पानीपतः लोकायुक्त रजिस्ट्रार ने पानीपत के तीन जिला उपायुक्तों पर लोकायुक्त से कड़ी कारवाई की सिफारिश की है. जीटी रोड समालखां, पानीपत जीटी रोड और पानीपत समालखां की मुख्य सड़कों पर लगे अवैध अतिक्रमण को ना हटा पाने के कारण तीनों जिला उपयुक्तों पर ये कार्रवाई होगी. मंलगवार को सुनवाई के दौरान लोकायुक्त रजिस्ट्रार ने ये फैसला सुनाया है.
इनके नाम शामिल
लोकायुक्त रजिस्ट्रार डॉ एमएस सुल्लर ने इन तीनों जिला उपायुक्तों के विरूद्ध अपनी जांच रिपोर्ट में कठोर टिप्पणी की है. जिसमें पानीपत की वर्तमान डीसी सुमेधा कटारिया, तत्कालीन डीसी समीरपाल सरों और डॉ चन्द्रशेखर खरे शामिल हैं. केस की आगामी सुनवाई 20 नवंबर को लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल करेंगे.
क्या है मामला ?
आरटीआई एक्टिविस्टि पीपी कपूर ने 8 अगस्त 2015 को लोकायुक्त को शिकायत भेज कर जीटी रोड पानीपत (86 से 96 किमी) और समालखां की प्रमुख सडड़कों, रेलवे रोड, चुलकाना रोड, जौरासी रोड, बिहौली रोड, रेलवे रोड से मनाना फाटक रोड और जीटी रोड समालखां पर अवैध कब्जों को हटवाने की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा जनता ट्रैफिक जाम के रूप में भुगत रही है.
सही पाए गए आरोप
लोकायुक्त द्वारा कराई गई जांच में कपूर के आरोप सिद्ध पाए गए. लोकायुक्त की जांच और सुनवाई के चलते समालखां में जीटी रोड पर नेशनल हाई-वे की जमीन पर निशानदेही में कुल 79 अवैध कब्जे पाए गए. इनमें 25 अवैध कब्जे 19 जुलाई 2019 को ध्वस्त कर दिए गए. इसी बीच कुछ कब्जाधारियों ने हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था.
जिला उपयुक्तों की लापरवाही
अवैध कब्जों के खिलाफ साल 2015 में शिकायत आई थी, लेकिन जिला प्रशासन ने कभी एक तो कभी दूसरा बहाना बनाकर कब्जे नहीं हटवाए. ना तो वर्तमान डीसी और ना ही 2015 से लगे डीसी ने अवैध कब्जे हटवाने बारे कोई रूचि दिखाई. कभी पुलिस फोर्स ना मिलने तो कभी हाई वोल्टेज बिजली तारों के गुजरने का बहाना बनाते रहे. यही कारण है कि लोकायुक्त रजिस्ट्रार ने सुनवाई कर तीनों जिला उपयुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की है.
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