ETV Bharat / city

कुल्लू में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, बुनकर मोबाइल ऐप पर कर सकते हैं हैंडलूम मार्क स्कीम का रजिस्ट्रेशन - Suma village of Kullu

कुल्लू में लगवैली की डुघीलग पंचायत के सूमा गांव में हथकरघा बुनकरों को जागरूक (awareness program for weavers) करने के लिए हैंडलूम मार्क योजना के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें 100 से अधिक महिला-पुरुष बुनकरों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में उद्योग केंद्र द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी.

awareness program organized for weavers
कुल्लू में बुनकरों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन.
author img

By

Published : Mar 11, 2022, 4:43 PM IST

कुल्लू: हथकरघा से बने उत्पादों की बाजार में भारी मांग है. बुनकर अपने इस पुश्तैनी कार्य को बड़े पैमाने पर अपनाकर अपनी आर्थिकी को बेहतर बना सकते हैं. हैंडलूम उत्पाद स्वास्थ्य की दृृष्टि से भी अच्छे होते हैं तथा गुणवत्ता के मामले में पावरलूम या मशीनी उत्पादों की तुलना में इनमें रात-दिन का फर्क होता है. हैंडलूम मार्क मिलने से किसकी भी बुनकर द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को दूसरा नहीं बेच सकता. यह बात शुक्रवार को बुनकरों को संबोधित करते हुए जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक छिमे आगमो ने कही.


लगवैली की ग्राम पंयायत डुघीलग के सूमा गांव (Suma village of Kullu) में हैंडलूम मार्क स्कीम (Handloom Mark Scheme) के तहत हथकरघा बुनकर को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. वस्त्र समिति लुधियाना, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 100 से अधिक महिला और पुरुष हथकरघा बुनकरों ने भाग लिया. कार्यक्रम में महाप्रबंधक डीआईसी कुल्लू छिमे आंगमो बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहीं.

उन्होंने लोगों को जिला उद्योग केंद्र द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और इसका लाभ उठाने का आह्वान किया. उन्होंने बताया कि कुल्लू शॉल को जीआई टैगिंग प्राप्त है. यह भारत वर्ष ही नहीं बल्कि विश्व में अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है. उन्होंने कहा कि पावरलूम या मशीनों में तैयार उत्पादों पर हैंडलूम मार्क लगाकर बेचना कानूनी अपराध है. इसके लिए जेल और सजा दोनों का प्रावधान किया गया है.

वस्त्र समिति लुधियाना, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की ओर से गुणवत्ता आश्वासन अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि हैंडलूम मार्क योजना वर्ष 2006 में शुरू की गई थी. तब से इसे मैनुअल तरीके से चलाया जा रहा था, लेकिन वर्ष 2020 में तत्कालीन केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा इसकी ऑनलाइन लांचिंग करने के बाद अब घर बैठे ही बुनकर मोबाइल ऐप के माध्यम से हैंडलूम मार्क के लिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं.

हथकरघा से संबंधित उत्पादों की बिक्री को लेकर विभिन्न प्रकार की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं. इसके पंजीकरण के लिए शुरुआत में एक बार ही 50 रुपए का शुल्क लिया जाएगा जो जीएसटी को मिलाकर 59 रुपये होगा. यह पंजीकरण तीन साल के लिए होगा, उसके बाद इसका नवीनीकरण किया जाएगा. बुनकर एक वित वर्ष में अधिकतम 1 हजार लेवल मंगवा सकते हैं जिसके लिए प्रति लेवल उन्हें 50 पैसे की राशि अदा करनी होगी. लेवल का दुरुपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. भारत सरकार द्वारा हैडलूम मार्क के लिए हथकरघा बुनकरों सहित तीन श्रेणियों सहकारी सभाओं, एपैक्स सभाओं तथा स्वयं सहायता समूहों व क्लस्टर यूनिटों को शामिल किया गया है.

इस दौरान वस्त्र समिति के एक अन्य गुणवत्ता आश्वासन अधिकारी आयन पॉल ने प्रोजेक्टर के जरिए बुनकरों और कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों को हैंडलूम मार्क की ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की स्टेप वाइज जानकारी प्रदान की. उन्होंने कहा कि इस प्रकार बुनकरों का संपूर्ण डाटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे उन्हें सरकार की योजनाओं का भी बेहतर ढंग से लाभ मिल पाएगा. वे घर बैठे अपने उत्पादों को उचित दाम पर बेच पाएंगे. इससे उनके समय की भी बचत होगी. बुनकरों को क्यूआर कोड दिया जाएगा. ग्राहक क्यूआर कोड के माध्यम से खरीदे गए उत्पादों की गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं, इससे धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी.

उन्होंने बताया कि पंजीकरण के बाद बुनकरों को हैंडलूम मार्क के साथ क्यूआर कोड जारी किया जाएगा. हैंडलूम मोबाइल ऐप में तीन ऐप व्यूअर ऐप, कस्टमर ऐप और एडमिन ऐप होगा. व्यूअर ऐप में बुनकर के लिए हैंडलूम मार्क के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के साथ मॉनिटरिंग और लेवल प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होगी. इसी तरह कस्टमर ऐप में जो व्यक्ति हैंडलूम मार्कयुक्त उत्पाद खरीदेगा वह उसकी असलियत तथा गुणवत्ता को आसानी से देख सकता है. एडमिन ऐप के माध्यम से अधिकारी बुनकरों के पंजीकरण का सत्यापन व जियो टैग कर सकेंगे.

ये भी पढ़ें: भुंतर बेली ब्रिज पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक, अब लोगों को करना पड़ेगा 10 किमी अतिरिक्त सफर

कुल्लू: हथकरघा से बने उत्पादों की बाजार में भारी मांग है. बुनकर अपने इस पुश्तैनी कार्य को बड़े पैमाने पर अपनाकर अपनी आर्थिकी को बेहतर बना सकते हैं. हैंडलूम उत्पाद स्वास्थ्य की दृृष्टि से भी अच्छे होते हैं तथा गुणवत्ता के मामले में पावरलूम या मशीनी उत्पादों की तुलना में इनमें रात-दिन का फर्क होता है. हैंडलूम मार्क मिलने से किसकी भी बुनकर द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को दूसरा नहीं बेच सकता. यह बात शुक्रवार को बुनकरों को संबोधित करते हुए जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक छिमे आगमो ने कही.


लगवैली की ग्राम पंयायत डुघीलग के सूमा गांव (Suma village of Kullu) में हैंडलूम मार्क स्कीम (Handloom Mark Scheme) के तहत हथकरघा बुनकर को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. वस्त्र समिति लुधियाना, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 100 से अधिक महिला और पुरुष हथकरघा बुनकरों ने भाग लिया. कार्यक्रम में महाप्रबंधक डीआईसी कुल्लू छिमे आंगमो बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहीं.

उन्होंने लोगों को जिला उद्योग केंद्र द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और इसका लाभ उठाने का आह्वान किया. उन्होंने बताया कि कुल्लू शॉल को जीआई टैगिंग प्राप्त है. यह भारत वर्ष ही नहीं बल्कि विश्व में अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है. उन्होंने कहा कि पावरलूम या मशीनों में तैयार उत्पादों पर हैंडलूम मार्क लगाकर बेचना कानूनी अपराध है. इसके लिए जेल और सजा दोनों का प्रावधान किया गया है.

वस्त्र समिति लुधियाना, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की ओर से गुणवत्ता आश्वासन अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि हैंडलूम मार्क योजना वर्ष 2006 में शुरू की गई थी. तब से इसे मैनुअल तरीके से चलाया जा रहा था, लेकिन वर्ष 2020 में तत्कालीन केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा इसकी ऑनलाइन लांचिंग करने के बाद अब घर बैठे ही बुनकर मोबाइल ऐप के माध्यम से हैंडलूम मार्क के लिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं.

हथकरघा से संबंधित उत्पादों की बिक्री को लेकर विभिन्न प्रकार की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं. इसके पंजीकरण के लिए शुरुआत में एक बार ही 50 रुपए का शुल्क लिया जाएगा जो जीएसटी को मिलाकर 59 रुपये होगा. यह पंजीकरण तीन साल के लिए होगा, उसके बाद इसका नवीनीकरण किया जाएगा. बुनकर एक वित वर्ष में अधिकतम 1 हजार लेवल मंगवा सकते हैं जिसके लिए प्रति लेवल उन्हें 50 पैसे की राशि अदा करनी होगी. लेवल का दुरुपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. भारत सरकार द्वारा हैडलूम मार्क के लिए हथकरघा बुनकरों सहित तीन श्रेणियों सहकारी सभाओं, एपैक्स सभाओं तथा स्वयं सहायता समूहों व क्लस्टर यूनिटों को शामिल किया गया है.

इस दौरान वस्त्र समिति के एक अन्य गुणवत्ता आश्वासन अधिकारी आयन पॉल ने प्रोजेक्टर के जरिए बुनकरों और कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों को हैंडलूम मार्क की ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की स्टेप वाइज जानकारी प्रदान की. उन्होंने कहा कि इस प्रकार बुनकरों का संपूर्ण डाटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे उन्हें सरकार की योजनाओं का भी बेहतर ढंग से लाभ मिल पाएगा. वे घर बैठे अपने उत्पादों को उचित दाम पर बेच पाएंगे. इससे उनके समय की भी बचत होगी. बुनकरों को क्यूआर कोड दिया जाएगा. ग्राहक क्यूआर कोड के माध्यम से खरीदे गए उत्पादों की गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं, इससे धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी.

उन्होंने बताया कि पंजीकरण के बाद बुनकरों को हैंडलूम मार्क के साथ क्यूआर कोड जारी किया जाएगा. हैंडलूम मोबाइल ऐप में तीन ऐप व्यूअर ऐप, कस्टमर ऐप और एडमिन ऐप होगा. व्यूअर ऐप में बुनकर के लिए हैंडलूम मार्क के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के साथ मॉनिटरिंग और लेवल प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होगी. इसी तरह कस्टमर ऐप में जो व्यक्ति हैंडलूम मार्कयुक्त उत्पाद खरीदेगा वह उसकी असलियत तथा गुणवत्ता को आसानी से देख सकता है. एडमिन ऐप के माध्यम से अधिकारी बुनकरों के पंजीकरण का सत्यापन व जियो टैग कर सकेंगे.

ये भी पढ़ें: भुंतर बेली ब्रिज पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक, अब लोगों को करना पड़ेगा 10 किमी अतिरिक्त सफर

ETV Bharat Logo

Copyright © 2025 Ushodaya Enterprises Pvt. Ltd., All Rights Reserved.