रांची: झारखंड में पिछले दो तीन वर्षो से लगातार आत्महत्या (Suicide) के मामले बढ़ रहे हैं. कोरोनकाल के बाद तो इसमें और तेजी आई है. बेरोजगारी, परीक्षा के नतीजे ठीन नहीं आने, प्यार मोहब्बत, असाध्य बीमारियों सहित कई ऐसे कारण होते हैं जब लगने लगता है कि उनकी समस्याओं का समाधान मौत को ही गले लगाने में है, पर यह सच्चाई नहीं है. तनाव और डिप्रेशन की वजह से ऐसे ख्याल आते हैं और व्यक्ति मौत को गले लगा लेता है. मनोचिकित्सक कहते हैं कि जीवन में निराशा का भाव, डिप्रेशन की वजह का समय पर समाधान कर दिया जाए तो आत्महत्या के मामलों को कम किया जा सकता है. ऐसे क्षण में सहायता के लिए रिनपास ने 9471136697 मोबाइल नंबर जारी किया है (suicide helplines number).
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रांची के तंत्रिका रोग संस्थान RINPAS ने आत्महत्या की प्रवृत्ति (Suicidal Tendencies) से लोगों को दूर करने के लिए आत्महत्या रोकथाम सहायता केंद्र (Suicide Prevention Support Center) शुरू किया है. इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर 9471136697 (suicide helplines number) जारी किया है. इसपर डिप्रेशन और आत्महत्या का ख्याल मन में आने पर कॉल करने पर विशेषज्ञ यह बताते हैं कि उनकी समस्या का समाधान आत्महत्या नहीं बल्कि इलाज है. मानसिक तनाव और डिप्रेशन की वजह जानने के बाद केंद्र की रिसर्चर फोन पर ही काउंसिलिंग करते हैं. उसके बाद उन्हें यह भी बताते हैं कि जहां से वह कॉल कर रहे हैं वहां किसी मनोचिकित्सक की सलाह लें या फिर रांची के रिनपास आ जाएं.
इसी तरह का एक फोन धनबाद से एक युवक का आया, युवक सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है और उसे यह लगता है कि तैयारी पूरी नहीं है और परीक्षा में फेल होने से अच्छा है कि मौत को ही गले लगा ले. आत्महत्या की रोकथाम के लिए सहायता केंद्र में उसके कॉल को रिनपास से पीएचडी कर रही रीना मिंज रिसीव करती हैं. रीना उन्हें बताती हैं कि आत्महत्या इसका सामाधान नहीं है. इसके अलावा रीना युवक को समझाने का प्रयास करती हैं. रीना उस कॉलर को समय मिलने पर रांची आने का भी आग्रह करती हैं. रीना को उम्मीद है कि उन्होंने अपनी ओर से उस युवक को सकारात्मक सोच की ओर उन्मुख किया है और वह अब आत्महत्या नहीं करेगा.
रिनपास के मनोचिकित्सक और आत्महत्या रोकथाम सहायता केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ अमित कुमार शर्मा कहते हैं कि आत्महत्या रोकने में मदद करने वाला हेल्पलाइन नंबर पर 9471136697 को रिनपास के हर पर्ची पर लिखा गया है, ऐसे में कई मरीज अपनी मानसिक बीमारी का इलाज भी इस नंबर पर कॉल कर पूछते हैं तो उन्हें सही सलाह दे दी जाती है. डॉ अमित कहते हैं कि आत्महत्या रोकथाम सहायता केंद्र का का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिले इसके लिए यह नंबर हर किसी के पास होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जल्द ही आत्महत्या रोकथाम सहायता केंद्र को टेली साइको थेरेपी क्लिनिक से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि डिप्रेशन के शिकार ऐसे लोग जिनमें आत्महत्या करने के विचार आते हैं उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से काउंसलिंग किया जा सके.
स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार झारखंड में 2018 में 1317, 2019 में 1646, 2020 में 2145 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी. 2021 का आंकड़ा अधिकारिक रूप से जल्द जारी किया जाएगा. पिछले 03 साल के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं और ऐसे में रिनपास का आत्महत्या के मामले को रोकने का प्रयास सराहनीय है.