कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में जहां भाजपा सरकार जन-जन तक साढ़े 4 सालों में किए गए विकास कार्यों का ब्यौरा पहुंचाने में जुटी हुई है, तो वहीं अधूरे पड़े कार्यों को कांग्रेस मुद्दा बनाने में लग गई है. वहीं जिला कुल्लू के पर्यटन के लिए मशहूर भुंतर हवाई अड्डे का विस्तारीकरण का मुद्दा फिर से इस चुनावों में प्रमुखता से उठाया जाएगा. विस्तारीकरण के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश व केंद्र सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया है. हालांकि पूर्व सांसद स्वर्गीय राम स्वरूप ने अपने कार्यकाल में इस दिशा में काम करने की बात कही थी, लेकिन उनकी हुई आकस्मिक मौत के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया.
ऐसे में चुनावी बेला के दौरान कांग्रेस एक बार फिर से इस मुद्दे को भुनाने में जुट गई है. कुल्लू कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता इंद्रदेव शास्त्री ने हवाई अड्डा के विस्तारीकरण के मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार व भाजपा नेताओं को भी जमकर (Indradev Shastri On BJP) घेरा. कुल्लू में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता इंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि किसी साजिश के तहत कुल्लू विधानसभा के भुंतर इलाके को गुमनाम करने की कोशिश की जा रही (Congress press conference in Kullu) है. क्योंकि कुल्लू जिले का प्रवेश द्वार भुंतर में स्थित है, लेकिन यहां पर ना तो पर्यटन की दृष्टि से कोई ठोस कार्य किया गया, बल्कि हवाई अड्डा के नाम से मशहूर भुंतर का नाम भी कुल्लू मनाली हवाई अड्डा रख दिया गया.
भाजपा की सरकार इस समय केंद्र में मौजूद है, लेकिन दोनों ही सरकारों ने भुंतर हवाई अड्डा के विस्तारीकरण (Bhuntar Airport Expansion) के बारे में कोई भी योजना तैयार नहीं की. जिसका नतीजा आज दुनिया से कुल्लू मनाली आने वाले सैलानियों को भुगतना पड़ रहा है. इंद्रदव शास्त्री ने कहा कि चुनावों के दौरान भी भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को प्रमुखता से जनता के बीच रखा था और जनता को भी उम्मीद थी कि केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के चलते यह जो रनवे का विस्तार किया जाना है. वह कार्य जल्द होगा. जिससे कुल्लू मनाली के पर्यटन कारोबारियों को भी उम्मीद बढ़ी थी कि रनवे का विस्तार होने से यहां पर बड़ी उड़ाने आ सकेंगे.
सैलानियों को भी कम खर्च में कुल्लू मनाली आने की सुविधा मिलेगी, लेकिन प्रदेश सरकार का कार्यकाल खत्म होने वाला है. मुख्यमंत्री मंडी के हवाई अड्डे की बात तो करते हैं लेकिन वह पुराने भुंतर हवाई अड्डे को अब पूरी तरह से भूल गए हैं. ऐसे में इसका खामियाजा प्रदेश सरकार को भुगतना होगा. गौर रहे कि जिले के प्रवेश द्वार स्थित भुंतर हवाई अड्डे के विस्तारीकरण का मामला करीब ढाई दशक से लंबित है. इसके विस्तारीकरण के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों से आश्वासन ही मिले हैं. हर बार चुनाव आते ही राजनीतिक दल भुंतर हवाई अड्डे का विस्तार की बात तो करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद यह मुद्दा हवा हो जाता है.
हालांकि, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सांसद बनने के बाद सांसद स्व. रामस्वरूप शर्मा ने आश्वासन दिया था कि वे इस कार्य को प्रमुखता से करेंगे और केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले को रखा जाएगा. वर्ष 2019 के चुनाव में फिर रामस्वरूप चुनाव जीते, लेकिन उनके देहांत के बाद यह मामला फिर दब गया. केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भुंतर हवाई अड्डे का विस्तार नहीं हो पाया (Indradev Shastri On Bhuntar Airport Expansion) है. इससे पहले कांग्रेस के सांसद भी यहां से बने और केंद्र में कैबिनेट रहे, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया. पर्यटन की दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण है.
हवाई अड्डे का रन वे छोटा होने से बडे़ जहाजों को उतरने में मुश्किल होती है. इससे कम संख्या में यात्री यहां पहुंचते हैं. यह हवाई अड्डा कई दशक पूर्व बना है, लेकिन आज तक किसी राजनीतिक दल के नेताओं ने इस का विस्तार नहीं किया है. सियासी दल आश्वासन तो देते हैं, लेकिन किसी ने समस्या का निदान नहीं किया. जिला कुल्लू के भुंतर हवाई अड्डा (Kullu Bhuntar airport) पर इन दिनों दिल्ली से एक ही हवाई सेवा अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है. एटीआर 72 नामक इस विमान में दिल्ली से भुंतर के लिए 55 यात्री यात्रा कर सकते हैं. जबकि भुंतर से वापस दिल्ली जाते समय 15 से 18 यात्री ही इस में सफर कर सकते हैं.
इसका कारण यह है कि रनवे छोटा होने के चलते एटीआर विमान को जितनी आवश्यकता है, वह पूरी नहीं हो पाती और दिल्ली वापस जाते समय उसे कम वजन ले जाना पड़ता है. ऐसे में दिल्ली से भुंतर आने के लिए सैलानियों को ₹12000 से लेकर ₹18000 तक का किराया देना पड़ता है. जबकि वापसी में यात्री कम होने के चलते 22 हजार से लेकर 28 हजार रूपये सैलानियों को खर्च करने पड़ते हैं. जिससे यह हवाई सेवा में बड़ा विमान होने के बावजूद सैलानियों के लिए काफी महंगी पड़ रही है. ऐसे में मध्यम आकार के विमानों को संचालित करने और अधिक यात्रियों को ले जाने के लिए रनवे का विस्तार आवश्यक है.
यह अन्य एयरलाइनों को भी इस क्षेत्र में परिचालन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेगा. जिससे हवाई किराए में कमी आएगी. जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी. गौर रहे कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने रनवे के विस्तार की संभावना का पता लगाने के लिए एक सर्वेक्षण किया था. जिसमे ब्यास नदी को डायवर्ट कर रनवे की लंबाई 1,052 मीटर से बढ़ाकर 1,712 मीटर करने का प्रस्ताव लंबित है. वहीं, कुल्लू से कांग्रेस के विधायक सुंदर ठाकुर ने बताया कि भुंतर हवाई अड्डे का विस्तार ना होने के चलते यहां का पर्यटन कारोबार भी काफी प्रभावित हो रहा है. कांग्रेस लगातार पर्यटन के विस्तार को लेकर प्रदेश व केंद्र सरकार से मांग कर रही है, लेकिन केंद्र व प्रदेश सरकार इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रही है.
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