जशपुर: जिले में एक बार फिर स्वास्थ्य सुविधाओं को मुंह चिढ़ाती हुई और सरकारी दावों की पोल खोलती हुई तस्वीरें सामने आई हैं, जहां एक घायल पहाड़ी कोरवा को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई, जिसके बाद मजबूर परिजन उसे कंधे पर लादकर 10 किलोमीटर दूर अस्पताल ले गए.
मामला जिले के बगीचा विकासखंड के सन्ना पाठ के ब्लादरपाठ ग्राम का है. यहां रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा रुईला और जितवा पर गांव के बंधु कोरवा ने किसी बात को लेकर टांगी से हमला कर दिया. हमले में चाचा रुईला और भतीजा जितवा बुरी तरह घायल हो गए.
कंधे पर लादकर किया 10 किलोमीटर का सफर
गंभीर रूप से घायल रुईला इलाज के लिए 108 एम्बुलेंस 108 की मदद नहीं मिली. काफी देर इंतजार करने के बाद जब मदद नहीं आई तो गांववालों ने पारंपरिक झलंगी भार की मदद से कंधे पर लादकर करीब 10 किलोमीटर का सफर किया, जिसके बाद वे थाना पहुंचे और पुलिस की मदद से घायल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया.
'स्वास्थ्य सेवाओं की है कमी'
समाजिक कार्यकर्ता सत्य प्रकाश तिवारी का कहना है कि 'आदिवासी बहूल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है, जिसके कारण आज घायल पहाड़ी कोरवा इलाज के लिए 10 किलोमीटर कंधे पर लादकर अस्पताल ले जाया गया.
'सूचना मिलती तो जशपुर से भेजते एंबुलेंस'
स्वास्थ्य अधिकारी एसएन पैकरा का कहना है कि, मामला गंभीर है और इसमें साफ तौर पर लापरवाही नजर आ रही है'. उनका कहना है कि 'सन्ना में 102 ओर 108 की सेवाएं हैं, जिसमे 108 की खराब है, अगर समय पर मुझे सूचना मिलती तो जशपुर से 108 एंबुलेंस भेजी जा सकती थी.
खोखले साबित हो रहे दावे
बहरहाल सरकार विकास के लाख दावे क्यों न कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयां कर रही है. जिले के पाठ क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा किस तरह बदहाली की जिंदगी जी रहे हैं, इसे घटना ने सामेन ला दिया है. 10 किलोमीटर तक किसी मरीज को कंधे पर ढोकर लाना पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करता है.