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इंग्लैंड से आए अतिथियों का जोरदार स्वागत, बोधगया में चलाते हैं 'मम्मी जी एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट' - ईटीवी भारत बिहार

इंग्लैंड से बोधगया आये आगंतुक (Bodhgaya visitors from England) सीधे मम्मी जी चैरिटेबल ट्रस्ट पहुंचे. वहां जाकर उनलोगों ने सभी चीजों की जानकारी ली. उसके बाद और भी मदद करने के लिए खुद मेहनत करने की बात कही. पढ़ें पूरी खबर...

इंग्लैंड से बोधगया आये लोगों का जोरदार स्वागत
इंग्लैंड से बोधगया आये लोगों का जोरदार स्वागत
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Published : Jul 15, 2022, 2:06 PM IST

गया: बिहार के बोधगया में इंग्लैंड से आये लोगों का जोरदार स्वागत (Welcome to People Of England in Bodh Gaya) किया गया है. जिले के प्रसिद्ध बोधगया की धरती पर आये विदेशी आगंतुक सीधे बोधगया में मम्मी जी एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट पहुंचे. वहां पर निशुल्क शिक्षा और मुफ्त में होने वाली सारे कार्यो की सराहना की. वहीं बच्चों ने आये विदेशी लोगों को दिखाने के लिए योगा, कराटे और अन्य रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी.

ये भी पढ़ें: अधर में लटके अपने 'ड्रीम प्रोजेक्ट' का हाल देखने आज ताजपुर आ रहे हैं सीएम नीतीश कुमार

बच्चों को दी जाती है मुफ्त शिक्षा: दरअसल गया जिले में भगवान बुद्ध की पावन ज्ञान भूमि बोधगया के बगहा गांव स्थित मम्मी जी एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा और उनके काम के सारे सामान मुफ्त में दिये जाते हैं. वहीं उन बच्चों को देखने के लिए इंग्लैंड से आये कुछ लोग आये थे. उन लोगों को मम्मी जी निशुल्क विद्यालय के छात्रों ने भारतीय परंपरा के अनुसार माथे पर कुमकुम-तिलक और आरती कर गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत किया. वहीं विद्यालय पहुंचने के पूरे मार्ग पर बच्चों ने आकर्षक रंगोली बनाई थी. जिसे देखकर वे लोग काफी खुश हुए. विद्यालय के सचिव मुन्ना पासवान ने मम्मी जी चैरिटेबल ट्रस्ट के किये गये सारे कामों के बारे में जानकारी दी.


काम के देखरेख की जांच करने पहुंचे लोग: वहीं इस मौके पर समाजसेवी फ्रांसीसी महिला डॉ. जेनी पेरे उर्फ मम्मी जी, उनके पुत्र फ्रैब्रिक लाइजबा ने कहा कि वे पहली बार यहां के काम को देखने लंदन से बोधगया आये हैं. उनके बेटे ने बताया कि पिछले बीस सालों से गरीब बच्चों को बोधगया की धरती पर निःशुल्क सेवा दी जा रही है. पठन-पाठन के अलावे बच्चियों को सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर शिक्षा, कराटे और योगा सिखाकर उनके भविष्य को संवारने का काम किया जा रहा है.

काफी खुश दिखीं समाजसेवी महिला: वहीं समाजसेवी महिला के बेटे फ्रैब्रिक लाइजबा ने बताया कि मेरी मां ने इन तमाम बातों को सुनने के बाद बोधगया आने की इच्छा जाहिर की. जिसके बाद हम अपनी मां के साथ बोधगया पहुंचे हैं. यहां आकर काफी खुशी हो रही है. यहां के गरीबी क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को देखकर काफी अच्छा लगा. यहां के बच्चे भारत के बोधगया की रहने वाली दुलारी मां के रूप में जानते हैं.

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वहीं समाजसेवी महिला और उसके बेटे ने कहा कि हमदोनों लंदन जाकर इन बच्चों के पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने के लिए अभियान चलाएंगे. उससे मिलने वाली मदद की राशि भारत भेजेंगे. जिससे गरीब बच्चों के सपनों को सच किया जा सके. उसके बाद महिला के पौत्र डैन लाइजबा ने कहा कि यहां आकर काफी खुशी हो रही है. अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं.

गया: बिहार के बोधगया में इंग्लैंड से आये लोगों का जोरदार स्वागत (Welcome to People Of England in Bodh Gaya) किया गया है. जिले के प्रसिद्ध बोधगया की धरती पर आये विदेशी आगंतुक सीधे बोधगया में मम्मी जी एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट पहुंचे. वहां पर निशुल्क शिक्षा और मुफ्त में होने वाली सारे कार्यो की सराहना की. वहीं बच्चों ने आये विदेशी लोगों को दिखाने के लिए योगा, कराटे और अन्य रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी.

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बच्चों को दी जाती है मुफ्त शिक्षा: दरअसल गया जिले में भगवान बुद्ध की पावन ज्ञान भूमि बोधगया के बगहा गांव स्थित मम्मी जी एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा और उनके काम के सारे सामान मुफ्त में दिये जाते हैं. वहीं उन बच्चों को देखने के लिए इंग्लैंड से आये कुछ लोग आये थे. उन लोगों को मम्मी जी निशुल्क विद्यालय के छात्रों ने भारतीय परंपरा के अनुसार माथे पर कुमकुम-तिलक और आरती कर गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत किया. वहीं विद्यालय पहुंचने के पूरे मार्ग पर बच्चों ने आकर्षक रंगोली बनाई थी. जिसे देखकर वे लोग काफी खुश हुए. विद्यालय के सचिव मुन्ना पासवान ने मम्मी जी चैरिटेबल ट्रस्ट के किये गये सारे कामों के बारे में जानकारी दी.


काम के देखरेख की जांच करने पहुंचे लोग: वहीं इस मौके पर समाजसेवी फ्रांसीसी महिला डॉ. जेनी पेरे उर्फ मम्मी जी, उनके पुत्र फ्रैब्रिक लाइजबा ने कहा कि वे पहली बार यहां के काम को देखने लंदन से बोधगया आये हैं. उनके बेटे ने बताया कि पिछले बीस सालों से गरीब बच्चों को बोधगया की धरती पर निःशुल्क सेवा दी जा रही है. पठन-पाठन के अलावे बच्चियों को सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर शिक्षा, कराटे और योगा सिखाकर उनके भविष्य को संवारने का काम किया जा रहा है.

काफी खुश दिखीं समाजसेवी महिला: वहीं समाजसेवी महिला के बेटे फ्रैब्रिक लाइजबा ने बताया कि मेरी मां ने इन तमाम बातों को सुनने के बाद बोधगया आने की इच्छा जाहिर की. जिसके बाद हम अपनी मां के साथ बोधगया पहुंचे हैं. यहां आकर काफी खुशी हो रही है. यहां के गरीबी क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को देखकर काफी अच्छा लगा. यहां के बच्चे भारत के बोधगया की रहने वाली दुलारी मां के रूप में जानते हैं.

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वहीं समाजसेवी महिला और उसके बेटे ने कहा कि हमदोनों लंदन जाकर इन बच्चों के पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने के लिए अभियान चलाएंगे. उससे मिलने वाली मदद की राशि भारत भेजेंगे. जिससे गरीब बच्चों के सपनों को सच किया जा सके. उसके बाद महिला के पौत्र डैन लाइजबा ने कहा कि यहां आकर काफी खुशी हो रही है. अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं.

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