शहडोल (अखिलेश शुक्ला): किसी ने सोचा भी न होगा कि एक आदिवासी संभाग में रहते हुए, ऐसे बड़े-बड़े काम भी किये जा सकते हैं. अगर दिल से मेहनत की जाए और हार्ड वर्क किया जाए, तो तरक्की जरूर मिलती है. आज हम जिन दो युवाओं की बात करने जा रहे हैं, इन दोनों ही युवाओं ने ऐसा काम कर दिखाया है, कि आने वाले समय में इनका बड़ा नाम होगा. एक दोस्त ने पहले इस काम की नींव रखी और फिर दूसरे दोस्त का साथ मिला. जिसके बाद इनका काम अब विदेशों तक अपनी चमक बिखेरना शुरू कर चुका है.
कौन हैं दोनों युवा?
हम जिन दो युवाओं की बात कर रहे हैं वो दोनों शहडोल जिले के ही रहने वाले हैं. लेकिन इनका काम अनूपपुर जिले के कोतमा के पास इंडस्ट्रियल एरिया कदम टोला में है. इस काम की सबसे पहले शुरुआत संजीत गुप्ता ने की थी, जो इंदौर से बीकॉम ग्रेजुएट हैं. साल 2020 से अपने खुद के मसाले का काम कर रहे हैं. अनूपपुर के इंडस्ट्रियल एरिया कदमताल में अपनी मसाले की फैक्ट्री लगा कर रखी है. करीब 1 साल पहले साल 2024 में स्कूल में पढ़ने वाले दोस्त शाश्वत सिंह का उन्हें साथ मिला. तो अब उनका यही काम विदेश में भी पैर पसारना शुरू कर चुका है. शाश्वत सिंह ने इंजीनिरिंग की पढ़ाई की है.
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मसाले के काम से बना रहे पहचान
संजीत कुमार गुप्ता बताते हैं कि, ''वो अपना खुद का काम शुरू करना चाहते थे. इससे पहले उन्होंने कई कामों में प्रयास भी किया. उन्होंने साल 2019 में ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स का काम शुरू किया और बाहर से पूरी तरह से ऑर्गेनिक प्रोडक्ट मंगवाते और बेचते थे. लेकिन एक साल के काम के बाद उन्हें इसमें थोड़ी निराशा हाथ लगी. क्योंकि ये प्रोडक्ट दूसरे प्रोडक्ट से महंगे होते थे. क्योंकि ये प्रोडक्ट ऑर्गेनिक थे, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि काम कुछ इसी दिशा में करना है.
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2020 में शुरु की मसाला फैक्ट्री
साल 2020 में उन्होंने मसाला फैक्ट्री लगाने की ठानी. उसमें भी उन्होंने इस बात का ख्याल रखा कि इसमें इसके औषधीय गुणों को जिंदा रखना है. इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अनूपपुर के इंडस्ट्रियल एरिया कदम टोला में अपनी मसाला फैक्ट्री स्थापित की और वहीं से अपने मसाले का काम शुरू कर दिया. इस मसाले से अब उनको एक अलग पहचान मिल रही है.
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मसालों के औषधीय गुण बचाने का प्रयास
संजीत गुप्ता बताते हैं कि, ''उन्होंने मसाले का काम शुरू करने का ठान तो लिया था. लेकिन उनके सामने चुनौती थी कि दूसरों से अलग क्या होगा. इसलिए उन्होंने प्रयास किया कि जिन मसालों को वो तैयार करेंगे, उनके औषधीय गुण बरकरार रहे इसका प्रयास करेंगे. इसीलिए उन्होंने इसके लिए काफी रिसर्च किया और जो मशीन अपनी फैक्ट्री में लगवाई हैं वो पुराने जमाने की चक्की की तरह है. इसमें मोटर लगे हुए हैं. यह मशीन बहुत स्लो गति में मसालों को धीरे-धीरे पीसती है.''
''ज्यादातर देखा जाता है कि, इन मशीनों का महाराष्ट्र में प्रचलन बहुत ज्यादा है. वजह यह है कि वहां क्वालिटी का विशेष ध्यान रखा जाता है. उन्हीं जगहों के मसाले को देखते हुए हमने भी क्वालिटी का ध्यान रखा. हमारा प्रयास यही रहा कि जो मसाले में औषधीय गुण पाए जाते हैं, मसाला तैयार होने के बाद उसकी क्वालिटी बरकरार रहे.''
लाख से शुरु किया करोड़ों का प्रोजेक्ट बना
संजीत गुप्ता बताते हैं कि, ''उन्होंने अपने मसाले के कारोबार की शुरुआत 7 लाख रुपये से की थी. लेकिन अब ये प्रोजेक्ट एक करोड़ के लगभग पहुंच चुका है. अभी हम और कई मशीन ऐड कर रहे हैं और हमारी कोशिश यही है कि हम मसाले की वैराइटी भी बढ़ाएंगे और अभी जितना मसाला बना रहे हैं उसकी तादाद भी बढ़ाएंगे.''
आयुर्वेद सेक्टर में भी कदम रखने की तैयारी
संजीत कुमार गुप्ता कहते हैं कि, ''वह मसाले का काम तो कर ही रहे हैं साथ में अपनी फैक्ट्री में कई और मशीन ऐड कर रहे हैं और आगे चलकर उनके कई प्रोजेक्ट पाइपलाइन पर हैं, जिसमें आयुर्वेद प्रोडक्ट पर भी वह काम करना शुरू करेंगे. जैसे अश्वगंधा, सफेद मूसली, कौंच बीज, ताल मखाना इन सब के काम भी वह शुरू करेंगे. उनकी प्रक्रिया चालू है और जल्दी इनका काम भी शुरू हो जाएगा.
अभी कहां भेजते हैं, आगे कहां की तैयारी?
मसाला किंग संजीत कुमार आगे बताते हैं कि, ''अभी तो उनके जो मसाले के प्रोडक्ट हैं. वो शहडोल जिले के बुढार, छत्तीसगढ़ के महेंद्रगढ़, पेंड्रा, और डिंडोरी तक पहुंच रहे हैं. अभी वो इतना प्रोडक्ट तैयार नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी सप्लाई कर सकें. अभी और मशीनों के आर्डर किए हैं और आगे चलकर रायपुर जैसा बड़ा मार्केट भी पकड़ने की तैयारी में हैं. जिसमें शहडोल जिला भी शामिल रहेगा.'' मसाला किंग संजीत कुमार गुप्ता बताते हैं कि, ''उनका टारगेट है 10 हजार दुकानों तक अपने मसाले की सप्लाई करना. जिसके लिए वो लगातार हार्ड वर्क कर रहे हैं.''
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विदेशों में पैर पसारने की तैयारी
संजीत कुमार गुप्ता बताते हैं कि, ''पिछले 1 साल से उनका दोस्त भी उनके साथ पार्टनरशिप में आ चुका है और उनके साथ ही काम कर रहा है. इसलिए उन्होंने अपने काम को भी बढ़ाने के बारे में सोचा है और इसीलिए इसकी शुरुआत भी कर दी है. अब वह डोमेस्टिक का पूरा काम देखेंगे और जो उनका दोस्त है शाश्वत सिंह वो विदेश का एक्सपोर्ट का पूरा कारोबार देखेगा. वहां भी हम अपनी सप्लाई शुरू करेंगे.''
दुबई में भेजा हल्दी
संजीत कुमार गुप्ता के पार्टनर और दोस्त शाश्वत सिंह कहते हैं कि, ''अब दोनों दोस्त अपने मसाले का कारोबार विदेश में भी फैलाएंगे और इसके लिए उन्होंने सूरत से ट्रेनिंग भी ली है जो की पूरी हो चुकी है.'' शाश्वत सिंह बताते हैं, ''इसकी शुरुआत भी वो कर चुके हैं और हल्दी का एक ट्रिप वो दुबई में भेज चुके हैं. जिसमें 18 टन हल्दी वो दुबई भेजे हैं, और आगे जल्द ही उनके बनाए हुए मसाले को विदेशों में भी एक्सपोर्ट किया जाएगा.''
कीमत का रखा ख्याल, कितनों को दी नौकरी
संजीत कुमार बताते हैं कि, ''उन्होंने अपने मसाले में क्वालिटी का विशेष ध्यान रखा है. बात रेट की करेंगे तो जो बाजार में जो मसाले बिकते हैं उसी के आसपास उनके भी मसालों के रेट रहते हैं.'' संजीत कुमार गुप्ता कहते हैं कि, ''उन्होंने अपनी फैक्ट्री में अभी 15 लोगों को नौकरी दे रखी है. जैसे-जैसे काम आगे बढ़ता जाएगा व्यापार बढ़ेगा तो और लोगों को रोजगार भी मिलेगा. ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने में वो सक्षम हो पाएंगे.''