कुल्लू: प्रवासी मजदूर आज किसी भी तरह अपने घर लौटना चाहते हैं. ऐसे में उनके दर्द से जुड़ी हजारों कहानियां आज सड़कों, बस स्टैंड्, रेलवे स्टेशन पर उन्हीं की जुबानी सुनी जा सकती हैं.
देश मे कोरोना संकट के चलते जहां बड़े-बड़े उद्योग प्रभावित हुए हैं. वहीं, छोटे स्तर पर भी श्रमिकों को इसका खासा नुकसान उठाना पड़ा है. हिमाचल से भी अब बाहरी राज्यों के श्रमिक अपने घरों का रुख करने लगे हैं, ताकि वे भुखमरी से बच सके.
जिला कुल्लू से भी सैकड़ों श्रमिकों ने अपने राज्यों का रुख करना शुरू कर दिया है. हालात यह है कि श्रमिकों के पास काम ना होने के चलते पैसे नहीं है और बसों का किराया जुटाने के लिए भी उन्हें या तो अपने घरों से पैसा मंगवाना पड़ रहा है या फिर यहां किराए के कमरों में रखे सामान को बेचना पड़ रहा है.
बीते दिन भी उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला के रहने वाले 30 श्रमिकों ने अपने परिवार के साथ कुल्लू से पलायन किया सभी श्रमिकों का कहना है कि अगर कोरोना वायरस के खत्म होने के बाद हालात ठीक रहे तो वह वापस यहां काम के लिए आएंगे. वरना अपने गांव में ही कुछ छोटा मोटा काम कर लेंगे.
मजदूरों का कहना है कि कोरोना वायरस का समय उनके लिए काफी बुरा साबित हो रहा है. अब घर जाने के लिए उन्हें या तो अपने परिजनों से पैसा मंगवाना पड़ रहा है या फिर कुछ मजदूरों ने अपने घरों में रखे टीवी, बर्तन सहित कुछ सामान भी बेच दिए हैं, ताकि वे अपने घर जाने के लिए किराए के लिए पैसे जुटा सके.
मजदूरों का कहना है कि कोरोना उनके लिए काफी बड़ा संकट है और अब कुछ पैसे इकट्ठे करते हुए अपने घरों की ओर जा रहे हैं ताकि वे यहां भुखमरी से बच सकें. गौर है कि जिला प्रशासन के द्वारा भी बाहरी राज्यों की ओर जाने वाले मजदूरों को अपने घर जाने की अनुमति दी जा रही है, जिसके चलते जम्मू-कश्मीर, बिहार और उत्तर प्रदेश के मजदूर अपने-अपने इलाकों का रुख कर रहे हैं.