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23 बरस का छत्तीसगढ़ : कैसा रहा प्रदेश का राजनीतिक सफर

छत्तीसगढ़ बने 23 साल हो गए, इन 23 सालों में राजनीतिक दलों को कई तरह के उतार-चढ़ाव देखना पड़ा है. इन 23 सालों में 15 साल भाजपा और 8 साल कांग्रेस सत्ता पर काबिज रही. ऐसे में छत्तीसगढ़ के दोनों प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा का कैसा सफर रहा, इन 23 सालों में कांग्रेस और भाजपा की प्रदेश में क्या उपलब्धि रही, राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार कौन सा दल इन 23 साल में मजबूत हुआ है. आज हम ये जानने की कोशिश करेंगे. chhattisgarh sthapna diwas

22 बरस का छत्तीसगढ़
22 बरस का छत्तीसगढ़
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Published : Nov 1, 2022, 3:35 PM IST

Updated : Oct 31, 2023, 10:20 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ लंबे समय से अलग राज्य की मांग को लेकर संघर्षरत था. सालों से राजनीतिक दलों के साथ कई बुद्धिजीवी आंदोलनरत थे, लेकिन कड़े संघर्षों के बाद आखिरकार मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया. 1 नवंबर 2000 को अलग राज्य के तौर पर छत्तीसगढ़ बना. शांति का टापू कहे जाने वाले और मनखे मनखे एक सामान का संदेश देने वाले इस राज्य की राजनीति में कई उतार चढ़ाव भी आए. एक ओर जहां इस राज्य में प्रथम सरकार के तौर पर कांग्रेस ने शासन किया, तो वहीं दूसरी ओर जनता ने कांग्रेस को 15 वर्षों तक वनवास भेजा. लेकिन जनता ने अब लंबे समय तक शासन करने वाली भाजपा को सत्ता से बेदखल करते हुए कांग्रेस एक बार फिर सत्ता की चाबी सौंपी. इन 22 वर्षों में आखिर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक दलों का सफर कैसा रहा. ईटीवी भारत आपको छत्तीसगढ़ के 22 बरस पर यह खास रिपोर्ट के बारे में बताने जा रहा है. Political journey of Chhattisgarh in 22 years

अटल बिहारी वाजपेयी ने निभाया अपना वादा : पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की देन है छत्तीसगढ़ राज्य .अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 1990 में ही तय कर दिया था कि छत्तीसगढ़ को राज्य बनाना है.वाजपेयी यहां की आदिवासी संस्कृति और वन संपदा से बेहद लगाव रखते थे. मध्य प्रदेश से अलग छत्तीसगढ़ राज्य के सपने को उन्होंने बतौर प्रधानमंत्री साकार किया.अटल बिहारी वाजपेयी की वो हुंकार यादगार तारीख बन गई, जब वर्ष 1998 में उन्होंने रायपुर के सप्रे शाला मैदान में एक सभा में कहा था कि '' आप मुझे 11 सांसद दो, मैं आपको छत्तीसगढ़ दूंगा. अटल की अपील का असर हुआ. उस दौरान छत्तीसगढ़ के 11 में से सात संसदीय सीटें भाजपा की झोली में आई. इसके बाद अटल ने कहा - रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाई पर वचन न जाई ।। अपने वचन के अनुरूप छत्तीसगढ़ राज्य गठन की घोषणा की.लगभग एक साल बाद यानी 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में और नौ अगस्त को राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रस्ताव पर मुहर लगी. चार सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया.बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य की मांग 1965 से ही शुरू हो गई थी, लेकिन इसे पूरा किया अटल सरकार ने.chhattisgarh foundation day

अजीत जोगी बने छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री : अजीत जोगी साल 1999 में शहडोल लोकसभा सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन उसके बाद जब नया राज्य बना, तो स्थानीय कांग्रेस में ऐसा समीकरण बना कि जोगी को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल गया. 2000 से लेकर 2003 के विधानसभा चुनाव तक उनके पास ये पद रहा. लेकिन फिर से वह इस पद पर वापसी नहीं कर सके. chhattisgarh sthapna diwas

जोगी के बाद बीजेपी का लंबा दौर : छत्तीसगढ़ गठन के बाद साल 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए जिसमें बीजेपी को जीत हासिल हुई और उसके बाद डॉ रमन सिंह को भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया. डॉ. रमन सिंह ने सात दिसम्बर 2003 को राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित सार्वजनिक समारोह में हजारों लोगों के बीच शपथ ग्रहण कर मुख्यमंत्री पद का कार्य भार संभाला था. उन्होंने राज्य विधानसभा के दूसरे आम चुनाव मैं जीत के बाद दोबारा 12 दिसम्बर को इसी पुलिस परेड मैदान में विशाल जनसमुदाय के बीच मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उन्होंने इस बार भी 12 दिसम्बर को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. यह भी संयोग है कि वर्ष 2008 के विधानसभा आम चुनाव की मतगणना भी आठ दिसम्बर को हुई थी.

झीरम ने देश को झकझोरा : 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में हमला कर 32 लोगों की हत्या की थी. इस घटना में कांग्रेस के शीर्ष स्तर के नेताओं समेत सुरक्षा बल के जवान ग्रामीण भी मारे गए थे.झीरम में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. उस दौरान भी परिस्थिति ऐसी बन रही थी कि आगामी विधानसभा चुनाव 2013 में कांग्रेस सत्ता पर काबिज हो सकती थी लेकिन बाद में समीकरण बदल गया और पुनः भाजपा सत्ता पर काबिज हो गई. इस तरह डॉ रमन सिंह का मुख्यमंत्री के तौर पर 15 साल का कार्यकाल रहा.

जोगी ने कांग्रेस को किया अलविदा : राज्य में कांग्रेस नेताओं से मतभेद के चलते जोगी ने वर्ष 2016 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया और उसके बाद एक नई पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का गठन कर लिया और वह उसके प्रमुख थे. छत्तीसगढ़ में 2014 में एक उपचुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार को मैदान छोड़ने के लिए दिए सरकार से करोड़ों रुपए के कथित 'लेनदेन' का टेप सार्वजनिक होने के मामले में कांग्रेस ने जनवरी 2014 में अमित जोगी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसके अलावा अजित जोगी को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने का प्रस्ताव ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी को भेजा गया था. इसके बाद से ही अजीत जोगी को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस के अंदर ही उथल पुथल चलती रही. उन पर लगातार पार्टी में रहते हुए पार्टी को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे कई बार जोगी का गुस्सा पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर भी देखने को मिला. बाद में साल 2016 में कांग्रेस से बगावत कर उन्होंने अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बना ली. इसके बाद उनका यह दल छत्तीसगढ़ में तीसरे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभर कर सामने आया. साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान अजीत जोगी की पार्टी को 5 सीटें मिली.

जनता ने कांग्रेस को सौपी सत्ता की चाबी : छत्तीसगढ़ की सत्ता में 15 साल से काबिज बीजेपी का पत्ता विधानसभा चुनाव 2018 में साफ हो गया है. डेढ़ दशक के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बड़ी जीत के साथ एक बार फिर सत्ता पर काबिज हुई. इस चुनाव में बीजेपी की ओर से डॉ रमन सिंह ही मुख्यमंत्री का चेहरा थे, जबकि कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनावी मैदान में उतरी थी. इसके बावजूद बीजेपी अपनी सत्ता नहीं बचा पाई.

आधी से एक-तिहाई सीटों पर सिमटी बीजेपी : छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनावों से बीजेपी सीटें हासिल करने के मामले में अपनी स्थिति लगातार स्‍थि‍र बनाई हुई थी. 2003, 2008, 2013 विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 50, 50, 49 सीटें हासिल कीं. तीन चुनावों तक लगातार स्थिरता बनाए रखना वाकई काबिले-तारीफ है. लेकिन 2018 चुनाव में अचानक में ये बड़ी गिरावट बहुत कुछ कहती है. इस चुनाव में 90 में से 68 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. वहीं 15 साल सत्ता पर काबिज रही भाजपा महज 15 सीटों पर सिमटकर रह गई.

भूपेश बघेल बने मुख्यमंत्री : 15 सालों तक सत्ता पर काबिज भाजपा को हराकर कांग्रेस ने प्रदेश में एकतरफा जीत हासिल की इस जीत के बाद भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ की कमान सौंपी गई.उसके बाद लगातार मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेश बघेल काम कर रहे हैं.

बसपा ने भी उपस्थिति कराई है दर्ज : छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बाद यदि कोई दल लगातार विधानसभा में सक्रीय रहा, तो वह था बहुजन समाजवादी पार्टी. जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ उस दौरान बहुजन समाजवादी पार्टी के पास 3 सीटें थी इसके बाद साल 2003 में 1 सीट, 2008 में 2 सीट, 2013 में 1 ओर 2018 में 2 सीट मिली थी.

क्या है मौजूदा स्थिति : बता दें कि 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं 15 साल सत्ता पर काबिज रही भाजपा को महज 15 सीटें मिली. जेसीसीजे के खाते में 5 और बहुजन समाज पार्टी के खाते में 2 सीटें आई थी. वर्तमान में हुए उपचुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा में से 70 पर कांग्रेस काबिज है, वही 14 सीटें भाजपा की झोली में है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे )3 और बहुजन समाजवादी पार्टी 2 सीटों पर काबिज है । एक सीट वर्तमान में एक रिक्त है.
chhattisgarh rajyotsava 2022

रायपुर: छत्तीसगढ़ लंबे समय से अलग राज्य की मांग को लेकर संघर्षरत था. सालों से राजनीतिक दलों के साथ कई बुद्धिजीवी आंदोलनरत थे, लेकिन कड़े संघर्षों के बाद आखिरकार मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया. 1 नवंबर 2000 को अलग राज्य के तौर पर छत्तीसगढ़ बना. शांति का टापू कहे जाने वाले और मनखे मनखे एक सामान का संदेश देने वाले इस राज्य की राजनीति में कई उतार चढ़ाव भी आए. एक ओर जहां इस राज्य में प्रथम सरकार के तौर पर कांग्रेस ने शासन किया, तो वहीं दूसरी ओर जनता ने कांग्रेस को 15 वर्षों तक वनवास भेजा. लेकिन जनता ने अब लंबे समय तक शासन करने वाली भाजपा को सत्ता से बेदखल करते हुए कांग्रेस एक बार फिर सत्ता की चाबी सौंपी. इन 22 वर्षों में आखिर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक दलों का सफर कैसा रहा. ईटीवी भारत आपको छत्तीसगढ़ के 22 बरस पर यह खास रिपोर्ट के बारे में बताने जा रहा है. Political journey of Chhattisgarh in 22 years

अटल बिहारी वाजपेयी ने निभाया अपना वादा : पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की देन है छत्तीसगढ़ राज्य .अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 1990 में ही तय कर दिया था कि छत्तीसगढ़ को राज्य बनाना है.वाजपेयी यहां की आदिवासी संस्कृति और वन संपदा से बेहद लगाव रखते थे. मध्य प्रदेश से अलग छत्तीसगढ़ राज्य के सपने को उन्होंने बतौर प्रधानमंत्री साकार किया.अटल बिहारी वाजपेयी की वो हुंकार यादगार तारीख बन गई, जब वर्ष 1998 में उन्होंने रायपुर के सप्रे शाला मैदान में एक सभा में कहा था कि '' आप मुझे 11 सांसद दो, मैं आपको छत्तीसगढ़ दूंगा. अटल की अपील का असर हुआ. उस दौरान छत्तीसगढ़ के 11 में से सात संसदीय सीटें भाजपा की झोली में आई. इसके बाद अटल ने कहा - रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाई पर वचन न जाई ।। अपने वचन के अनुरूप छत्तीसगढ़ राज्य गठन की घोषणा की.लगभग एक साल बाद यानी 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में और नौ अगस्त को राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रस्ताव पर मुहर लगी. चार सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया.बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य की मांग 1965 से ही शुरू हो गई थी, लेकिन इसे पूरा किया अटल सरकार ने.chhattisgarh foundation day

अजीत जोगी बने छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री : अजीत जोगी साल 1999 में शहडोल लोकसभा सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन उसके बाद जब नया राज्य बना, तो स्थानीय कांग्रेस में ऐसा समीकरण बना कि जोगी को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल गया. 2000 से लेकर 2003 के विधानसभा चुनाव तक उनके पास ये पद रहा. लेकिन फिर से वह इस पद पर वापसी नहीं कर सके. chhattisgarh sthapna diwas

जोगी के बाद बीजेपी का लंबा दौर : छत्तीसगढ़ गठन के बाद साल 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए जिसमें बीजेपी को जीत हासिल हुई और उसके बाद डॉ रमन सिंह को भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया. डॉ. रमन सिंह ने सात दिसम्बर 2003 को राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित सार्वजनिक समारोह में हजारों लोगों के बीच शपथ ग्रहण कर मुख्यमंत्री पद का कार्य भार संभाला था. उन्होंने राज्य विधानसभा के दूसरे आम चुनाव मैं जीत के बाद दोबारा 12 दिसम्बर को इसी पुलिस परेड मैदान में विशाल जनसमुदाय के बीच मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उन्होंने इस बार भी 12 दिसम्बर को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. यह भी संयोग है कि वर्ष 2008 के विधानसभा आम चुनाव की मतगणना भी आठ दिसम्बर को हुई थी.

झीरम ने देश को झकझोरा : 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में हमला कर 32 लोगों की हत्या की थी. इस घटना में कांग्रेस के शीर्ष स्तर के नेताओं समेत सुरक्षा बल के जवान ग्रामीण भी मारे गए थे.झीरम में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. उस दौरान भी परिस्थिति ऐसी बन रही थी कि आगामी विधानसभा चुनाव 2013 में कांग्रेस सत्ता पर काबिज हो सकती थी लेकिन बाद में समीकरण बदल गया और पुनः भाजपा सत्ता पर काबिज हो गई. इस तरह डॉ रमन सिंह का मुख्यमंत्री के तौर पर 15 साल का कार्यकाल रहा.

जोगी ने कांग्रेस को किया अलविदा : राज्य में कांग्रेस नेताओं से मतभेद के चलते जोगी ने वर्ष 2016 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया और उसके बाद एक नई पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का गठन कर लिया और वह उसके प्रमुख थे. छत्तीसगढ़ में 2014 में एक उपचुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार को मैदान छोड़ने के लिए दिए सरकार से करोड़ों रुपए के कथित 'लेनदेन' का टेप सार्वजनिक होने के मामले में कांग्रेस ने जनवरी 2014 में अमित जोगी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसके अलावा अजित जोगी को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने का प्रस्ताव ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी को भेजा गया था. इसके बाद से ही अजीत जोगी को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस के अंदर ही उथल पुथल चलती रही. उन पर लगातार पार्टी में रहते हुए पार्टी को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे कई बार जोगी का गुस्सा पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर भी देखने को मिला. बाद में साल 2016 में कांग्रेस से बगावत कर उन्होंने अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बना ली. इसके बाद उनका यह दल छत्तीसगढ़ में तीसरे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभर कर सामने आया. साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान अजीत जोगी की पार्टी को 5 सीटें मिली.

जनता ने कांग्रेस को सौपी सत्ता की चाबी : छत्तीसगढ़ की सत्ता में 15 साल से काबिज बीजेपी का पत्ता विधानसभा चुनाव 2018 में साफ हो गया है. डेढ़ दशक के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बड़ी जीत के साथ एक बार फिर सत्ता पर काबिज हुई. इस चुनाव में बीजेपी की ओर से डॉ रमन सिंह ही मुख्यमंत्री का चेहरा थे, जबकि कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनावी मैदान में उतरी थी. इसके बावजूद बीजेपी अपनी सत्ता नहीं बचा पाई.

आधी से एक-तिहाई सीटों पर सिमटी बीजेपी : छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनावों से बीजेपी सीटें हासिल करने के मामले में अपनी स्थिति लगातार स्‍थि‍र बनाई हुई थी. 2003, 2008, 2013 विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 50, 50, 49 सीटें हासिल कीं. तीन चुनावों तक लगातार स्थिरता बनाए रखना वाकई काबिले-तारीफ है. लेकिन 2018 चुनाव में अचानक में ये बड़ी गिरावट बहुत कुछ कहती है. इस चुनाव में 90 में से 68 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी. वहीं 15 साल सत्ता पर काबिज रही भाजपा महज 15 सीटों पर सिमटकर रह गई.

भूपेश बघेल बने मुख्यमंत्री : 15 सालों तक सत्ता पर काबिज भाजपा को हराकर कांग्रेस ने प्रदेश में एकतरफा जीत हासिल की इस जीत के बाद भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ की कमान सौंपी गई.उसके बाद लगातार मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेश बघेल काम कर रहे हैं.

बसपा ने भी उपस्थिति कराई है दर्ज : छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बाद यदि कोई दल लगातार विधानसभा में सक्रीय रहा, तो वह था बहुजन समाजवादी पार्टी. जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ उस दौरान बहुजन समाजवादी पार्टी के पास 3 सीटें थी इसके बाद साल 2003 में 1 सीट, 2008 में 2 सीट, 2013 में 1 ओर 2018 में 2 सीट मिली थी.

क्या है मौजूदा स्थिति : बता दें कि 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं 15 साल सत्ता पर काबिज रही भाजपा को महज 15 सीटें मिली. जेसीसीजे के खाते में 5 और बहुजन समाज पार्टी के खाते में 2 सीटें आई थी. वर्तमान में हुए उपचुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा में से 70 पर कांग्रेस काबिज है, वही 14 सीटें भाजपा की झोली में है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे )3 और बहुजन समाजवादी पार्टी 2 सीटों पर काबिज है । एक सीट वर्तमान में एक रिक्त है.
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Last Updated : Oct 31, 2023, 10:20 PM IST
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