हैदराबाद : विश्व अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है. इस कारण एक बड़ी आबादी लॉकडाउन में 'वर्क फ्रॉम होम' के अलावा कोविड-19 की चिंता में डूबी हुई है. समाचार चैनलों से लेकर तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोग कोविड-19 के बारे में जानने को तल्लीन है.
यह महामारी किस प्रकार से बढ़ रही है, क्या लॉकडाउन आगे बढ़ेगा और कई सवाल? इस तरह की सामाजिक और व्यक्तिगत अस्थिरता से लोगों में तनाव, चिंता व घबराहट की स्थिति पैदा हो सकती है.
तो क्या समाधान है, क्या हमें कोविड-19 के बारे में पढ़ना बंद कर देना चाहिए या क्या हमें अपने दृष्टिकोण से चयनात्मक होना चाहिए?
इसपर ट्रैंक्विल माइंड्स, हैदराबाद के मनोचिकित्सक डॉक्टर प्रवीण कुमार चिंतनपंती कहते हैं कि शायद यह महत्वपूर्ण है कि हम इस समय पर लोगों से जुड़ाव महसूस करें और कुछ गुणवत्तापूर्ण समय परिवार के साथ बिताएं. इसके अलावा इस डिजिटल दुनिया में, जहां प्रौद्योगिकी ने हमें हर किसी के करीब ला दिया है, किसी के साथ बातचीत करने के लिए शारीरिक रूप से मौजूद होना आवश्यक नहीं है. हम फोन कॉल या वीडियो कॉल पर भी लोगों से जुड़ सकते हैं. खबर को हम किसी स्कोरबोर्ड की तरह नहीं देखें. इसे दिन में एक या दो बार देखें. मीडिया भी सकारात्मक समाज में हो रही अच्छी चीजों, अग्रिम पंक्ति के श्रमिकों के लिए बहुत सारी अच्छी चीजें दिखा कर इसका हिस्सा बन रहा है.
डॉ प्रवीण कुमार चिंतनपंती ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस लॉकडाउन ने हमें अपने परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों के साथ फिर से जुड़ने का समय दिया है. अपने व्यस्त जीवन में, हम अक्सर अपने माता-पिता, बच्चों या यहां तक कि अपने पति या पत्नी को समय देना चाहते हैं, लेकिन हमारे व्यस्त काम के कारण, हम ऐसा करने में विफल रहते हैं. लेकिन यह सही समय है. उनके साथ फिर से जुड़ाव करें और कुछ गुणवत्तापूर्ण पारिवारिक समय बिताएं.'
'कुछ लोगों के लिए यह सुझाव बेहद छोटा है, लेकिन इसका बड़ा प्रभाव हो सकता है. विशेषतौर पर महामारी की इस स्थिति में, आपकी भावनाएं आपके तर्क को ठिकाने लगा सकती हैं, लेकिन मैं लोगों को इसके बारे में थोड़ा और तर्कसंगत और समझदार बनाने का सुझाव दूंगा. व्यावहारिक होने से यह दौर भी सकारात्मक और बेहतर हो जाएगा. साथ ही जीवन भी सामान्य हो जाएगा.'
दिमाग का अभ्यास करें, जागरूक रहें और चिंतन करें कि आप अपने समय का सबसे अच्छा उपयोग कैसे कर सकते हैं और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करें तो और बेहतर होगा, डॉक्टर का सुझाव है.
सरकार ने टेली-परामर्शों की अनुमति दी है और इसलिए आप जांच कर सकते हैं कि क्या आपके मौजूदा डॉक्टर उपलब्ध हैं. डॉक्टर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपने रोगियों को दवा बता सकते हैं यदि किसी को दवा की आवश्यकता है. ऑन-गोइंग कॉग्निटिव थेरपी वाले लोग टेलीफोन या वीडियो कॉल के माध्यम से भी सेवा ले सकते हैं. इसके अलावा, अगर डॉक्टर ने एक निश्चित अवधि के लिए दवा निर्धारित की है, तो सुनिश्चित करें कि आप उचित खुराक लें और सिफारिश करें कि किसी भी कीमत पर समझौता न करें.
इस प्रकार डॉक्टर के साथ संपर्क में रहने की आवश्यक आग्रह किया जाता है.
डॉक्टर प्रवीण भी निम्नलिखित सुझाव देते हैं:
- थोड़ा ‘स्वयं को समय' दें : स्वयं के साथ समय बिताएं, किताब पढ़ें, अपने शौक का काम करें, फिल्म देखें जो पसंद है, अपने शारीरिक सुदृढ़ता के लिए व्यायाम करें.
- परिवार के साथ समय साझा करें : अपने परिवार के सदस्यों के साथ या जिन लोगों के साथ आप रह रहे हैं, उनके साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं. कुछ साझा गतिविधि करें. हमेशा बोर्ड गेम खेलने की ज़रूरत नहीं है. आप एक साथ किताब भी पढ़ सकते हैं, फिल्म देख सकते हैं और बाद में चर्चा कर सकते हैं. अपने बच्चों को अपने अतीत के बारे में बताएं और आप उन कठिनाइयों से कैसे निपटें, जिनका आपने सामना किया.
- दिनचर्या का पालन करें : दिनचर्या का पालन करने से आपको एक व्यवस्थित दिन में मदद मिलेगी. उपयुक्त समय का विभाजन करें, जो आपको पूरे दिन अधिक उत्पादक बनाने में मदद करेगा.
इन मुश्किल क्षणों के दौरान हमें सकारात्मकता की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इसलिए एक सही दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है. यह विश्वास करना चाहिए कि भारत कोरोना वायरस के साथ लड़ाई में विजयी होकर निकलेगा और जल्द ही यह सब सामान्य होगा.