कोटा: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने मेडिकल कॉलेज में पीजी कोर्सेज के एडमिशन के लिए कट ऑफ परसेंटाइल को एक बार फिर कम कर दिया है. सभी कैटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए अब यह कट ऑफ परसेंटाइल 5 कर दी गई है. जबकि इससे पहले पीजी कोर्सेज में एडमिशन के लिए 4 जनवरी 2025 को कट ऑफ परसेंटाइल में कमी की गई थी. तब जनरल और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए 50 परसेंटाइल से 15, ओबीसी (एनसीएल), एससी-एसटी कैटेगरी के लिए 40 से कम कर 10 कर किया गया था.
कट-ऑफ परसेंटाइल में कमी किए जाने के कारण हजारों नए पात्र-कैंडिडेट को ऑल इंडिया कोटा, स्टेट-कोटा व डीम्ड यूनिवर्सिटी कोटा के पीजी कोर्स में प्रवेश का अवसर मिलेग. एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने इसे गुणवत्ता से समझौता बताया है. साथ ही उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में पीजी की खाली रही सीटों के चलते ही यह निर्णय लिया गया है.
नॉन क्लीनिकल ब्रांच में पद, प्रतिष्ठा और पैसा नहीं : एक्सपर्ट शर्मा ने बताया कि एमबीबीएस कर चुके पात्र और प्रतिभाशाली मेडिकोज को इन नॉन क्लीनिकल पीजी कोर्स में पद, प्रतिष्ठा व पैसा नजर नहीं आ रहा है. यानी कि भविष्य दिखाई ही नहीं देता और यही कारण है कि ये इन पीजी कोर्स में प्रवेश नहीं लेते, फिर इन सीटों पर प्रवेश के लिए ही कट ऑफ परसेंटाइल को घटाया जाता है. पीजी कोर्स की सीटें रिक्त रह जाने के कारण ही ऐसा किया गया है.
सरकारी मेडिकल कॉलेज की नॉन क्लीनिकल सीट्स भी खाली : देव शर्मा ने बताया कि ऑल इंडिया व स्टेट कोटा की खाली पीजी सीटों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो ज्ञात होता है कि देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में एनाटॉमी, बायोकेमेस्ट्री, फार्मोकोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन व कम्युनिटी-मेडिसिन जैसे नॉन-क्लीनिकल विषयों के पीजी कोर्स की सीटें खाली हैं. इन सीटों पर प्रवेश को लेकर कैंडिडेट में कतई उत्साह नहीं है. राजस्थान स्टेट नीट पीजी काउंसलिंग के स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर, आरएनटी उदयपुर, जेएलएन अजमेर, कोटा व झालावाड़ में भी नॉन क्लीनिकल पीजी कोर्स की सीटें खाली हैं.
निजी मेडिकल कॉलेज में ज्यादा स्थिति खराब : एक्सपर्ट शर्मा का मानना है कि नीट पीजी कोर्स में प्रवेश को लेकर प्राइवेट मेडिकल संस्थानों की स्थिति और भी बदतर है. राजस्थान में नीट पीजी स्टेट काउंसलिंग के स्ट्रे-वैकेंसी राउंड के लिए 366 पीजी सीटें खाली हैं. इन रिक्त सीटों में से 337 प्राइवेट मेडिकल संस्थानों की हैं. ऐसा ही हाल अन्य राज्यों का भी है. प्राइवेट मेडिकल संस्थानों की इन खाली सीटों को भरने का दबाव भी नीट पीजी 2024 कट ऑफ परसेंटाइल को कम किए जाने का एक कारण है.