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74 हजार नियोजित शिक्षकों का रिकार्ड लापता, मुखिया से लेकर अधिकारी तक निगरानी के रडार पर

विजलेंस की टीम को अब तक 74 हजार नियोजित शिक्षकों का कोई रिकार्ड नहीं मिल पाया है. टीम ने 450 फर्जी शिक्षके पर एफआईआर दर्ज किया गया है. नियोजन मामले में विजलेंस के रडार पर मुखिया से लेकर शिक्षा विभाग के कई अधिकारी हैं.

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Published : Aug 1, 2019, 11:47 AM IST

बिहार में फर्जी नियोजित शिक्षक की जांच

पटना: विजिलेंस की टीम बिहार में शिक्षकों के नियोजन में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर रही है. हालांकि यह जांच अब तक पूरी नहीं हो पायी है. विजिलेंस की टीम को 74 हजार नियोजित शिक्षकों का रिकॉर्ड अब तक नहीं मिल पाया है. वहीं, जांच के संबंध में आज होने वाली निगरानी विभाग की समीक्षा बैठक भी आखिरी वक्त में रद्द कर दिया गया.

आनाकानी करने वालों पर कार्रवाई की छूट
विजिलेंस की टीम लंबे समय से नियोजित शिक्षकों की कुंडली खंगाल रही है. लेकिन रिकॉर्ड की जांच कर रही टीम अपनी जांच पूरी नहीं कर पायी है. शिक्षकों का रिकॉर्ड मुहैया कराने का निर्देश सभी जिला इकाइयों को दी गई थी. लेकिन जिला इकाइयों की तरफ से आनाकानी भी की गई. इस पर शिक्षा विभाग ने ऐसी नियोजन इकाइयों पर तुरंत कार्रवाई करने की टीम को छूट दे दी.

2006 में शुरू हुई थी नियोजन की प्रक्रिया
गौरतलब है कि बिहार में नियोजन की प्रक्रिया साल 2006 में शुरू हुई थी. इसके तहत सूबे में करीब चार लाख नियोजित शिक्षक हैं. कुल नियोजित शिक्षकों में से करीब 74 हजार शिक्षकों का रिकॉर्ड विजिलेंस के हाथ नहीं लग पाया है.

एक डिग्री पर दो जगह नौकरी
विजिलेंस की टीम शिक्षकों के कागजात की जांच कर रही है. विजलेंस विभाग फर्जी कागजात वाले शिक्षकों को दबोचने का लगातार प्रयास कर रही है. शिक्षकों के रिकॉर्ड में हेराफेरी और फर्जी सर्टिफिकेट का रिकॉर्ड गायब किए जाने की भी बात कही जा रही है. जांच में कई शिक्षक ऐसे भी मिले हैं, जो एक ही डिग्री पर दो-दो जगह नौकरी करते हुए पाए गए हैं. साथ ही दोनों जगह से वेतन भी उठा रहे थे.

मुखिया, बीईओ, डीईओ और डीपीओ रडार पर
इस मामले में ना सिर्फ नियोजन इकाई बल्कि कई मुखिया और विभाग के कई अधिकारी भी निगरानी के रडार पर हैं. जानकारी के मुताबिक निगरानी टीम ने 450 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. विजलेंस ने नवादा में सर्वाधिक 45 शिक्षकों पर एफआई आर दर्ज किया है.

जिलावार फर्जी शिक्षकों पर दर्ज मुकदमा

  • नवादा-45
  • जहानाबाद-42
  • बक्सर-31
  • रोहतास -29
  • भोजपुर-16
  • मधुबनी-11
  • दरभंगा-11

इसके अलावे अररिया, मुजफ्फरपुर, मुंगेर पूर्णिया और पटना में में 1-1 फर्जी शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज की गई है. निगरानी की जांच की जद में शिक्षा विभाग के कई बीईओ, डीईओ और डीपीओ भी हैं. ऐसे में 21 अगस्त को निगरानी की होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं.

पटना: विजिलेंस की टीम बिहार में शिक्षकों के नियोजन में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर रही है. हालांकि यह जांच अब तक पूरी नहीं हो पायी है. विजिलेंस की टीम को 74 हजार नियोजित शिक्षकों का रिकॉर्ड अब तक नहीं मिल पाया है. वहीं, जांच के संबंध में आज होने वाली निगरानी विभाग की समीक्षा बैठक भी आखिरी वक्त में रद्द कर दिया गया.

आनाकानी करने वालों पर कार्रवाई की छूट
विजिलेंस की टीम लंबे समय से नियोजित शिक्षकों की कुंडली खंगाल रही है. लेकिन रिकॉर्ड की जांच कर रही टीम अपनी जांच पूरी नहीं कर पायी है. शिक्षकों का रिकॉर्ड मुहैया कराने का निर्देश सभी जिला इकाइयों को दी गई थी. लेकिन जिला इकाइयों की तरफ से आनाकानी भी की गई. इस पर शिक्षा विभाग ने ऐसी नियोजन इकाइयों पर तुरंत कार्रवाई करने की टीम को छूट दे दी.

2006 में शुरू हुई थी नियोजन की प्रक्रिया
गौरतलब है कि बिहार में नियोजन की प्रक्रिया साल 2006 में शुरू हुई थी. इसके तहत सूबे में करीब चार लाख नियोजित शिक्षक हैं. कुल नियोजित शिक्षकों में से करीब 74 हजार शिक्षकों का रिकॉर्ड विजिलेंस के हाथ नहीं लग पाया है.

एक डिग्री पर दो जगह नौकरी
विजिलेंस की टीम शिक्षकों के कागजात की जांच कर रही है. विजलेंस विभाग फर्जी कागजात वाले शिक्षकों को दबोचने का लगातार प्रयास कर रही है. शिक्षकों के रिकॉर्ड में हेराफेरी और फर्जी सर्टिफिकेट का रिकॉर्ड गायब किए जाने की भी बात कही जा रही है. जांच में कई शिक्षक ऐसे भी मिले हैं, जो एक ही डिग्री पर दो-दो जगह नौकरी करते हुए पाए गए हैं. साथ ही दोनों जगह से वेतन भी उठा रहे थे.

मुखिया, बीईओ, डीईओ और डीपीओ रडार पर
इस मामले में ना सिर्फ नियोजन इकाई बल्कि कई मुखिया और विभाग के कई अधिकारी भी निगरानी के रडार पर हैं. जानकारी के मुताबिक निगरानी टीम ने 450 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. विजलेंस ने नवादा में सर्वाधिक 45 शिक्षकों पर एफआई आर दर्ज किया है.

जिलावार फर्जी शिक्षकों पर दर्ज मुकदमा

  • नवादा-45
  • जहानाबाद-42
  • बक्सर-31
  • रोहतास -29
  • भोजपुर-16
  • मधुबनी-11
  • दरभंगा-11

इसके अलावे अररिया, मुजफ्फरपुर, मुंगेर पूर्णिया और पटना में में 1-1 फर्जी शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज की गई है. निगरानी की जांच की जद में शिक्षा विभाग के कई बीईओ, डीईओ और डीपीओ भी हैं. ऐसे में 21 अगस्त को निगरानी की होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं.

Intro:बिहार में शिक्षकों के नियोजन में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर रही निगरानी ने एक अहम बैठक 1 अगस्त को बुलाई थी, जिसमें जांच से संबंधित कार्रवाई की समीक्षा होनी थी। लेकिन आखिरी वक्त में यह बैठक स्थगित कर दी गई है।


Body:लंबे समय से नियोजित शिक्षकों के रिकॉर्ड की जांच कर रही विजिलेंस की टीम अब तक अपनी जांच पूरी नहीं कर पाई है। शिक्षा विभाग में शिक्षकों के रिकॉर्ड मुहैया कराने के निर्देश सभी जिला इकाइयों को दिए थे लेकिन जब जिला इकाइयों ने इस में आनाकानी की तो शिक्षा विभाग ने ऐसी नियोजन इकाइयों पर तुरंत कार्रवाई करने की छूट विजिलेंस को दे दी ताकि इन सब के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराई जा सके।
इन सभी मामलों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक 1 अगस्त को पटना में बुलाई गई थी लेकिन आखिरी वक्त में यह बैठक स्थगित कर दी गई। अब यह बैठक 21 अगस्त को होगी। बता दें कि बिहार में 2006 में शिक्षकों के नियोजन का सिलसिला शुरू हुआ था। करीब चार लाख शिक्षक बिहार में नियोजित हैं। लेकिन इनमें से करीब 74000 नियोजित शिक्षकों का रिकॉर्ड विजिलेंस के हाथ नहीं लग पाया है। विजिलेंस इस बात की जांच कर रही है कि कितने शिक्षकों के सर्टिफिकेट सही है और कितने के फर्जी हैं। माना जा रहा है कि जिन शिक्षकों के रिकॉर्ड में हेराफेरी है या जिनके सर्टिफिकेट फर्जी हैं उनके रिकॉर्ड गायब कर दिए गए हैं। निगरानी की जांच में बड़ी संख्या में ऐसे भी शिक्षक मिले जो एक ही डिग्री पर दो दो जगह नौकरी कर रहे थे, और दोनों जगह वेतन भी उठा रहे थे।
इस मामले में ना सिर्फ नियोजन इकाई बल्कि कई मुखिया भी निगरानी के रडार पर हैं। जानकारी के मुताबिक निगरानी टीम ने 400 से ज्यादा फर्जी नियोजित शिक्षकों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की है। निगरानी की जांच की जद में शिक्षा विभाग के कई डीईओ, डीपीओ और बी ई ओ भी हैं। ऐसे में निगरानी की इस महत्वपूर्ण बैठक पर सबकी नजरें हैं।


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