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ऑपरेशन मिलाप: दिल्ली पुलिस ने 900 से ज्यादा बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाया - Delhi Crime

*दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन मिलाप चलाकर 900 से अधिक बच्चों को बचाया *बिछड़े बच्चों को उनके परिजन से मिलाया *कार्यक्रम के दौरान भावुक हुए पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक

900 से ज्यादा बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाया
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Published : Feb 22, 2019, 2:40 PM IST

नई दिल्ली: राजधानी में कानून व्यवस्था को संभालने के साथ-साथ दिल्ली पुलिस समाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों में भी बढचकर हिस्सा लेती है. उत्तर पूर्वी जिला पुलिस ने बिछड़े मासूम बच्चों को अपनों से मिलाने के लिए ऑपरेशन मिलाप चलाकर बीते वर्ष सौ से ज्यादा बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया है. पढ़ें ये रिपोर्ट...
दिल्ली पुलिस वैसे तो पिछले काफी समय से बिछड़े हुए मासूम बच्चों को अपनों से मिलवाने के लिए ऑपरेशन मिलाप चला रही है.

पुलिस टीम का पुनर्गठन
उत्तर पूर्वी जिले के डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर ने पिछले साल जिले के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के एडिशनल डीसीपी एमके मीना की देखरेख में एसीपी गजेंद्र कुमार के नेतृत्व वाली टीम के साथ न केवल पुनर्गठन कर दिया, बल्कि खुद भी लगातार इस टीम का मार्गदर्शन करते रहे हैं.

ये अधिकारी भी थे शामिल
ऑपरेशन मिलाप के इस कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक के अलावा स्पेशल सीपी संदीप गोयल, ज्वॉइंट सीपी राजेश खुराना, आनंद मोहन समेत दिल्ली पुलिस के कई आला अधिकारी और जिले के अधिकारी शामिल रहे.

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900 से ज्यादा बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाया

किस्सा बताते हुए भावुक हो गए पुलिस कमिश्नर
उत्तर पूर्वी जिला उपायुक्त दफ्तर में आयोजित ऑपरेशन मिलाप के एक कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने मुख्य अतिथि के रूप शिरकत की. इस दौरान पटनायक सर्विस से जुड़ी एक घटना को बताते हुए भावुक हो गए.

बच्चे को किया था अगवा
उन्होंने बताया कि जब वह डीसीपी साउथ हुआ करते थे, उस समय उनके जिले से एक बच्चे को अगवा कर लिया गया. शिकायत मिलने पर अलर्ट हुई पुलिस टीम ने गहन जांच पड़ताल के बाद आखिरकार बच्चे को चंद घंटों में ही सकुशल बरामद कर लिया.

बच्चे को किया परिजनों के हवाले
उधर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. टीम ने मीडिया के सामने केस के खुलासे की बात कही, लेकिन वह रात में ही बिना समय गंवाए सादे कपड़ों में एक निजी काले शीशे वाली गाड़ी से बच्चे को उसके परिजनों के हवाले करने पहुंच गए. जो खुशी उन्हें उस समय हुई वह आजतक की सर्विस के दौरान कभी भी नहीं हुई.

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कैसे काम करता है ऑपरेशन मिलाप
उत्तर पूर्वी जिले में चलने वाले इस ऑपरेशन के तहत पुलिस टीम पहले तो ऐसे बच्चों को तलाश करती है जो किसी न किसी कारणवश अपनों से बिछड़कर किसी बाल गृह या फिर अनाथालय में रहने को विवश हो जाते हैं.

बच्चों की होती है काउंसलिंग
पुलिस टीम बच्चे से मिलने के बाद पहले तो पूरे प्रोफेशनल अंदाज में बच्चे की काउंसलिंग करती है, तत्पश्चात उसको उसके परिजनों तक पहुंचने की कोशिश की जाती है. जैसे ही टीम को बच्चे के सही परिजनों का पता लगता है, वैसे ही बच्चे को उसके अपनों के हवाले कर दिया जाता है.

ऑपरेशन ने 101 बच्चों को परिजनों से मिलाया
डीसीपी के मुताबिक इस जिले में चलने वाले इस ऑपरेशन मिलाप ने 2018 में 101 बिछड़े बच्चों को अपनों से मिलवाया है.
मई 2018 में इस टीम को गुमशुदा बच्चों को तलाशने और उन्हें अपनों से मिलाने का जिम्मा सौंपा गया था. टीम में शामिल स्टॉफ ने दिल्ली एनसीआर में मौजूद शेल्टर होम, जुविनाइल होम में जा-जाकर विजिट की और ऐसे बच्चों को तलाशना शुरू किया जो अपनों से बिछड़ गए हों. इस मुहिम के दौरान टीम को ऐसे 101 बच्चे मिल गए जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद उनके अपनों तक सुरक्षित पहुंचाया गया.

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समाज के गरीब तबके से जुड़े थे बिछड़े बच्चे
एसीपी गजेंद्र कुमार के मुताबिक ट्रेस किए गए ज्यादातर बच्चे समाज के बेहद गरीब वर्ग से जुड़े थे. जो किसी न किसी कारणवश अपनों से बिछड़कर इधर-उधर रह रहे थे. 6 से 18 आयुवर्ग के यह बच्चे दिल्ली एनसीआर के अलावा यूपी, बिहार और हरियाणा राज्यों से थे. उत्तर पूर्वी जिले के अलावा पुलिस ने बीते वर्ष कुल 959 बिछड़े बच्चों को अपनों से मिलवाया है.

नई दिल्ली: राजधानी में कानून व्यवस्था को संभालने के साथ-साथ दिल्ली पुलिस समाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों में भी बढचकर हिस्सा लेती है. उत्तर पूर्वी जिला पुलिस ने बिछड़े मासूम बच्चों को अपनों से मिलाने के लिए ऑपरेशन मिलाप चलाकर बीते वर्ष सौ से ज्यादा बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया है. पढ़ें ये रिपोर्ट...
दिल्ली पुलिस वैसे तो पिछले काफी समय से बिछड़े हुए मासूम बच्चों को अपनों से मिलवाने के लिए ऑपरेशन मिलाप चला रही है.

पुलिस टीम का पुनर्गठन
उत्तर पूर्वी जिले के डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर ने पिछले साल जिले के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के एडिशनल डीसीपी एमके मीना की देखरेख में एसीपी गजेंद्र कुमार के नेतृत्व वाली टीम के साथ न केवल पुनर्गठन कर दिया, बल्कि खुद भी लगातार इस टीम का मार्गदर्शन करते रहे हैं.

ये अधिकारी भी थे शामिल
ऑपरेशन मिलाप के इस कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक के अलावा स्पेशल सीपी संदीप गोयल, ज्वॉइंट सीपी राजेश खुराना, आनंद मोहन समेत दिल्ली पुलिस के कई आला अधिकारी और जिले के अधिकारी शामिल रहे.

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किस्सा बताते हुए भावुक हो गए पुलिस कमिश्नर
उत्तर पूर्वी जिला उपायुक्त दफ्तर में आयोजित ऑपरेशन मिलाप के एक कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने मुख्य अतिथि के रूप शिरकत की. इस दौरान पटनायक सर्विस से जुड़ी एक घटना को बताते हुए भावुक हो गए.

बच्चे को किया था अगवा
उन्होंने बताया कि जब वह डीसीपी साउथ हुआ करते थे, उस समय उनके जिले से एक बच्चे को अगवा कर लिया गया. शिकायत मिलने पर अलर्ट हुई पुलिस टीम ने गहन जांच पड़ताल के बाद आखिरकार बच्चे को चंद घंटों में ही सकुशल बरामद कर लिया.

बच्चे को किया परिजनों के हवाले
उधर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. टीम ने मीडिया के सामने केस के खुलासे की बात कही, लेकिन वह रात में ही बिना समय गंवाए सादे कपड़ों में एक निजी काले शीशे वाली गाड़ी से बच्चे को उसके परिजनों के हवाले करने पहुंच गए. जो खुशी उन्हें उस समय हुई वह आजतक की सर्विस के दौरान कभी भी नहीं हुई.

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कैसे काम करता है ऑपरेशन मिलाप
उत्तर पूर्वी जिले में चलने वाले इस ऑपरेशन के तहत पुलिस टीम पहले तो ऐसे बच्चों को तलाश करती है जो किसी न किसी कारणवश अपनों से बिछड़कर किसी बाल गृह या फिर अनाथालय में रहने को विवश हो जाते हैं.

बच्चों की होती है काउंसलिंग
पुलिस टीम बच्चे से मिलने के बाद पहले तो पूरे प्रोफेशनल अंदाज में बच्चे की काउंसलिंग करती है, तत्पश्चात उसको उसके परिजनों तक पहुंचने की कोशिश की जाती है. जैसे ही टीम को बच्चे के सही परिजनों का पता लगता है, वैसे ही बच्चे को उसके अपनों के हवाले कर दिया जाता है.

ऑपरेशन ने 101 बच्चों को परिजनों से मिलाया
डीसीपी के मुताबिक इस जिले में चलने वाले इस ऑपरेशन मिलाप ने 2018 में 101 बिछड़े बच्चों को अपनों से मिलवाया है.
मई 2018 में इस टीम को गुमशुदा बच्चों को तलाशने और उन्हें अपनों से मिलाने का जिम्मा सौंपा गया था. टीम में शामिल स्टॉफ ने दिल्ली एनसीआर में मौजूद शेल्टर होम, जुविनाइल होम में जा-जाकर विजिट की और ऐसे बच्चों को तलाशना शुरू किया जो अपनों से बिछड़ गए हों. इस मुहिम के दौरान टीम को ऐसे 101 बच्चे मिल गए जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद उनके अपनों तक सुरक्षित पहुंचाया गया.

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समाज के गरीब तबके से जुड़े थे बिछड़े बच्चे
एसीपी गजेंद्र कुमार के मुताबिक ट्रेस किए गए ज्यादातर बच्चे समाज के बेहद गरीब वर्ग से जुड़े थे. जो किसी न किसी कारणवश अपनों से बिछड़कर इधर-उधर रह रहे थे. 6 से 18 आयुवर्ग के यह बच्चे दिल्ली एनसीआर के अलावा यूपी, बिहार और हरियाणा राज्यों से थे. उत्तर पूर्वी जिले के अलावा पुलिस ने बीते वर्ष कुल 959 बिछड़े बच्चों को अपनों से मिलवाया है.

Intro:दिल्ली पुलिस राजधानी में कानून व्यवस्था को संभालने के साथ साथ समाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों में भी बढचकर हिस्सा लेती है. उत्तर पूर्वी जिला पुलिस ने बिछड़े मासूम बच्चों को अपनों से मिलाने के लिए ऑपरेशन मिलाप चलाकर बीते वर्ष सौ से ज्यादा बच्चों को अपनों से मिलवाया है.


Body:दिल्ली पुलिस वैसे तो पिछले काफी समय से बिछड़े हुए मासूम बच्चों को अपनों से मिलवाने के लिए ऑपरेशन मिलाप चला रही है, लेकिन उत्तर पूर्वी जिले के डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर ने पिछले साल जिले के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का एडिशनल डीसीपी एमके मीना की देखरेख में एसीपी गजेंद्र कुमार के नेतृत्व वाली टीम के साथ न केवल पुनर्गठन कर दिया बल्कि खुद भी लगातार इस टीम का मार्गदर्शन करते रहे. ऑपरेशन मिलाप के इस कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक के अलावा स्पेशल सीपी संदीप गोयल, ज्वॉइंट सीपी राजेश खुराना, आनंद मोहन समेत दिल्ली पुलिस के कई आला अधिकारी और जिले के अधिकारी शामिल रहे.

किस्सा बताते हुए भावुक हो गए पुलिस कमिश्नर
उत्तर पूर्वी जिला उपायुक्त दफ्तर में आयोजित ऑपरेशन मिलाप के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतितजी के रूप में बोलते हुए पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक सर्विस से जुड़ी एक घटना को बताते हुए भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि जब वह डीसीपी साउथ हुआ करते थे, उस समय उनके जिले से एक बच्चे को अगवा कर लिया गया. शिकायत मिलने पर अलर्ट हुई पुलिस टीम ने गहन जांच पड़ताल के बाद आखिरकार बच्चे को चंद घंटों में ही सकुशल बरामद कर लिया, उधर परिजनों का रो रोकर हाल बुरा था. टीम ने मीडिया के सामने केस के खुलासे की बात कही लेकिन वह रात में ही बिना समय गंवाए सादे कपड़ों में एक निजी काले शीशे वाली गाड़ी से बच्चे को उसके परिजनों के हवाले करने पहुंच गए, जो खुशी उन्हें उस समय हुई वह आजतक की सर्विस के दौरान कभी भी नहीं हुई.

कैसे काम करता है ऑपरेशन मिलाप
उत्तर पूर्वी जिले में चलने वाले इस ऑपरेशन के तहत पुलिस टीम पहले तो ऐसे बच्चों को तलाश करती है जो अपनों से किसी न किसी कारणवश अपनों से बिछड़कर किसी बाल गृह या फिर अनाथालय में रहने को विवश हो जाते हैं. पुलिस टीम बच्चे से मिलने के बाद पहले तो पूरे प्रोफेशनल अंदाज में बच्चे की काउंसलिंग करती है, तत्पश्चात बच्चे से मिलने वाले किसी सुईग के जरिये उसके अपनों तक पहुंचने की कोशिश की जाती है, जैसे ही टीम को बच्चे के सही परिजनों का पता लगता है वैसे ही बच्चे को उसके अपनों के हवाले कर दिया जाता है.

ऑपरेशन ने 101 बच्चों को परिजनों से मिलाया
डीसीपी के मुताबिक इस जिले में चलने वाले इस ऑपरेशन मिलाप ने 2018 में 101 बिछड़े बच्चों को अपनों से मिलवाया है.
मई 2018 में इस टीम को गुमशुदा बच्चों को तलाशने और उन्हें अपनों से मिलाने का जिम्मा सौंपा गया था. टीम में शामिल स्टॉफ ने दिल्ली एनसीआर में मौजूद शेल्टर होम, जुविनाइल होम में जा जाकर विजिट की और ऐसे बच्चों को तलाशना शुरू किया जो अपनों स्व बिछड़ गए हों.इस मुहिम के दौरान टीम को ऐसे 101 बच्चे मिल गए जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद उनके अपनों तक सुरक्षित पहुंचाया गया.

समाज के गरीब तबके से जुड़े थे बिछड़े बच्चे
एसीपी गजेंद्र कुमार के मुताबिक ट्रेस किये गए ज्यादातर बच्चे समाज के बेहद गरीब वर्ग से जुड़े थे, जो किसी न किसी कारणवश अपनों से बिछड़कर इधर उधर रह रहे थे. 6 से 18 आयुवर्ग के यह बच्चे दिल्ली एनसीआर के अलावा यूपी, बिहार और हरियाणा राज्यों से थे. उत्तर पूर्वी जिले के अलावा पुलिस ने बीते वर्ष कुल 959 बिछड़े बच्चों को अपनों से मिलवाया है.


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