छिंदवाड़ा: पराली जलाने से होने वाली समस्या और किसानों की लागत कम करने के लिए एक ऐसी मशीन बाजार में आई है, जो पर्यावरण को तो बचाएगी ही इसके साथ-साथ किसानों को मालामाल भी कर देगी. इससे जमीन की सेहत की सुधरेगी. इस मशीन से एक दिन में करीब 6 से 8 एकड़ खेत की बुआई की जा सकती है. इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है. आखिर क्या है यह कृषि का अद्भुत यंत्र, जानिए.
एक साथ तीन काम करेगी मशीन
मक्के, धान और गेहूं की फसल काटने के बाद खेतों में खड़े डंठल जिसे पराली कहा जाता है, उसे किसान अधिकतर जला देते हैं. इसकी वजह से पर्यावरण प्रदूषण होता है और जमीन की उर्वरक क्षमता भी खत्म हो रही थी. इसका तोड़ निकलते हुए सुपर सीडर और हैप्पी सीडर मशीन बाजार में आई है जो एक साथ तीन काम करेगी. पराली को काटने के साथ ही जमीन में मिलाकर एक साथ बुवाई भी कर देगी. जिससे किसानों के खेत में एक साथ तीन काम होंगे. इस मशीन का प्रदर्शन छिंदवाड़ा के चांद में कलेक्टर शीलेंद्र सिंह की अगुवाई में किया गया.
बुआई के साथ हरी खाद भी बनाएगी मशीन, समय की बचत
खेतों से मक्के की फसल लेने के बाद खड़े डंठल किसानों के लिए समस्या का सबक बनते हैं. हैप्पी सीडर मशीन डंठलों को तोड़ मरोड़ कर जमीन में दबा देगी. जिससे खेतों में हरी खाद बनेगी, जो फसल के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है. इसके साथ ही जिस काम को करने में किसानों को अपने खेतों में तीन-तीन बार समय देना पड़ता है वह एक ही बार में हो जाएगा.
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मशीन खरीदी के लिए सरकार दे रही है सब्सिडी
छिंदवाड़ा कृषि उपसंचालक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि, ''हैप्पी सीडर या सुपर सीडर खरीदने पर किसानों को 1 लाख 5 हजार रुपए के अनुदान राशि के साथ ही सरकार द्वारा निर्धारित किसानों को 1650 रुपए प्रति एकड़ का अनुदान खेतों में इस मशीन का उपयोग करने पर दिया जाता है.''
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नरवाई प्रबंधन का बेहतर विकल्प है यह मशीन
कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने छिंदवाड़ा के चांद में नरवाई प्रबंधन पर किसानों की कार्यशाला के दौरान इस मशीन का संचालन देखा और कहा कि, ''भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार नरवाई प्रबंधन को लेकर हमेशा चिंतित रहती है कि इसका सही निस्तारण कैसे हो सके, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे. यह मशीन पर्यावरण को बचाने के साथ ही किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित होगी. इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ेगी और किसानों को अधिक उपज भी मिलेगी.''