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ग्लोबल वॉर्मिंग से इंसानों पर बढ़ेंगे मगरमच्छ के हमले

क्या आपने कभी सोचा है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते इंसान को मगरमच्छों से भी खतरा हो सकता है. चार्ल्स डारविन विश्वविद्यालय के जीव शास्त्री ने खुलासा किया है कि जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होगी मगरमच्छों का इंसानों पर हमला बढ़ने लगेगा. पढ़ें क्या बताया जीव शास्त्री ने....

मगरमच्छ.
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Published : Jun 23, 2019, 4:37 PM IST

Updated : Jun 23, 2019, 6:29 PM IST

कैनबरा: ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ ने ग्लोबल वार्मिंग और मगरमच्छ से जुड़ा ऐसा खुलासा किया है जिसे सुनकर हैरान हो जाएंगे. विशेषज्ञ ने दावा किया है कि ग्लोबल वार्मिग के चलते मगरमच्छ के हमलों की संख्या में वृद्धि हो सकती है.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र में चार्ल्स डारविन विश्वविद्यालय में पर्यावरण और आजीविका अनुसंधान संस्थान के एक प्राणी शास्त्री एडम ब्रिटन ने कहा, 'तापमान में वृद्धि के साथ ही मगरमच्छ ऐसे क्षेत्रों में चले जाएंगे जहां वे पहले कभी नहीं बसे थे.'

उन्होंने कहा कि आबादी के इस प्रसार का तात्पर्य यह है कि अब ये सरीसृप उन लोगों के सम्पर्क में आएंगे जो पहले कभी इनके सम्पर्क में नहीं आए थे.

ब्रिटन ने कहा, 'जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है इसका मतलब यह है कि इसके प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में मगरमच्छ के हमलों में बढ़ोत्तरी होगी क्योंकि ज्यों-ज्यों यह गर्म होता जा रहा है, यह मगरमच्छों के फैलाव को बदलने जा रही है.'

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ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर भी पिघलते जा रहे हैं

उन्होंने आगे कहा, 'हम इंडोनेशिया में देख रहे हैं कि मगरमच्छ उन जगहों पर जा रहे हैं जिन्हें या तो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा है या काफी लंबे समय से नहीं देखा है और इससे हमें हमलों की श्रृंखला भी देखने को मिल रही है.'

ब्रिटन ने यह भी कहा, 'अपने निवास स्थान के नुकसान के बाद मगरमच्छ इन स्थानों को स्थानांतरित हो जाएंगे और उन जगहों पर चले जाएंगे, जहां लोग उनके आदि नहीं हैं.'

ब्रिटन के मुताबिक, उत्तरी क्वींसलैंड के इलाकों में इन मगरमच्छों को देखा जा चुका है जिन्हें पहले शायद ही वहां देखा गया है.

कैनबरा: ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ ने ग्लोबल वार्मिंग और मगरमच्छ से जुड़ा ऐसा खुलासा किया है जिसे सुनकर हैरान हो जाएंगे. विशेषज्ञ ने दावा किया है कि ग्लोबल वार्मिग के चलते मगरमच्छ के हमलों की संख्या में वृद्धि हो सकती है.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी क्षेत्र में चार्ल्स डारविन विश्वविद्यालय में पर्यावरण और आजीविका अनुसंधान संस्थान के एक प्राणी शास्त्री एडम ब्रिटन ने कहा, 'तापमान में वृद्धि के साथ ही मगरमच्छ ऐसे क्षेत्रों में चले जाएंगे जहां वे पहले कभी नहीं बसे थे.'

उन्होंने कहा कि आबादी के इस प्रसार का तात्पर्य यह है कि अब ये सरीसृप उन लोगों के सम्पर्क में आएंगे जो पहले कभी इनके सम्पर्क में नहीं आए थे.

ब्रिटन ने कहा, 'जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है इसका मतलब यह है कि इसके प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में मगरमच्छ के हमलों में बढ़ोत्तरी होगी क्योंकि ज्यों-ज्यों यह गर्म होता जा रहा है, यह मगरमच्छों के फैलाव को बदलने जा रही है.'

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ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर भी पिघलते जा रहे हैं

उन्होंने आगे कहा, 'हम इंडोनेशिया में देख रहे हैं कि मगरमच्छ उन जगहों पर जा रहे हैं जिन्हें या तो उन्होंने पहले कभी नहीं देखा है या काफी लंबे समय से नहीं देखा है और इससे हमें हमलों की श्रृंखला भी देखने को मिल रही है.'

ब्रिटन ने यह भी कहा, 'अपने निवास स्थान के नुकसान के बाद मगरमच्छ इन स्थानों को स्थानांतरित हो जाएंगे और उन जगहों पर चले जाएंगे, जहां लोग उनके आदि नहीं हैं.'

ब्रिटन के मुताबिक, उत्तरी क्वींसलैंड के इलाकों में इन मगरमच्छों को देखा जा चुका है जिन्हें पहले शायद ही वहां देखा गया है.

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Last Updated : Jun 23, 2019, 6:29 PM IST
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