नागपुर : बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (एमयूएचएस) की ऑफलाइन परीक्षाओं पर शनिवार को रोक लगाने से इनकार कर दिया. ये परीक्षाएं 10 जून से शुरू होने वाली हैं.
न्यायमूर्ति अविनाश घारोटे ने अमोल देशमुख और नितेश तांतरपाले की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें एमयूएचएस के एमबीबीएस, एमडी और बीएचएमएस सहित स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं स्थगित करने का अनुरोध किया गया था.
याचिकाकर्ताओं के वकील राहुल भांगडे ने कहा कि जब तक सभी छात्रों का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक परीक्षाएं रोक दी जानी चाहिए या इनका ऑनलाइन आयोजन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अन्यथा छात्रों के साथ ही परीक्षा कर्मचारियों के भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा होगा.
एमयूएचएस के वकील अभिजीत देशपांडे ने कहा कि याचिका बहुत देर से दायर की गई है और परीक्षा की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि छात्रों के पास बाद में परीक्षा देने का विकल्प है. उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने सहित सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएंगे.
छात्रों को बाद में परीक्षा देने का विकल्प
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति घारोटे ने अपने आदेश में कहा कि 173 केंद्रों पर 40,661 उम्मीदवार परीक्षा देने वाले हैं और याचिकाकर्ता तांतरपाले के अलावा किसी ने भी परीक्षा का विरोध नहीं किया. अदालत ने कहा कि अगर कोई छात्र किसी भी कारण से परीक्षा नहीं देना चाहता है तो वह बाद में परीक्षा दे सकेगा, जिसे अतिरिक्त प्रयास के तौर पर नहीं गिना जाएगा.
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अदालत ने कहा, '10 जून से परीक्षा आयोजित करने के लिए सभी तैयारियां हो चुकी हैं, जो अब से पांच दिनों बाद होनी है. पहले के दो चरणों में परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित की गईं - जनवरी-फरवरी 2021 में और मार्च-अप्रैल 2021 में. अब परीक्षा पर रोक लगाना उचित नहीं है.
(पीटीआई-भाषा)