रायसेन: भारत के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक रायसेन के भोजपुर में स्थित है. इसे भोजेश्वर शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर रायसेन की पहाड़ी पर बना है. इस प्राचीन मंदिर में विशालकाय शिवलिंग स्थापित है. यह हर वर्ष शिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में शिव भक्त आते हैं. मान्यता है कि यहां भगवान शिव का पवित्र जल से अभिषेक करेंगे मनोकामना पूर्व होती है.
शिवरात्रि पर लगता है भक्तों का तांता
रायसेन के भोजपुर में बना भोजेश्वर मंदिर प्रचीन है. यहां महादेव के दर्शन करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन शिवरात्रि और श्रावन के महीने में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और यहां मेला के साथ साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है. बता दें कि इस शिवलिंग को एक ही पत्थर को तरास कर बनाया गया है. यह मंदिर अपने विशाल शिवलिंग के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है. जिसे परमार वंश के राजा भोज द्वारा 1010 से 1053 ई. मे बनवाया गया था यहां मौजूद शिवलिंग 18.5 मीटर लंबा और 7.5 मीटर चौड़ा हे जो विश्व के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है.
साल में एक बार खुलता है मंदिर का ताला
रायसेन में भोलेनाथ का एक और प्राचीन दुर्ग पहाड़ी पर स्थित है. इसे सोमेश्वर धाम शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर का ताला साल में एक बार सिर्फ महाशिवरात्रि के पर्व पर ही खोला जाता है. बाकी समय यहां पर ताला लगा रहता है. हिंदू समुदाय के लोग लंबे समय से इस मंदिर का ताला खोलने की मांग पर अड़े हुए हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग नहीं खोल रहा है. यहां महाशिवरात्रि पर सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है.
- शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को एक समझने की न करें भूल, दोनों का है क्या है महत्व
- छिंदवाड़ा में भिखारी भगवान के लिए मांगते हैं भीख, मंदिर निर्माण में कर रहे दान
प्रशासन ने सुरक्षा के किए इंतजाम
महाशिवरात्रि पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रायसेन जिला प्रशासन द्वारा भोजेश्वर और सोमेश्वर मंदिर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. किसी प्रकार की कोई अनहोनी ना हो और आज सामाजिक तत्वों पर भी नकेल कसी जा सके इसलिए जगह-जगह चेकिंग पॉइंट भी बनाए गए हैं. वाहनों के लिए मंदिर से दूर पार्किंग की व्यवस्था कराई गई.