नई दिल्ली : घरेलू कोयले की आपूर्ति में बिजली क्षेत्र को प्राथमिकता देने से हिंदुस्तान जिंक पर कुछ हद तक असर पड़ा है. वेदांता समूह के एक शीर्ष अधिकारी यह बात कही. उन्होंने कहा कि हालांकि कंपनी ने मार्च तक के लिए कोयले के आयात का अनुबंध कर फिलहाल इस समस्या का हल निकाल लिया है. घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत का हिस्सा रखने वाली कोल इंडिया लि. ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी को देखते हुए उन्हें अस्थायी रूप से आपूर्ति में प्राथमिकता दे रही है.
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) अरुण मिश्रा ने बातचीत में कहा कि कंपनी की वार्षिक कोयले की खपत लगभग 20 लाख टन है और वह अपने संयंत्रों में आयातित और घरेलू दोनों ईंधन का उपयोग करती है. बिजली क्षेत्र को घरेलू कोयले की आपूर्ति में प्राथमिकता देने से कंपनी को पड़ने वाले असर को लेकर उन्होंने कहा कि हां, कुछ हद तक हम पर इसका असर पड़ा है. यह अस्थायी हो सकता है. अब आयातित कोयले की अधिक खपत होगी तथा अगले दो या तीन महीनों में घरेलू कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना चाहिए.
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मिश्रा ने कहा कि जहां तक उच्च कीमतों का सवाल है, तो यह पहली बार है जब कीमतों का लागत पर प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा कि संयंत्रों में धातुओं के उत्पादन के लिए बिजली बहुत महत्वपूर्ण है और कोयला कंपनी के बिजली संयंत्र के लिए प्रमुख उत्पादन सामग्री है.
(पीटीआई-भाषा)