भोपाल। देश में बढ़ती मंहगाई के बीच केंद्र सरकार कई चीजों पर धीरे-धीरे सब्सिडी खत्म कर रही है, जिसका असर सीधे आम आदमी के बजट पर पड़ रहा है. ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार अपना खजाना सब्सिडी बांटने में खर्च कर रही है. इस साल प्रदेश सरकार का बजट 2.79 लाख है, जिसका करीब एक तिहाई बजट 82 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा सरकार सब्सिडी के नाम पर खर्च करने जा रही है.
प्रदेश सरकार बांट रही सब्सिडी की रेवड़ी: मध्य प्रदेश सरकार लगातार कर्ज ले रही है, हर साल प्रदेश का बजट घाटे का होता है. इस साल राजकोषीय घाटा 55 हजार 111 करोड़ का है, लेकिन शिवराज सरकार गरीब, किसानों और अन्य वर्गों के बीच बजट की 30 फीसदी राशि सब्सिडी में खर्च कर रही है. ऐसे में जहां एक ओर केंद्र सरकार धीरे-धीरे सब्सिडी में कटौती करती जा रही है, वहीं मध्य प्रदेश सरकार जनाधार बचाए रखने के लिए सब्सिडी की रेवड़ी बांट रही है.
बजट से ज्यादा का है कर्ज -
- राज्य सरकार का कुल बजट 2 लाख 41 हजार 375 हजार करोड़ का है.
- प्रदेश पर कुल कर्ज है 2 लाख 68 हजार करोड़ से ज्यादा.
- यानी मध्यप्रदेश पर कुल कर्जा प्रदेश के सालाना बजट से ज्यादा हो गया है.
सबसे ज्यादा सब्सिडी किसे? :सबसे ज्यादा राशि का प्रावधान घरेलू बिजली उपभोक्ताओं, किसानों, उद्योगों, उच्च शिक्षा ऋण सहित विभिन्न योजनाओं पर किया गया है. इसमें अकेले बिजली पर ही सरकार द्वारा 22,500 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है. बजट में से करीब 90 हजार करोड़ रुपए की राशि वेतन-भत्तों और पेंशन पर खर्च हो रही है. करीब 20 हजार करोड़ रुपए कर्ज निपटाने और ब्याज पर खर्च किए जा रहे हैं.
विकास पर बीजेपी का कम फोकस: विकास के नाम पर सत्ता में काबिज हुई बीजेपी , इस बार अपने विकास को ब्रेक लगा रही है.इस बार डेवलमेंट के लिए 70 हजार करोड़ की राशि बजट में रखी गई है, एक तरफ आत्मनिर्भर बनाने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ मप्र सरकार हर साल सब्सिडी की राशि बढ़ा रही है . बीते साल सरकार ने 74 हजार करोड़ की राशि सब्सिडी देने में खर्च की थी
2022- 23 के बजट में कौन सी योजना में कितनी सब्सिडी: किसानों को कृषि उपकरण ट्रेक्टर-ट्राली, कीटनाशक दवा, बागवानी, उद्यानिकी फसलों के लिए ड्रिप सिंचाई के लिए स्प्रिंक्लर, उच्च शिक्षा ऋण और उद्योग लगाने के लिए सब्सिडी के साथ ही अन्य सब्सिडी -
- करीब 88 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के 6400 करोड़ भरेगी सरकार.
- 35 लाख किसानों को 22,500 की सब्सिडी.
- मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में 10,337 करोड़ खर्च करेगी सरकार.
- जीरो प्रतिशत ब्याज पर लोन देने के लिए 1100 करोड़ का प्रावधान.
- मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 140 करोड़ होंगे खर्च
सिर्फ तीन मदों में खर्च होता है आधा बजट
सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या अपने खर्चे कम करने की है. इसे लेकर मशक्कत भी की जा रही है. सीएम, मंत्री और अधिकारी भी इसे लेकर प्लान बनानें में जुटे हैं कि कैसे सरकार की आमदानी में इजाफा किया जाए और खर्चों को कैसे कम किए जाए. सरकार की कमाई का आधा से ज्यादा हिस्सा 3 मदों, वेतन-भत्तों, पेंशन और ब्याज के भुगतान में ही चला जाता है.
ऐसे बढ़ा खर्च और चढ़ा कर्ज -
- साल 2011-12 में सरकार वेतन-भत्तों पर 22.86 फीसदी खर्च करती थी, जो 2021-22 में बढ़कर 28.93 फीसदी हो गया है.
- साल 2011-12 में पेंशन पर सरकार 9.71 फीसदी खर्च करती थी,जो 2021-22 में बढ़कर 10.27 फीसदी हो गया है.
- कर्ज के ब्याज के भुगतान पर कुल बजट का 8.50 फीसदी खर्च होता था, जो 2021-22 में बढ़कर 12.72 फीसदी तक पहुंच गया है.
- सरकार वेतन-भत्तों, पेंशन और कर्ज के ब्याज पर 2011-12 में जहां बजट का 41.07 फीसदी खर्च करती थी, वह 2021-22 में बढ़कर 51.90 फीसदी पहुंच गया है, मतलब बजट का आधा हिस्सा इन तीन मदों में खर्च हो जाता है.
- सरकार पर पेंशन का बोझ साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है, साल 2021-22 में सरकार ने 16913.43 करोड़ की राशि का पेंशन के रूप में भुगतान किया है.
- आने वाले बजट में यह राशि बढ़कर 19788.72 करोड़ रुपए हो जाएगी.
क्या कहते हैं शिवराज सरकार के मंत्री: कैबिनेट मंत्री का कहना है कि सरकार कर्ज लेती है, मगर कभी भी मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार की ये स्थिति नहीं बनी कि खजाना खाली हो. हमारी साख के कारण हम बाजार से कर्ज उठाते हैं, जिसे समय पर चुकाते हैं. यदि योजनाओं को चलाना है तो आम व्यक्ति तक उसका फायदा पहुंचे, इसके लिए सब्सिडी दी जाती है.
सब्सिडी के नाम पर भ्रष्टाचार: कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार की हालत ये है, कि जितने का बजट है, उससे ज्यादा का कर्जा सरकार उठा चुकी है. सरकार बजट का एक तिहाई खर्च सिर्फ सब्सिडी में खर्च कर रही है. सब्सिडी के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है, जनधन लूट योजना के नाम पर प्रदेश को अनिश्चतता के दौर में धकेला जा रहा है.