पटना: राजधानी पटना में दानवीर भामाशाह की जयंती रविवार को मनायी (Bhamashah Birth Anniversary Celebrated In Patna) गई. जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ की ओर से पार्टी के कर्पूरी सभागार में समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में ऐसे तो जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को भी आना था लेकिन किसी कारण से वो नहीं पहुंचे. जदयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (JDU Leader Upendra Kushwaha) ने इस समारोह का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने पिछड़ा वर्ग के 27% आरक्षण को बढ़ाने की मांग की. इस कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा समेत पार्टी के कई नेता शामिल हुए थे. प्रदेश भर के कार्यकर्ता भी इस समारोह में हिस्सा लिया.
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पिछड़ों के आरक्षण बढ़ाने की मांग: भामाशाह जयंती समारोह के दौरान जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ के वक्ताओं ने 2005 से पहले बिहार की स्थिति को याद दिलाने की कोशिश की. नेताओं ने कहा कि नीतीश कुमार के शासन में ही व्यवसायियों को सुरक्षा मिली है. वहीं, उपेंद्र कुशवाहा ने तो यहां तक कहा कि पिछड़ी जातियों में कई जातियों को शामिल किया गया है लेकिन आरक्षण का कोटा नहीं बढ़ाया गया है. इसके कारण हिस्सेदारी नहीं मिल रही है इसलिए 27% का जो बंधन है, उसे समाप्त करना चाहिए. साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से भी 50% के आरक्षण के बंधन को समाप्त करने की मांग की. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि व्यवसायिक प्रकोष्ठ के सदस्यों को लोगों के बीच जाना होगा. आप ही लोगों के बीच में से कोई लालटेन ना थाम ले, यह भी देखना होगा क्योंकि लालटेन से बिजली की रोशनी नहीं हो सकती है.
पिछड़ा समाज का जो हिस्सा देश के स्तर पर है उसमें बढ़ोतरी नहीं हुई. आज भी 27 प्रतिशत पर हम लोग उलझे हुए हैं. 27 प्रतिशत का जो एक बंधन है उससे आगे बढ़ाने का जरूरत है. साथ ही भारत सरकार ने जो जाने या अनजाने में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं देने का फैसला लिया है, उस बंधन को भी तोड़ने की जरूरत है. उपेंद्र कुशवाहा, अध्यक्ष, जदयू संसदीय बोर्ड
दानवीर भामाशाह की मनायी गई जयंती: वहीं, जयंती समारोह में जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने एक बार फिर से विशेष राज्य के दर्जे की मांग की. उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा लाभ व्यवसायी को होगा. भामाशाह जयंती समारोह को लेकर जदयू के अंदर सियासत भी हुई. पहले राजगीर में जदयू के व्यवसायिक प्रकोष्ठ की ओर से आयोजन करने का फैसला लिया गया था. लेकिन पार्टी दबाव में उसे रद्द करवा दिया गया. पटना में आयोजित कार्यक्रम में आरसीपी सिंह को आमंत्रित भी नहीं किया और पोस्टर से उनकी तस्वीर भी गायब दिखी. हालांकि, पटना में आयोजित कार्यक्रम में भीषण गर्मी के बावजूद काफी संख्या में कार्यकर्ता भाग लेने पहुंचे थे.
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