पटना/नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण के चलते आरजेडी के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता शहाबुद्दीन की शनिवार सुबह मौत हो गई. 20 अप्रैल को कोरोना की जांच तिहाड़ जेल में कराई थी. 21 अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आई जिसके बाद से उनकी तबीयत बिगड़ती गई. आज (शनिवार) सुबह लगभग 11.30 बजे दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. बीते 1 सप्ताह से कोरोना के चलते दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था. यहां कल शाम से ही उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और शनिवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है.
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कौन है शहाबुद्दीन
दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे शहाबुद्दी जेल में ही संक्रमित हो गए थे. सीवान की सीट से चार बार संसद सदस्य और दो बार विधायक चुने गए थे. 2004 में इन्होंने जेल से चुनाव लड़ा और जीता. पुलिस द्वारा इनके विरुद्ध गवाह नहीं पेश कर पाने के कारण इन्हें बाइज्जत बरी कर दिया गया था. 2005 में शहाबुद्दीन को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया. 2009 में इन्हें चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया गया. 11 सितंबर 2016 के दिन इन्हें जेल से बाहर निकाला गया. 30 सितम्बर 2016 को सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत रद्द कर दी. तब से ये तिहाड़ जेल में कैद थे.
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कोरोना से पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की मौत
- 21 अप्रैल को कोरोना से हुए थे संक्रमित
- तिहाड़ जेल में ही संक्रमित हुए बाहुबली आरजेडी नेता शहाबुद्दीन
- शहाबुद्दी पर फिलहाल 47 आपराधिक केस दर्ज हैं
- 2017 में पटना हाईकोर्ट ने एसिड अटैक केस में उम्रकैद की सजा सुनाई थी
- बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शहाबुद्दीन को सीवान से दिल्ली के तिहाड़ में शिफ्ट किया गया था.आरजेडी के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन का कोरोना से निधन
लालू की छत्रछाया में रहा शहाबुद्दीन
कहा जाता है कि शहाबुद्दीन को 'साहबू' बनाने में लालू का बड़ा हाथ रहा. राजनीति की गलियों में शहाबुद्दीन लालू की छत्रछाया में ही आया था. कहा जाता है कि जनता दल में शामिल होते ही शहाबुद्दीन की ताकत और दबंगई सीवान और सीवान से बाहर दिखने लगी थी. सीवान तो 90 के दशक में शहाबुद्दीन के नाम से ही जाना जाने लगा था.
दूध का धुला कौन ?
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि लालू यादव की पहचान एक अलग अंदाज के लिए होती है. एक बार एक निजी चैनल से बातचीत में लालू से शहाबुद्दीन के अपराधों को लेकर सवाल पूछा गया था. लालू ने इसके जवाब में कहा था कि इस देश में दूध का धुला हुअ कौन है?
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1990 में पहली बार बना विधायक
साल 1990 में शहाबुद्दीन को पहली पर विधानसभा का टिकट मिला और वह जीत गया. 1995 में दूसरी बार भी वह विधानसभा पहुंच गया. उसकी ताकत को देखते हुए लालू ने लोकसभा का टिकट दे दिया और शहाबुद्दीन सांसद भी बन गया.
50 से अधिक मामले हैं दर्ज
रिकॉर्ड के अनुसार, शहाबुद्दीन पर पहली बार 1996 में सीवान के हुसैनगंज थाने में मामला दर्ज हुआ था. बताया जाता है कि फिलहाल उस पर 50 से अधिक मामले दर्ज हैं. सिर्फ यही नहीं, 6 से अधिक मामलों में उसे सजा भी हो चुकी है.
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तेजाब से नहलाकर दो भाइयों को मार दिया था
बता दें कि भाकपा माले के कार्यकर्ता छोटेलाल गुप्ता के अपहरण व हत्या के मामले में वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है. साल 2003 में शहाबुद्दीन को वर्ष 1999 में माकपा माले के सदस्य का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. यही नहीं, साल 2004 में प्रतापपुर गांव में दो भाइयों को तेजाब से नहलाकर मारने के मामले में दोषी पाया गया है. इस मामले में भी उसे उम्र कैद की सजा मिली है.
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अब तक 7 कैदियों की मौत
तिहाड़ जेल में अभी तक सात कैदियों की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई है. इनमें से पांच कैदियों की मौत बीते चार दिनों में हुई है. वहीं दो कैदियों की मौत बीते वर्ष हुई थी. इसके अलावा 200 से ज्यादा कैदी अभी भी कोरोना से संक्रमित हैं और अलग-अलग अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है. इसके अलावा जेल के 100 से ज्यादा कर्मचारी भी कोरोना से संक्रमित हैं.