ञान सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह पूरी गंभीरता से लिया है. भोपाल और होशंगाबाद संभाग के जिला सहकारी बैंकों के कार्यों की समीक्षा के दौरान कई वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं. सहकारिता मंत्री ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. साथ ही उन बैंकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं, जिन्होंने बिना आयुक्त सहकारिता की अनुमति के ही वेतन बढ़ा दिया है.

जिला सहकारी बैंकों की वित्तीय गड़बड़ियों पर सहकारिता मंत्री सख्त

देर रात अपैक्स बैंक के सभागार में हुई बैठक के दौरान मंत्री गोविंद सिंह ने अधिकारी कर्मचारियों से साफ कह दिया है कि जो भी बैंकों को नुकसान पहुंचा रहा है. ऐसे कर्मचारी को तत्काल नौकरी से बाहर किया जाएगा और अच्छा काम करने वाले लोगों को पदोन्नति कर सम्मानित करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि वित्तीय गड़बड़ी करने वालों से राशि वसूली जाए और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाए.

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के 118 करोड़ रुपए के निवेश घोटाले में अफसरों के जांच में घिरने के बाद भी बैंक प्रबंधन ने सबक नहीं लिया है. बैंक ने एक बार फिर 10 करोड़ रुपए यस बैंक में निवेश कर दिया. यह राशि 5 साल तक बैंक की जरूरत पड़ने पर भी नहीं निकाली जा सकती हैं. मामले का खुलासा होने पर प्रदेश के सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने बैंक के प्रबंध संचालक आरपी हजारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का महत्वपूर्ण योगदान है. लिहाजा जरूरत है कि इनकी वित्तीय स्थिति को सुधारी जाय. उन्होंने कहा कि पिछले साल इनकी वित्तीय स्थिति काफी बिगड़ी है. इसके लिए सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निरंतर संभागीय बैठकें आयोजित कर इनके कार्यों की समीक्षा करें.
आयुक्त सहकारिता एमके अग्रवाल ने बताया कि सागर और जबलपुर संभाग को छोड़कर सभी बैठकें की जा चुकी हैं और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा.

प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी ने बताया कि सहकारी बैंक मुख्य रूप से किसानों को अल्प अवधि कृषि ऋण देने का कार्य करते हैं. उन्होंने दिए गए ऋणों की समय से वसूली किए जाने की जरूरत बताई. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की जिलेवार समीक्षा में पाया गया कि सभी बैंकों द्वारा दिए गए कालातीत ऋणों (NPA) की राशि अत्यधिक है. बैंकों के स्तर पर ऋणों की वसूली के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए. मंत्री सिंह ने निर्देश दिए है कि ज्यादा से ज्यादा आगामी एक साल तक एक्सपायर्ड ऋणों की वसूली सुनिश्चित की जाए.

Intro:बिना अनुमति बैंक प्रशासकों का वेतन बढ़ाने पर नाराज हुए मंत्री , बैंकों को नुकसान पहुंचाने वाले कर्मचारियों को बाहर करने के दिए निर्देश


भोपाल | प्रदेश के सहकारी बैंकों के द्वारा किए जा रहे कारनामों का संज्ञान अब प्रदेश के सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने पूरी गंभीरता से लिया है . भोपाल एवं होशंगाबाद संभाग के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के कार्यों की समीक्षा के दौरान कई बड़े खुलासे भी हुए हैं जिसमें कुछ वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई है जिसके जांच के आदेश दे दिए गए हैं वहीं सहकारिता मंत्री ने बैंकों के द्वारा अपनी मनमर्जी से वेतन बढ़ाए जाने के मामले को लेकर नाराजगी व्यक्त की है देर रात अपैक्स बैंक के सभागार में हुई बैठक के दौरान मंत्री गोविंद सिंह ने अधिकारी कर्मचारियों से साफ कह दिया है कि जो भी बैंकों को नुकसान पहुंचा रहा है ऐसे कर्मचारी को तत्काल नौकरी से बाहर करो और अच्छा काम करने वाले लोगों को पदोन्नति कर सम्मानित करो . Body:जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के 118 करोड़ों रुपए के निवेश घोटाले में अफसरों के जांच में गिरने के बाद भी बैंक प्रबंधन ने सबक नहीं लिया है बैंक ने एक बार फिर 10 करोड़ रुपए यस बैंक में निवेश कर दिया है यह राशि 5 साल तक बैंक की जरूरत पड़ने पर भी नहीं निकाली जा सकती है मामले का खुलासा होने पर प्रदेश के सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह ने बैंक के प्रबंध संचालक आरपी हजारी के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दे दिए हैं वहीं उन्होंने उन बैंकों के खिलाफ भी कार्यवाही करने के लिए कहा है जिन्होंने बिना आयुक्त सहकारिता की अनुमति के ही वेतन बढ़ा दिया है इसको लेकर भी सरकार के मंत्री ने आपत्ति उठाते हुए दूसरी सहकारिता विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश दे दिए हैंConclusion:सहकारिता मंत्री गोविन्द सिंह ने कहा है कि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के जो अधिकारी- कर्मचारी बैंकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर करें तथा जो अच्छा कार्य कर रहे हैं, उन्हें पदोन्नत करें. साथ ही खाली पड़े पदों पर आयुक्त सहकारिता से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर नियमानुसार शीघ्र ही भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाए . वित्तीय गड़बड़ी करने वालों से राशि की वसूली जाए, उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाए .

सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता आंदोलन में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों का महत्वपूर्ण योगदान है. अत: आवश्यक है कि इनकी वित्तीय स्थिति को सुधारा जाए. गत वर्षों में इनकी वित्तीय स्थिति काफी बिगड़ी है . सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निरंतर संभागीय बैठकें आयोजित कर इनके कार्य की समीक्षा करें .

आयुक्त सहकारिता एम के अग्रवाल ने बताया कि सागर एवं जबलपुर संभाग को छोड़कर सभी बैठकें की जा चुकी हैं तथा भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा.

प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी ने बताया कि सहकारी बैंक मुख्य रूप से किसानों को अल्प अवधि कृषि ऋण देने का कार्य करते हैं. उन्होंने दिए गए ऋणों की समय से वसूली किए जाने की आवश्यकता बताई. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की जिलेवार समीक्षा में पाया गया कि सभी बैंकों द्वारा दिए गए कालातीत ऋणों (NPA) की राशि अत्यधिक है. बैंकों के स्तर पर ऋणों की वसूली के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए. मंत्री सिंह ने निर्देश दिए कि आगामी एक वर्ष में अघिक से अधिक कालातीत ऋणों की वसूली सुनिश्चित की जाए.

सहकारी बैंकों की जिलेवार समीक्षा में पाया गया कि भोपाल में संस्थागत जमा तो हैं, परन्तु व्यक्तिगत जमा नहीं के बराबर हैं. इसके लिए प्रयास किया जाए. साथ ही कालातीत ऋणों की वसूली की जाए.बैतूल जिले में कालातीत ऋण की राशि रूपये 143 करोड़ है.आगामी 30 जून तक 100 करोड़ रूपये की वसूली कर ली जाएगी . रायसेन जिले में कालातीत ऋण राशि 148 करोड़ है, वहां के अधिकारी ने बताया कि आगामी जून तक 45 करोड़ की वसूली कर ली जाएगी.

राजगढ़ जिले की समीक्षा में पाया गया कि ऋण असंतुलन तथा वित्तीय अनियमितता के प्रकरणों के चलते सहकारी बैंक की हालत खराब है. वहां 183 करोड़ रूपये का कालातीत ऋण है . वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरणों वसूली तथा एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश मंत्री डॉ गोविन्द सिंह द्वारा दिए गए . आगामी जून तक कम से कम 75 करोड़ ऋण राशि की वसूली कर ली जाए। विदिशा जिले में 45 करोड़ कालातीत ऋण शेष है, आगामी जून तक वसूली की जाए.

समीक्षा में होशंगाबाद जिले की स्थिति भी काफी खराब पाई गई, वहां 292 करोड़ का कालातीत ऋण शेष है, जिसमें अधिकांश गैर कृषि ऋण है . कई कर्मचारियों के खिलाफ मामले भी चल रहे हैं. कई प्रकरणों में संबंधित सहायक/उप पंजीयक द्वारा स्टे भी दे दिया गया है. इसे मंत्री गोविंद सिंह द्वारा गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए गए कि ऐसे सहायक/उप पंजीयकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी वेतन वृद्धियां रोकी जाएं. सीहोर जिले की समीक्षा में पाया गया कि वहां जिला सहकारी बैंक का वर्ष 2016-17 में कालातीत ऋण 38 करोड़ था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 280 करोड़ रूपये हो गया . ऋण वसूली को लेकर बैंक द्वारा कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए . इस पर सहकारिता मंत्री द्वारा नाराजी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधारी गई तो बोर्ड भंग करने की कार्रवाई की जाएगी . उन्होंने निर्देश दिए कि ऋण वसूली की मासिक योजना बनाकर सघन कार्रवाई की जाए. जो लोग कार्य करना नहीं चाहते वे बैंकों से बाहर जाने की तैयारी कर लें .

बैठक में अपैक्स बैंक के प्रशासक अशोक सिंह, प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी, सहकारिता आयुक्त एम के अग्रवाल, एमडी अपैक्स बैंक प्रदीप नीखरा, अपर आयुक्त सहकारिता आर सी घिया सहित दोनों संभागों के जिला सहकारी बैंकों के प्रशासक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी तथा सभी संबंधित उपस्थित थे.
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