रायपुर: देश में नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान नेता अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. सरकार लगातार कानून के फायदे और किसानों की आशंकाओं को दूर करने पर जोर दे रही है. लेकिन किसान अपने डिमांड पर अडिग हैं. वहीं छत्तीसगढ़ में भी किसान टोकन और धान खरीदी में बदइंतजामी को लेकर निराश हैं. इन सभी मुद्दों पर छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह से ETV भारत से खास बातचीत की है. इस दौरान रमन सिंह ने कहा कि किसानों के बीच कुछ संगठन भ्रम फैला रहे हैं. किसानों के लिए बनाई गई मंडी बंद नहीं हो रही है और न ही MSP (Minimum support price) खत्म हो रहा है.
रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान परेशान हैं. किसान को धान बेचने के लिए भटकना पड़ रहा है. बार-बार नियम-कानून बदले जा रहें हैं. किसी किसान का 11 एकड़ है तो एक एकड़ की फसल खरीदी जा रही है. किसान को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. किसान को रात-रात भर जागकर टोकन लेना पड़ रहा है.
धान का नहीं हुआ पेमेंट
रमन ने कहा कि पिछले साल के खरीदे हुए धान का भुगतान 3 महीने के बाद मार्च के महीने में हुआ. 2 साल का बोनस गायब हो गया. भूल गई सरकार की 2 साल का बोनस देना है. मार्च में आखिरी पेमेंट होगा. पता नहीं इस साल का पेमेंट 2 साल बाद होगा कि 3 साल बाद होगा. रमन सिंह ने भूपेश सरकार पर कई ताबड़तोड़ वार किए.
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किसान के हित के लिए केंद्र ने बनाया कानून: रमन सिंह
रमन ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के हित में कानून बनाया है. लेकिन कुछ संगठन किसानों को भ्रमित कर रहें हैं. उनके पास इस बात का भी जवाब नहीं है कि केंद्र सरकार ने जो कानून बनाया है. उससे किसानों को नुकसान हुआ है. किसानों को भ्रमित किया जा रहा है. सरकार किसानों के हित के लिए कार्य कर रही है.
मंडियां बंद नहीं हो रहीं बल्कि और मजबूत होंगी: रमन सिंह
बार-बार स्पष्टीकरण के बाद भी आंदोलन हो रहा है. किसानों से 5 बार की बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि कोई मंडी बंद नहीं की जा रही है. मंडी यथावत रहेंगी. मंडी को और मजबूत किया जाएगा.
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जानबूझकर भ्रम फैला रहे
रमन सिंह ने जोर देकर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य था, है और रहेगा. इसमें कहीं कोई शंका नहीं है. लेकिन जानबूझकर MSP (Minimum support price) बंद होने और कम होने का भ्रम फैलाया जा रहा है.
'राजनीति के लिए किसान आंदोलन'
रमन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को बार-बार समझाइश दे रही है. इसके बाद भी जबरदस्ती आंदोलन किया जा रहा है. ये राजनीति के लिए आंदोलन किया जा रहा है. दिल्ली में बैठे कुछ सियासी दल के लोग जानबूझकर भ्रमित कर रहे हैं.
नारायणपुर में आदिवासियों के प्रदर्शन पर भी रमन ने बघेल सरकार को घेरा
रमन यहीं नहीं ठहरे भूपेश सरकार पर ताबड़तोड़ हमला करते रहे. रमन ने कहा कि इस सरकार के पास समय नहीं है. सरकार के पास मुद्दों को सुनने का समय नहीं है. नारायणपुर में आदिवासी ग्रामीणों के प्रदर्शन को देखने कोई मंत्री नहीं गया, कोई विधायक भी नहीं गया. अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई. ठंड में भूखे-प्यासे 8 से 10 हजार आदिवासी बैठे हैं. दिल्ली के आंदोलन की सब चर्चा कर रहे हैं. लेकिन आदिवासियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. सरकार अपने काम में मस्त है.
रमन सिंह ने दिए आंदोलन के संकेत
रमन सिंह ने इन सब मुद्दों पर आंदोलन के संकेत दिए हैं. रमन ने कहा कि सरकार जहां असफल होती है. उन सभी मुद्दों को लेकर भाजपा आने वाले समय में जनआंदोलन करेगी.
सरकार ने कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा
बता दें कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के प्रदर्शन का आज 11वां दिन है. शनिवार को किसान संगठनों के प्रमुखों और केंद्र सरकार के बीच पांचवें दौर की वार्ता हुई. लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला. अब किसान यूनियन के प्रमुखों का कहना है कि सरकार हां या ना में जवाब दे. हालांकि, सात घंटे तक चली बातचीत में सरकार का रुख सकारात्मक रहा और किसान संगठनों की मांग पर सरकार ने कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा.
किसान नेता कानून वापस लेने की मांग पर अड़े
किसान नेता कानून वापस लेने की मांग पर अड़े रहे. लेकिन सरकार लगातार कानून के फायदे और किसानों की आशंकाओं को दूर करने पर जोर देती रही. इस तरह से चर्चा आगे बढ़ती रही और बैठक के दौरान एक समय ऐसा आया, जब सभी किसान मौन हो गए और कानून वापस लेने के सवाल पर सरकार से दो टूक जवाब 'हां' या 'ना' में मांगने लगे. बैठक के दौरान हाथ में 'Yes' या 'No' की तख्ती दिखाते हुए किसानों ने मौन प्रदर्शन भी किया.