बेंगलुरु : मूल रूप से मैसूर के भाजपा एमएलसी एच विश्वनाथ ने टीपू सुल्तान की प्रशंसा की है. उन्होंने कहा कि वह इस मिट्टी में पैदा हुए थे इसलिए छात्रों को गांधी के साथ-साथ टीपू सुल्तान को भी पढ़ना चाहिए.
कर्नाटक की भाजपा सरकार ने बच्चों की पाठ्य पुस्तकों में से टीपू सुल्तान के पाठ को हटाने का फैसला लिया है. हिंदुत्व को बढ़ावा देने वाली पार्टी बीजेपी का मानना है कि भारत को आजादी दिलाने में टीपू सुल्तान की कोई भूमिका नहीं थी.
कर्नाटक सरकार के इस फैसले का विपक्षी दलों, वामपंथी समूह और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुरजोर विरोध किया और इस फैसले को वापस लेने का दबाव बनाया.
पाठ्य पुस्तकों में टीपू सुल्तान के बारे में पिछले शैक्षणिक वर्ष में विवाद हुआ और भाजपा सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया, जिसने पाठ्य पुस्तकों से छेड़छाड़ न करने की सिफारिश की.
बीजेपी का कहना है कि टीपू सुल्तान एक हिंदू विरोधी व्यक्ति था, जिसने अपने समय में हिंदुओं को लूटा और मारा. उन्होंने कई हिंदुओं को मुस्लिम समुदाय में भी परिवर्तित किया.
कांग्रेस के अनुसार, टीपू सुल्तान एक बहादुर नायक और देशभक्त थे, जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए मारे गए. पिछले साल सत्ता में आने के तुरंत बाद, बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने टीपू जयंती (टीपू का जन्मदिन) का जश्न रद्द कर दिया, जो कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा 2015 में शुरू किया गया एक वार्षिक कार्यक्रम था.
कई विवादों के बाद भाजपा एमएलसी एच. विश्वनाथ ने टीपू को लेकर दिए बयान से पार्टी के लिए दुविधा की स्थिति पैदा कर दी है.
एच. विश्वनाथ ने कहा कि टीपू सुल्तान किसी जाति या किसी धर्म से संबंधित नहीं हैं. वह द सन ऑफ कर्नाटक हैं और अंग्रेजों के साथ संघर्ष करने वाले एक योद्धा हैं. हमारी सरकार ने टीपू सुल्तान के पाठ को हटाया नहीं है, बल्कि इसे 5वीं की जगह 7वीं कक्षा के पाठ्य पुस्तक में शामिल किया है.
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