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आरटीआई के संशोधित बिल के विरोध में कांग्रेस का हंगामा, निकाला पैदल मार्च - भिंड न्यूज़ आरटीआई संशोधन बिल

RTI कानून में संशोधन को लेकर कांग्रेस के सेवा दल की युवा इकाई ने पैदल मार्च निकालकर विरोध किया,कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने यह बदलाव इसलिए किए हैं ताकि सूचना आयुक्तों की शक्तियों को कम कर उन्हें अपने नियंत्रण में किया जा सके.

आरटीआई के संशोधित बिल के विरोध में कांग्रेस का हल्ला बोल
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Published : Jul 28, 2019, 9:28 PM IST

भिंड। केंद्र सरकार द्वारा संसद में सूचना के अधिकार कानून 2005 का संशोधित बिल पास होने के बाद पूरे देश में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां अब संशोधित बिल का विरोध कर रही हैं. भिंड में कांग्रेस के सेवा दल की युवा इकाई ने पैदल मार्च निकालकर विरोध किया, RTI कानून को कमजोर करने का भी आरोप लगाया है.

आरटीआई के संशोधित बिल के विरोध में कांग्रेस का हल्ला बोल

दरअसल विपक्ष के पुरजोर विरोध के बाद भी सूचना का अधिकार संशोधन बिल संसद में पारित हो गया. इस संशोधन के जरिए सूचना के अधिकार कानून 2005 में कई बदलाव किए गए हैं मुख्य तौर पर इसमें केंद्र और राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के अधिकारों में कटौती कर दी. इस संशोधित बिल को लेकर कांग्रेस लगातार देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है, इसी क्रम में भिंड में भी रविवार को कांग्रेस के सेवा दल की युवा इकाई ने गोल मार्केट से परेड चौराहे तक पैदल मार्च निकालकर इस संशोधित बिल का विरोध किया
आरटीआई एक्ट 2005 के मुताबिक केंद्र और राज्यों के मुख्य सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल 5 साल होता था वही उनका वेतन केंद्र और राज्यों के मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह था जबकि संशोधन विधेयक में कहा गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल और कार्य सीमा केंद्र सरकार ही तय करेगी. साथ ही इसमें यह भी जोड़ा गया है कि दोनों अधिकारियों के वेतन, भत्ते और सेवा से जुड़ी अन्य शर्तें भी केंद्र सरकार ही निर्धारित करेगी इसी को लेकर कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने यह बदलाव इसलिए किए हैं ताकि सूचना आयुक्तों की शक्तियों को कम कर उन्हें अपने नियंत्रण में किया जा सके.

भिंड। केंद्र सरकार द्वारा संसद में सूचना के अधिकार कानून 2005 का संशोधित बिल पास होने के बाद पूरे देश में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां अब संशोधित बिल का विरोध कर रही हैं. भिंड में कांग्रेस के सेवा दल की युवा इकाई ने पैदल मार्च निकालकर विरोध किया, RTI कानून को कमजोर करने का भी आरोप लगाया है.

आरटीआई के संशोधित बिल के विरोध में कांग्रेस का हल्ला बोल

दरअसल विपक्ष के पुरजोर विरोध के बाद भी सूचना का अधिकार संशोधन बिल संसद में पारित हो गया. इस संशोधन के जरिए सूचना के अधिकार कानून 2005 में कई बदलाव किए गए हैं मुख्य तौर पर इसमें केंद्र और राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के अधिकारों में कटौती कर दी. इस संशोधित बिल को लेकर कांग्रेस लगातार देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है, इसी क्रम में भिंड में भी रविवार को कांग्रेस के सेवा दल की युवा इकाई ने गोल मार्केट से परेड चौराहे तक पैदल मार्च निकालकर इस संशोधित बिल का विरोध किया
आरटीआई एक्ट 2005 के मुताबिक केंद्र और राज्यों के मुख्य सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल 5 साल होता था वही उनका वेतन केंद्र और राज्यों के मुख्य चुनाव आयुक्त की तरह था जबकि संशोधन विधेयक में कहा गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल और कार्य सीमा केंद्र सरकार ही तय करेगी. साथ ही इसमें यह भी जोड़ा गया है कि दोनों अधिकारियों के वेतन, भत्ते और सेवा से जुड़ी अन्य शर्तें भी केंद्र सरकार ही निर्धारित करेगी इसी को लेकर कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने यह बदलाव इसलिए किए हैं ताकि सूचना आयुक्तों की शक्तियों को कम कर उन्हें अपने नियंत्रण में किया जा सके.

Intro:केंद्र सरकार द्वारा संसद में सूचना के अधिकार कानून 2005 का संशोधित बिल पास होने के बाद पूरे देश में कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां अब संशोधित बिल का विरोध कर रही हैं भिंड में भी कांग्रेस के सेवा दल की युवा इकाई ने रविवार को पैदल मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया साथ ही केंद्र सरकार पर सूचना का अधिकार कानून को कमजोर करने का भी आरोप लगाया है


Body:दरअसल विपक्ष के पुरजोर विरोध के बाद भी सूचना का अधिकार संशोधन बिल गुरुवार को संसद में पारित हो गया इस संशोधन के जरिए सूचना के अधिकार कानून 2005 में कई बदलाव किए गए हैं मुख्य तौर पर इसमें केंद्र और राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के अधिकारों में कटौती कर दी गई है इस बिल को लेकर कांग्रेश लगातार देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है इसी क्रम में भिंड में भी रविवार को कांग्रेस के सेवा दल की युवा इकाई ने गोल मार्केट से परेड चौराहे तक पैदल मार्च निकालकर इस संशोधित बिल का विरोध किया सेवा दल के पदाधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सूचना का अधिकार कानून आम जनता और प्रशासन के बीच पारदर्शिता बनाने और आमजन की आवाज उठाने के लिए लाया था लेकिन प्रधानमंत्री संशोधित बिल के जरिए इस कानून को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं जिसका हम विरोध करते हैं।

बाइट अनिरुद्ध सिंह राजावत, राष्ट्रीय सचिव, सेवादल युवा ब्रिगेड


Conclusion:बता दें कि आरटीआई एक्ट 2005 के मुताबिक केंद्र और राज्यों के मुख्य सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल 5 साल होता था वही उनका वेतन केंद्र और राज्यों के मुख्य चुनाव आयुक्त ओं की तरह था जबकि संशोधन विधेयक में कहा गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल और कार्य सीमा की परिभाषा केंद्र सरकार ही तय करेगी। साथ ही इसमें यह भी जोड़ा गया है कि दोनों अधिकारियों के वेतन, भत्ते और सेवा से जुड़ी अन्य शर्तें भी केंद्र सरकार ही निर्धारित करेगी इसी को लेकर कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने यह बदलाव इसलिए किए हैं ताकि सूचना आयुक्तों की शक्तियों को कम कर उन्हें अपने नियंत्रण में किया जा सके।
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