कवर्धा: लोहारा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम रणवीरपुर में भावना समाज सेवी संस्था द्वारा तीन दिवसीय धर्मसभा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में पूरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महराज का आगमन हुआ. शंकराचार्य ने कार्यक्रम के दूसरे दिन स्कूल ग्राउंड में धर्मसभा को संबोधित किया. कार्यक्रम मे शंकराचार्य को सुनने हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई. लोगों ने शंकराचार्य का दर्शन कर आशीर्वाद लिया. इस दौरान स्वामी ने पत्रकार वार्ता भी लिया. ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य और आरक्षण के मुद्दे समेत कई बडे बयान भी दिए.
अविमुक्तेश्ववरानंद को शंकराचार्य मानने से किया इनकार: स्वामी जी ने बिना नाम लिए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्ववरानंद सरस्वती को शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि "उनके गुरुजी 99 साल के आयु में देह शांत हुए. उसके पहले तक शंकराचार्य की गद्दी किसी को भी क्यों नहीं दी. बाद में दो लोगों को अंग रक्षक की तरह अलग-बगल खड़े कर के अभिषेक कराके शंकराचार्य बन गए. अगर शंकराचार्य है भी और मर्यादा का अतिक्रमण करता हो, उसे हम शंकराचार्य नहीं मानते. इनकों लगता है हम तीन हो गए, पूरी के शंकराचार्य को दबा देंगे. तो हमें तीस नहीं दबा पाए, तीन क्या दबाऐंगे."
मोहन भागवत के आरक्षण वाले बयान पर बोले स्वामी: आरक्षण मामले पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि "एक बार मोहन भागवत जी ने कहा था कि आरक्षण ठीक नहीं है. इसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा बिहार में चुनाव हार गई. आजकल तो लहर है आरक्षण का. हमने कहा कि सनातन धर्म में आरक्षण का स्थान है. आदमी के जीवका जन से सुरक्षित थी, इससे बढ़िया आरक्षण क्या हो सकता है. सीनियर से उपर जूनियर पहुंच जाएगा. आरक्षण में योग्य से ऊपर आयोग पहुंच जाएगा. आरक्षण के नाम पर तो क्या राष्ट्र का उतकर्ष होगा."
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"देश परतंत्र हो जाएगा आरक्षण के चपेट में रहा तो": शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने आगे कहा कि "आप योग्य सबको बनाइए. लेकिन आरक्षण के नाम पर आयोग्य व्यक्ति योग्य के उपर जाएगा, तो देश का बंटाधार होगा की नहीं. पांच दोष में भूल निकालिए कठुआ ज्ञानी, प्रगत की हानि, प्रयोगिक नहीं, प्रैक्टिकल नहीं, प्रतिशोध की भावना. देश परतंत्र हो जाएगा आरक्षण के चपेट में रहा तो और हो ही रहा है."
इस दौरान सालों पुरानी बात को उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने कहा कि "उड़ीसा के पूरी में जिनको आरक्षण में अधिकृत माना था, सुरजभान ने स्वामी जी को फोन किया और कहा कि हम शंकराचार्य के अध्यक्षता में एक सभा करना चाहते हैं. जहां संगोष्टी थी, वहां आरक्षण मध्यकृत थी. वो रो रहे थे आरक्षण लागू होने से हम बहुत घाटे में है. हमारी जितनी जीविका थी, ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य ने डॉक्टर, इंजिनियर आदि बनकर ले लिया."