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डीजीपी एसके सिंघल को पटना हाईकोर्ट से फटकार.. डीएसपी को डीमोट करने का मामला - पटना हाईकोर्ट से फटकार

एक पुलिस अधिकारी के प्रमोशन के मामले में बिहार के DGP Bihar SK Singhal पर पटना हाईकोर्ट ने आदेश नहीं मानने को लेकर contempt of court की कार्रवाई करने की बात कही. डीजीपी ने कोर्ट से समय मांगा है. पढ़ें पूरी खबर.

DGP BIHAR SK SINGHAL
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Published : Aug 19, 2022, 8:33 AM IST

पटना: बिहार के डीजीपी एसके सिंघल (DGP BIHAR SK SINGHAL) की पटना हाईकोर्ट में एक पुलिस अधिकारी के प्रमोशन के मामले में जमकर फजीहत हुई. हाईकोर्ट ने डीएसपी के पद पर प्रमोशन के बाद फिर से डिमोट किये गये एक अधिकारी का डिमोशन रद्द कर फिर से डीएसपी पद पर बहाल करने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश को डीजीपी ने नहीं माना. नाराज कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई चलायी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान डीजीपी की जमकर फजीहत हुई.

ये भी पढ़ेंः PFI मामले पर बोले DGP एस के सिंघल- मिले हैं कई अहम सबूत, NIA कर रही है विस्तृत जांच

क्या है मामलाः मामला त्रिपुरारी प्रसाद नाम के सब इंस्पेक्टर के प्रमोशन से जुड़ा है. राज्य सरकार ने 2013 में त्रिपुरारी प्रसाद को सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर और फिर 2019 में डीएसपी पद पर प्रमोशन दिया. बाद में सरकार ने कहा कि त्रिपुरारी प्रसाद के खिलाफ 2006 में ही निगरानी विभाग ने केस दर्ज कर रखा है. ऐसे में उनका प्रमोशन रद्द कर डिमोशन कर दिया गया. त्रिपुरारी प्रसाद ने अपने डिमोशन के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 2021 में ही पटना हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने डिमोशन रद्द करने का आदेश दिया था. लेकिन बिहार पुलिस ने कोर्ट के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई नहीं की. ऐसे में त्रिपुपारी प्रसाद ने हाईकोर्ट में बिहार के डीजीपी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने की याचिका दायर की. पटना हाईकोर्ट में जस्टिस पीबी बैजन्त्री की बेंच में याचिका पर सुनवाई के दौरान 17 अगस्त को बिहार के डीजीपी को पेश होने को कहा गया था.

कोर्ट ने कहा- क्या डीजीपी पर चार्ज फ्रेम करेंः कोर्ट के निर्देश पर बिहार के डीजीपी बुधवार को हाजिर हुए. बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकीलों ने लंबी जिरह की. खुद डीजीपी भी अपने बचाव में पक्ष रखते रहे, लेकिन कोर्ट ने बार-बार यही पूछा कि उसके आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया. डीजीपी और राज्य सरकार के वकील कोर्ट द्वारा पूछे जा रहे सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे थे. कोर्ट ने संविधान से लेकर कानूनी प्रावधानों पर डीजीपी और राज्य सरकार के वकीलों से कई सवाल पूछे. कोर्ट ने बार-बार डीजीपी से ये पूछा कि वे आज शाम तक प्रमोशन का आर्डर निकालेंगे या हम आपके खिलाफ चार्ज फ्रेम करें. डीजीपी और सरकारी वकील लगातार ये दलील दे रहे थे कि, याचिका दायर करने वाले त्रिपुरारी प्रसाद को प्रमोशन नहीं दिया जा सकता. लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को खारिज कर दी.

डीजीपी ने कुछ घंटों का मांगा समयः बिहार के डीजीपी एसके सिंघल औऱ राज्य सरकार के वकीलों ने कोर्ट के आदेश को टालने की पूरी कोशिश की. नाराज कोर्ट ने कहा कि वह कुछ देर में ये फैसला लेगा कि आगे क्या करना है. इसके बाद बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने कहा कि वे कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे. राज्य सरकार के वकीलों ने कहा कि कोर्ट शाम 6 बजे तक ऑर्डर निकालने के आदेश में कुछ घंटे की ढील दे. डीजीपी आज ही आदेश निकालेंगे. इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई खत्म की.

ये भी पढ़ेंः DGP के सामने अवैध वसूली करने वाले 4 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, चारों निलंबित

पटना: बिहार के डीजीपी एसके सिंघल (DGP BIHAR SK SINGHAL) की पटना हाईकोर्ट में एक पुलिस अधिकारी के प्रमोशन के मामले में जमकर फजीहत हुई. हाईकोर्ट ने डीएसपी के पद पर प्रमोशन के बाद फिर से डिमोट किये गये एक अधिकारी का डिमोशन रद्द कर फिर से डीएसपी पद पर बहाल करने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश को डीजीपी ने नहीं माना. नाराज कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई चलायी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान डीजीपी की जमकर फजीहत हुई.

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क्या है मामलाः मामला त्रिपुरारी प्रसाद नाम के सब इंस्पेक्टर के प्रमोशन से जुड़ा है. राज्य सरकार ने 2013 में त्रिपुरारी प्रसाद को सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर और फिर 2019 में डीएसपी पद पर प्रमोशन दिया. बाद में सरकार ने कहा कि त्रिपुरारी प्रसाद के खिलाफ 2006 में ही निगरानी विभाग ने केस दर्ज कर रखा है. ऐसे में उनका प्रमोशन रद्द कर डिमोशन कर दिया गया. त्रिपुरारी प्रसाद ने अपने डिमोशन के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 2021 में ही पटना हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने डिमोशन रद्द करने का आदेश दिया था. लेकिन बिहार पुलिस ने कोर्ट के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई नहीं की. ऐसे में त्रिपुपारी प्रसाद ने हाईकोर्ट में बिहार के डीजीपी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने की याचिका दायर की. पटना हाईकोर्ट में जस्टिस पीबी बैजन्त्री की बेंच में याचिका पर सुनवाई के दौरान 17 अगस्त को बिहार के डीजीपी को पेश होने को कहा गया था.

कोर्ट ने कहा- क्या डीजीपी पर चार्ज फ्रेम करेंः कोर्ट के निर्देश पर बिहार के डीजीपी बुधवार को हाजिर हुए. बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकीलों ने लंबी जिरह की. खुद डीजीपी भी अपने बचाव में पक्ष रखते रहे, लेकिन कोर्ट ने बार-बार यही पूछा कि उसके आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया. डीजीपी और राज्य सरकार के वकील कोर्ट द्वारा पूछे जा रहे सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे थे. कोर्ट ने संविधान से लेकर कानूनी प्रावधानों पर डीजीपी और राज्य सरकार के वकीलों से कई सवाल पूछे. कोर्ट ने बार-बार डीजीपी से ये पूछा कि वे आज शाम तक प्रमोशन का आर्डर निकालेंगे या हम आपके खिलाफ चार्ज फ्रेम करें. डीजीपी और सरकारी वकील लगातार ये दलील दे रहे थे कि, याचिका दायर करने वाले त्रिपुरारी प्रसाद को प्रमोशन नहीं दिया जा सकता. लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को खारिज कर दी.

डीजीपी ने कुछ घंटों का मांगा समयः बिहार के डीजीपी एसके सिंघल औऱ राज्य सरकार के वकीलों ने कोर्ट के आदेश को टालने की पूरी कोशिश की. नाराज कोर्ट ने कहा कि वह कुछ देर में ये फैसला लेगा कि आगे क्या करना है. इसके बाद बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने कहा कि वे कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे. राज्य सरकार के वकीलों ने कहा कि कोर्ट शाम 6 बजे तक ऑर्डर निकालने के आदेश में कुछ घंटे की ढील दे. डीजीपी आज ही आदेश निकालेंगे. इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई खत्म की.

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