गोपालगंजः देश की युवा पीढ़ी ज्यादा कमाने और आगे बढ़ने के लिए विदेशों का रुख कर रही है. लेकिन कई ऐसे युवा भी हैं जिन्हें विदेश में चैन नहीं मिलता और उन्हें अपने वतन लौटने की तड़प होती है. ऐसी ही तड़प लिए गोपालगंज जिले के रहने वाले मोहम्मद बशीर भी विदेश से अपने घर लौट आए. उसके बाद उन्होंने अपने ही गांव में आकर ऐसा बिजनेस शुरू किया. जिससे कई लोगों की रोजी-रोटी चल रही है.
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छोड़ दी सऊदी अरब की अच्छी नौकरी
दरअसल, जिला मुख्यालय गोपालगंज से करीब 25 किलोमीटर दूर कुचायकोट प्रखंड के महुआ गांव निवासी मोहम्मद बशीर सऊदी अरब में अच्छी नौकरी होने के बावजूद अपने वतन लौट आए. वतन की मिट्टी उन्हें अपनी ओर खींच रही थी और एक दिन उनहोंने सऊदी अरब को अलविदा कर दिया. अपने देश वापस आकर उन्होंने मत्स्य पालन की ओर रूख किया और 7 एकड़ में मछली पालन का यह बिजनेस शुरू कर दिया.
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जिले के हैं नंबर वन मत्स्य पालक
मोहम्मद बशीर बताते हैं कि शुरू में काफी परेशानियों का सामना करते हुए उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार अपना प्रयास जारी रखा. आज मोहम्मद बशीर न सिर्फ जिले के सबसे बड़े मछली पालकों में से एक गिने जाते हैं बल्कि कई परिवारों को रोजगार भी देते हैं. मोहम्मद बशीर ने बताया कि सऊदी अरब में काफी दिनों तक काम किया लेकिन वहां की आबो हवा रास नहीं आई. लगातार मेरा वतन मुझे अपनी और खींच रहा था. एक दिन मैंने यह ठान लिया कि क्यों न अपने देश मे रहकर कुछ किया जाए. ये सोचकर मैं विदेश से लौट आया.
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मुर्गी पालन का भी रखते हैं शौक
सउदी से लौटने के बाद वो अपने भाई के पास गुवाहाटी गए. जहां उनकी मुलाकात एक मछली पालक से हुई जिसने मुझे मछली पालन के बारे में बताया. तब क्या था वह अपने घर आए और यहां आकर अपने जमीन में तालाब खुदवाया और मछली पालन शुरू कर दिया. बशीर ने कहा कि तब से लेकर आज तक मैं मछली पालन कर रहा हू. साथ ही वो मुर्गी पालन भी कर रहे हैं. आश्चर्य की बात तो ये है कि मो. बशीर के बाइक की आवाज सुनकर बत्तख मुर्गी उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं. इसके बाद वह मुर्गी और बतख को दाने खिलाते हैं.
कई जिलों में होती है सप्लाई
आज बशीर अपने काम से काफी संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा कि मेरे साथ कई परिवार को भी रोजगार मिल रहा है. मेरी सोच है कि इससे भी बड़ा फॉर्म बनवाकर मछली पालन व मुर्गी पालन को आगे बढ़ांऊ. बशीर ने बताया कि उनकी मछलियां पटना, सिवान, बेतिया छपरा गोपालगंज समेत कई जिलों में सप्लाई होती हैं. उनके तालाब में रेहू, कतला, ग्रास, प्यासी, नैनी, सिल्वर किस्म की मछली का पालन होता है. यहां स्पर्म डालकर बच्चा भी पैदा किया जाता है. इस काम में बशीर को लाखों का मुनाफा होता है.