सागर (कपिल तिवारी): महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. महाशिवरात्रि देश के अलग-अलग अंचल में अलग अलग तरीके से मनायी जाती है. इसी तरह बुंदेलखंड में भोलेनाथ के ब्याह की अनूठी परंपरा है. जो बसंत पंचमी से शुरू होती है और महाशिवरात्रि तक चलती है. सागर रहली मार्ग पर ढाना कस्बे में स्थित पटनेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ का विवाह समारोह बसंत पंचमी में तिलक उत्सव के साथ शुरू होता है और बुंदेलखंड की विवाह परंपरा के अनुसार हल्दी और संगीत की रस्म भी होती है.
पटनेश्वर मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा को आज भी बखूबी निभाया जाता है. परंपरा अनुसार, भगवान भोलेनाथ को उनके भक्त महाशिवरात्रि के पहले हल्दी लगाते हैं और जमकर नाच गाना करते हैं. हल्दी और संगीत की रस्म के बाद आज बुधवार को भोलेनाथ दूल्हा बनकर गौरी को ब्याहने बारात लेकर निकलेंगे.
मराठा रानी लक्ष्मीबाई खैर ने बनवाया था मंदिर
सागर रहली मार्ग पर स्थित प्राचीन और ऐतिहासिक पटनेश्वर मंदिर का निर्माण 300 साल पहले मराठा रानी लक्ष्मीबाई खैर ने कराया था. मराठा रानी काफी धर्म परायण थी और उन्होंने सागर, रहली के आसपास कई मंदिरों का निर्माण कराया, जो मंदिर बुंदेलखंड इलाके और आसपास काफी प्रसिद्ध हैं. रैली का हरसिद्धि माता मंदिर, पंढरी नाथ मंदिर, टिकट ओरिया मंदिर सहित धन का पत्नेश्वर मंदिर भी रानी लक्ष्मीबाई खैर ने बनवाया था.
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कहा जाता है कि पटनेश्वर मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू प्रकट है. रानी लक्ष्मीबाई खैर को सपना आया था, तब उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया था. दरअसल रहली रानी लक्ष्मीबाई गढ़ था और वह जब रहली जाती थीं, तो ढाना में उनका पड़ाव रहता था. जहां रानी ने ढाना के पास शिव मंदिर और बावड़ी का निर्माण कराया था. जिसे लोग आज पटनेश्वर नाम से जानते हैं. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला भरता है. जहां हजारों की संख्या में शिवभक्त इकट्ठा होते हैं.
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पटनेश्वर मंदिर में पंचदेव विराजमान
पटनेश्वर मंदिर की एक और प्रसिद्धि की वजह है. कहा जाता है कि यहां भगवान शिव पंचदेव के रूप में विराजमान हैं. पहले ईश्वर का निराकार रूप था. जब उसे साकार किया गया, तो पंचदेव की स्थापना की गयी. पंचदेव को पांच तत्वों का अधिपति माना गया है. पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु को पंचदेव माना गया है. इसी आधार पर पटनेश्वर मंदिर में भगवान शिव के चारों तरफ चार देव स्थापित हैं.
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महाशिवरात्रि की अनूठी परंपरा
मंदिर समिति के सदस्य राजीव हजारी के मुताबिक, ''पटनेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि त्योहार की परंपरा अन्य मंदिरों से हटकर है. यहां भगवान शिव का विवाह समारोह बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है. बुंदेलखंड की विवाह परंपराओं के अनुसार, भगवान शिव और गौरी का ब्याह रचाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन बाकायदा भोलेनाथ का तिलक होता है और बसंत पंचमी से विवाह उत्सव शुरू हो जाता है. बसंत पंचमी से महाशिवरात्रि के बीच बुंदेलखंड की विवाह परंपराओं के अनुसार कई तरह की रस्में निभाई जाती हैं. बसंत पंचमी पर तिलक होने के बाद महाशिवरात्रि के 1 दिन पहले हल्दी और संगीत की रस्म होती है. जिसमें भगवान भोलेनाथ के भक्त बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और भोलेनाथ को हल्दी चढ़ते हैं और फिर जमकर नाच गाना होता है.''