शिमला: प्रदेश में कोरोना के कारण भारी नुकसान झेल चुके फूल उत्पादकों को प्रदेश सरकार राहत प्रदान करने की तैयारी में है. जिन फूल उत्पादकों का 100 फीसदी नुकसान हुआ है, सरकार उन्हें राहत प्रदान करेगी. इसके लिए एक फार्मूला तैयार किया गया है. जिसके तहत कुल उत्पादित फूलों के बाजार भाव का 20 फीसदी मुआवजे के रूप में पुष्प उत्पादकों को अदा किया जाएगा.
बता दें कि प्रदेश सरकार से प्रदान की जा रही यहा राशि फूल उत्पादकों के लिए बहुत कम है, लेकिन अगर सरकार की माने तो यह राहत राशि उन्हें अगली फसल लगाने के लिए सहायता के रूप में रहेगी. प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि नुकसान की भरपाई तो संभव नहीं हो पाएगी, लेकिन फूल उत्पादकों को अगली फसल के लिए बीज और अन्य जरूरी सामान बाजार से खरीदने के लिए 20 फीसदी राहत राशि के रूप में दिए जाएंगे.
वित्त विभाग को बागवानी विभाग की तरफ से मंजूरी के लिए यह प्रस्ताव भेजा गया है. जल्द ही यह राशि उत्पादकों को जारी कर दी जाएगी. इस विशेष नीति के तहत पुष्प उत्पादकों को सरकार मुआवजा देने के लिए तैयार हुई है, इसके लिए कैबिनेट की बैठक से भी मंजूरी ले ली गई है. जिसके बाद बागवानी विभाग ने प्रस्ताव बनाकर वित्त महकमे को भेजा है.
फिलहाल सरकार 4 करोड़ रुपये की कुल राहत राशि जारी करेगी और प्रदेश के 598 फूल उत्पादकों को बांटी जाएगी. बागवानी विभाग के अनुसार फूल उत्पादन में 20 फीसदी लागत मूल्य होता है, जबकि 80 फीसदी लाभांश होता है. इन उत्पादकों से बागवानी विभाग ने बैंक अकाउंट नंबर ले लिया है, जल्द ही राहत राशि सीधे उनके बैंक अकाउंट में डाली जाएगी ताकि किसान फिर से अपना व्यवसाय शुरू कर सकें.
गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश में फूल उत्पादन अधिकतर सोलन, शिमला, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और ऊना जिला में होता है. विभाग के पास प्रदेशभर से 598 उत्पादक पंजीकृत हैं. हिमाचल प्रदेश में इस समय लगभग 708.61 हेक्टेयर भूमि में फूलों की खेती की जा रही है. जिसमें से करीब 98.51 हेक्टेयर भूमि में ही संरक्षित माहौल में खेती हो पाती है. राज्य में इस समय 5000 किसान और आठ फूल उत्पादक समिति फूलों की खेती का काम करती हैं. फूल उत्पादन से प्रदेश के किसान करीब 9191. 97 लाख सालाना आय प्राप्त कर लेते हैं.
हिमाचल प्रदेश की कृषि जलवायु फूलों की खेती के विकास के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करती है, जो कि ऑफ सीजन और निर्यात के लिए उपयुक्त है. हालांकि राज्य में विभिन्न कृषि जलवायु वाले क्षेत्रों से फूलों को पूरे साल घरेलू बाजार तक ही उपलब्ध करवाया जाता है, लेकिन निर्यात के लिए अच्छे फूलों का उत्पादन करने के लिए फूलों को नियंत्रित वातावरण में अर्थात ग्रीन हाउस में तैयार किया जाता है. जिसके कारण लागत की कीमत और अधिक बढ़ जाती है. ऐसे में कोरोना जैसी महामारी के बाद हिमाचल प्रदेश के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. प्रदेश सरकार ने लागत मूल्य प्रदान करने का निर्णय लिया है. जिससे कुछ हद तक किसानों को जरूर राहत मिलेगी.
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