सिरमौर: जिला मुख्यालय नाहन के बचत भवन में शुक्रवार को सूचना के अधिकार अधिनियम पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता एडीसी सिरमौर प्रियंका वर्मा ने की.
वहीं, कार्यशाला में आरटीआई विशेषज्ञ डॉक्टर गोपाल कृष्ण संघाईक ने आरटीआई अधिनियम पर अधिकारियों को जागरूक किया.इस दौरान हैरानी की बात ये निकलकर सामने आई कि आरटीआई एक्ट-2005 में पारित हो चुका है, लेकिन इतने सालों के बाद भी जनसूचना अधिकारियों व अन्य अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी नहीं है. लिहाजा आरटीआई विशेषज्ञ डॉक्टर गोपाल कृष्ण ने संबंधित अधिकारियों को सूचना के अधिकार अधिनियम पर विस्तृत रूप से जानकारी दी.
आरटीआई विशेषज्ञ डॉ. गोपाल कृष्ण ने बताया कि इस अधिनियम का उद्देश्य याचिकाकर्ता को सूचना मुहैया करवाना व कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. उन्होंने इस बात का खुलासा भी किया कि आरटीआई एक्ट-2005 में पारित हो चुका है, लेकिन इतने सालों के बाद भी अभी तक जन सूचना अधिकारी व अन्य अधिकारियों को आरटीआई का ज्ञान नहीं है.
विशेषज्ञ ने जन सूचना अधिकारियों को बताया कि मांगी गई सूचना को उसके वास्तविक रूप में बिना किसी फेरबदल के मुहैया करवाना सुनिश्चित करें. इसके अतिरिक्त उन्होंने मौजूदा सभी अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं के बारे में भी विस्तृत रूप से जानकारी दी.
बता दें कि डॉ गोपाल कृष्ण रूसा के राज्य परियोजना अधिकारी के तौर पर शिमला में कार्यरत हैं और लोक प्रशासन संस्थान में सूचना का अधिकार अधिनियम के मास्टर ट्रेनर हैं. वह पिछले करीब 11 सालों में विभिन्न महाविद्यालयों के शैक्षणिक स्टाफ, हिप्पा, स्टेट कांउसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग व अपने विभागों में सूचना का अधिकार अधिनियम पर हजारों जन सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं.
ये भी पढ़ें: बजट 2020-21: क्या 'पहाड़' पर चढ़ पाएगी रेल? जानें हिमाचल की जनता की उम्मीदें