सारण: 'मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना....' यह लाइनें जिले के गुदरी बाजार सलापतगंज के लोगों पर बिल्कुल फिट बैठती है. यहां को लोगों में गंगा-जमुनी तहजीब की शानदार मिलास देखने को मिलती है. यहां दो समुदाय के लोग आपस में मिल जुलकर सुख-शांति के साथ पर्व-त्योहार मनाते हैं.
हिन्दू करते हैं ताजिया का निर्माण
कौमी एकता के उदाहरण को चरितार्थ करते प्रखंड के हिंदू परिवार मुहर्रम के त्योहार पर मुस्लिम भाइयों के साथ मिलकर ताजिया का निर्माण करते हैं. इस बबात जिले के युवा लोक कलाकार अरुण कुमार ने इटीवी भारत से खास बातचीत में कहा कि हिन्दू होते हुए भी मुस्लिम समुदाय के पर्व में शामिल होकर मैं विगत दस वर्षों से ताजिया के निर्माण में आपना सहयोग देता आ रहा हूं. इस मोहल्ले में मेरा घर भी है और हमलोग आपसी सहयोग से सौहार्दपूर्ण तरीके से एक साथ दुख और सुख बांटते आ रहे हैं.
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आपसी सहयोग और भाईचारे की मिसाल
इस बाबत ताजिया निर्माण कमिटी के सद्स्य मो. अरशद कहते है कि यहां के युवा पिछले 14 साल से आपसी सहयोग से ताजिया का निर्माण करते हैं. हिंदू और मुस्लिम वर्ग के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. मो. अरशद का कहना है कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मोहल्ले के युवक रोजगार के तलाश में दूसरे प्रदेशों में रहते है. लेकिन फिर भी इलाके को लोग आपसी सहयोग के साथ सभी पर्व-त्योहार मनाते आ रहे है.

गौरतलब है कि कौमी एकता के प्रतीक माने जाने वाले सारण के लाल देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद और मौलाना मजहरूल हक की यह धरती आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिसाल है. यह धरती लोकनायक जयप्रकाश नारायण, नमक आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले जैसे दर्जनों वीर महापुरुषों की गाथा अपने अंदर समेटे हुए है.