रांची: नक्सलियों से लोहा लेने में झारखंड पुलिस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के बीच इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा है. हाल के दिनों में झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के बीच समन्वय खराब होने की खबरें आती रही हैं, लेकिन अब सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट राहुल सोलंकी के लीगल नोटिस ने झारखंड पुलिस में खलबली मचा दी है.
जवानों के साथ जानवरों जैसा सलूक
राहुल सोलंकी ने विधानसभा चुनाव के दौरान झारखंड में तैनात सीआरपीएफ जवानों के साथ जानवरों जैसा सलूक किए जाने का आरोप लगाते हुए अपने वकील के माध्यम से पूरे मामले में एक लीगल नोटिस झारखंड पुलिस के आईजी मानवाधिकार और रांची के प्रभारी आईजी नवीन कुमार सिंह को भेजा है. राहुल सोलंकी सीआरपीएफ के 222 बटालियन में पोस्टेड है. झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान वे एडहॉक पर गठित 304 बटालियन में उनकी प्रतिनिधि थी.
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प्रशासन को लॉजिस्टिक सपोर्ट
आईजी नवीन कुमार सिंह को भेजे गए लीगल नोटिस के मुताबिक सीआरपीएफ बटालियन को झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण में पलामू और चाईबासा में तैनात किया गया था. दूसरे चरण के चुनाव के बाद सीआरपीएफ कंपनी को रांची के खेलगांव स्थित कांप्लेक्स में ठहराया गया था. सीआरपीएफ के लिए यहां रांची पुलिस और लोकल प्रशासन को लॉजिस्टिक सपोर्ट देना था. इसके अलावा सीआरपीएफ के ठहरने के सारे इंतजाम भी उन्हें ही करने थे.
शौच के लिए जाना पड़ रहा था बाहर
नोटिस के अनुसार रांची स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में जवानों को बेसिक सुविधाएं भी नहीं मिली. अधिकांश जवान शौच के लिए बाहर गए. उन्हें पीने लायक पानी भी नहीं दिया गया. वाटर कैनन के गंदे लाल और दुर्गंध युक्त पानी से जवानों ने खाना बनाया. नोटिस में इस बात का भी जिक्र है कि उसी दिन 6 बजे कांपलेक्स में छत्तीसगढ़ से आई बटालियन के कंपनी कमांडर और सिपाही के बीच कहासुनी हुई थी, जिसके बाद सिपाही ने अपने कमांडर को गोली मारकर खुद को भी गोली मार ली थी.
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मीडिया में गलत जानकारी देने का आरोप
ऐसे में सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ने जवानों को हो रही परेशानी की जानकारी आला अधिकारियों को दी थी, लेकिन जवानों की ओर से परेशानी की शिकायत किए जाने के बाद उन्हें वहां से हटा दिया गया. इसके बाद उन्हें वापस छत्तीसगढ़ के बीजापुर हेड क्वार्टर भेज दिया गया, साथ ही उनकी जिम्मेदारी इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को सौंप दी गई. राहुल सोलंकी ने पूरे मामले में आईजी नवीन कुमार सिंह पर मीडिया में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है. उनके मुताबिक पूरे घटना की गलत जानकारी मीडिया को देकर आईजी ने सीआरपीएफ और उनके कमांडेंट के बारे में गलत जानकारी दी.
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जवानों को छोड़कर स्वयं चले गए थे होटल
सीआरपीएफ अधिकारी का आरोप है कि 8 दिसंबर को खेलगांव में हुई घटना के बारे में अनुसंधान पूरा किए बगैर गलत जानकारी दी गई. असिस्टेंट कमांडेंट के बारे में गलत बताया गया कि वह जवानों को खेलगांव में छोड़कर स्वयं होटल चले गए थे. असिस्टेंट कमांडेंट ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे मामले में चुनाव आयोग को भी गलत जानकारी दी गई है. इस गलत रिपोर्ट के कारण सीआरपीएफ के कई अधिकारियों को चुनाव के दौरान ही बदल दिया गया था, जिससे भारत सरकार को पैसे का नुकसान भी हुआ.