चंडीगढ़: मुख्यमंत्री मनोहर लाल अंत्योदय सरल प्रोजेक्ट को बहुत गंभीरता से मॉनिटर कर रहे हैं. मुख्यमंत्री की ओर से सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अंत्योदय सरल के अंतर्गत सेवा को समय से प्रदान किया जाएगा. साथ ही नागरिकों की शिकायतों को निपटाने की कार्यप्रणाली को भी दुरुस्त किया जाए.
अंत्योदय सरल प्रोजेक्ट पर नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठक
ये जानकरी मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम के परियोजना निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने अंत्योदय सरल प्रोजेक्ट पर नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान दी. वहीं इस दौरान उन्होंने अंत्योदय सरल केंद्रों में आमजन को योजनाओं और सेवाओं का लाभ देने के मामले में काम में लापरवाही बरतने के कारण कई कार्रवाई के भी आदेश दिए.
बैठक में बताया गया कि अंत्योदय सरल पोर्टल पर कई विभागों की 525 से ज्यादा योजनाओं और सेवाओं के लिए आज तक 78 लाख से भी ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं. आज के समय में एक महीने में औसतन 5 लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हो रहे हैं. इसके अलावा, हेल्पलाइन नंबर पर 1 लाख 20 हजार से ज्यादा कॉल्स आई हैं.
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
डॉ. राकेश गुप्ता ने अंत्योदय सरल केंद्रों में आमजन को योजनाओं और सेवाओं का लाभ देने के मामले में काम में लापरवाही बरतने के कारण करनाल जिले के असंध तहसील के तहसीलदार रमेश कुमार को अपना काम ठीक से नहीं करने के लिए स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं.
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वहीं बैठक में अंत्योदय सरल पोर्टल पर एससी सर्टिफिकेट बनाने से संबंधित एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डॉ. गुप्ता ने इस मामले की तहकीकात कर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेवारी तय करने के भी निर्देश दिए. बैठक में खेल एवं युवा मामले विभाग के नोडल अधिकारी के अनुपस्थित रहने के कारण नोडल अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए.
अधिकारियों को दिए कार्यशैली में सुधार लाने के निर्देश
बैठक में डॉ. राकेश गुता ने परिवहन, महिला एवं बाल विकास, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, कृषि विभाग को जल्द से जल्द अपनी कार्यशैली में सुधार करने के निर्देश दिए.उन्होंने विभागों को अंत्योदय पोर्टल के टिकटिंग सिस्टम पर आने वाली टिकटों पर भी त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए. डॉ. गुप्ता ने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिये कि वो अंत्योदय पोर्टल पर प्राप्त आवेदन या शिकायतों को जल्द निपटाएं नहीं तो कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.